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राफेल सौदा दो सरकारों के बीच हुआ, तब मैं राष्ट्रपति नहीं था : मैक्रों

Thu, 27 Sep 2018 04:04 AM IST
एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र
एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र Updated Thu, 27 Sep 2018 04:04 AM IST
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emmanuel macron says Rafael deal happened between the two governments, then I was not the president
इमैनुएल मैक्रों
फ्रांस के साथ राफेल सौदे पर भारत में मचे घमासान के बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि यह सौदा दो देशों की सरकारों के बीच हुआ है। उन्होंने कहा कि राफेल समझौता सरकार से सरकार के बीच तय हुआ और भारत-फ्रांस के बीच 36 लड़ाकू विमानों को लेकर जब अरबों डॉलर का यह करार हुआ था उस वक्त वह सत्ता में नहीं थे।
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फ्रांस के राष्ट्रपति ने यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर एक प्रेसवार्ता में दिया। उनसे पूछा गया था कि क्या भारत सरकार ने किसी बिंदु पर फ्रांस या फ्रांसीसी दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी दसॉल्ट से कहा था कि उन्हें राफेल करार के लिए भारतीय साझेदार के तौर पर रिलायंस को स्वीकार करना है। भारत ने करीब 58,000 करोड़ रुपए की लागत से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए गत वर्ष सितंबर में फ्रांस के साथ अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इससे डेढ़ साल पूर्व पीएम नरेंद्र मोदी ने पेरिस यात्रा के दौरान इस प्रस्ताव की घोषणा की थी। विमानों की आपूर्ति सितंबर 2019 से शुरू होगी। 
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मैक्रों पिछले साल मई में फ्रांस के राष्ट्रपति बने हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में पत्रकारों को बताया, ‘मैं बहुत साफ-साफ कहूंगा कि यह सरकार से सरकार के बीच हुई बातचीत थी और मैं सिर्फ उसी बात की तरफ इशारा करना चाहूंगा जो पिछले दिनों पीएम मोदी ने बहुत स्पष्ट तौर पर कही।’ मैक्रों ने राफेल सौदे पर विवाद के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा, ‘मुझे और कोई टिप्पणी नहीं करनी। मैं उस समय पद पर नहीं था और मैं जानता हूं कि हमारे नियम बहुत स्पष्ट हैं।’ फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने बल देकर कहा कि दो सरकारों के बीच यह अनुबंध एक व्यापक ढांचे का हिस्सा है जो भारत-फ्रांस के बीच सैन्य व रक्षा गठबंधन है।
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यह सिर्फ औद्योगिक संबंध नहीं, रणनीतिक गठबंधन है

फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा, ‘यह सौदा मेरे लिए बेहद अहम है क्योंकि यह सिर्फ औद्योगिक संबंध नहीं बल्कि एक रणनीतिक गठबंधन है। मैं बस उस तरफ ध्यान दिलाना चाहूंगा जो पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर कहा है।’ राफेल समझौते पर भारत में पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति ओलांद के उस बयान पर विवाद पैदा हुआ जिसमें उन्होंने कहा कि राफेल समझौते में भारतीय कंपनी का चयन नई दिल्ली के इशारे पर किया गया था।


भारत में ओलांद के इस बयान पर मचा है बवाल

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने ‘मीडियापार्ट’ नामक एक स्थानीय समाचार वेबसाइट से कहा था कि भारत सरकार ने 58,000 करोड़ रुपए के राफेल समझौते में फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट के लिए भारतीय भागीदार के तौर पर उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस के नाम का प्रस्ताव दिया था और इसमें फ्रांस के पास कोई विकल्प नहीं था।
 
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