फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   America ›   donald trump forced to adopt barack obama foreign policy

ओबामा की विदेश नीतियों को अपनाने पर मजबूर हुए ट्रंप

Sat, 04 Feb 2017 08:27 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस Updated Sat, 04 Feb 2017 08:27 AM IST
विज्ञापन
 donald trump forced to adopt barack obama foreign policy
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की विदेश नीतियों को पूरी तरह नकारने का वादा करने के बाद अब ओबामा की कुछ खास रणनीतियों को अपनाने जा रहे हैं। इनमें इस्राइल को विवादित जमीन पर नई बस्तियां बसाने से रोकना, रूस को क्रीमिया से बाहर निकलने की मांग और ईरान को बैलेस्टिक मिसाइल परीक्षण से रोकने की धमकी शामिल हैं। यानी ट्रंप को अब समझ में आ रहा है कि चुनावों में वादे करना और सत्ता में आकर नीतियां बनाना अलग-अलग बात होती है।
विज्ञापन


व्हाइट हाउस द्वारा जारी इन सभी रणनीतियों में इस्राइल को पूर्वी येरुशलम और वेस्ट बैंक में नई यहूदी बस्तियों की बसाहट के लिए चल रहे निर्माण कार्य का विस्तार रोकने की अपील सबसे ज्यादा अनपेक्षित है। व्हाइट हाउस ने कहा कि - ‘कुछ विस्तार कार्यक्रम शांति के लक्ष्य को पाने के लिए मददगार साबित नहीं हो सकते हैं।’ 
विज्ञापन


दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मूल की अमेरिकी राजदूत निकी हेली ने ऐलान किया है कि अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंध तब तक नहीं हटाए जाएंगे जब तक कि रूस यूक्रेन को अस्थिर करना न छोड़ दे और क्रीमिया से अपने सैनिकों को वापस न बुला ले। उधर, अमेरिका द्वारा ईरान पर उन सभी आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी की जा रही है जो ओबामा प्रशासन ने करीब एक वर्ष पहले बनाई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इनके अलावा व्हाइट हाउस प्रवक्ता सीन स्पाइसर ने इस बात के भी कोई संकेत नहीं दिए हैं कि वह ओबामा द्वारा लाए गए आणविक समझौते को खत्म करने जा रहा है। यानी ट्रंप प्रशासन विदेश नीतियों को बदलने के अपने वादे के बावजूद पूर्ववर्ती अमेरिकी प्रशासन की नीतियों में बदलाव कर पाने में असफल रहा है। 

ऑस्ट्रेलिया के साथ शरणार्थी समझौते से ‘निराश’ हैं ट्रंप

 donald trump forced to adopt barack obama foreign policy
व्हाइट हाउस प्रवक्ता सीन स्पाइसर ने कहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए शरणार्थी समझौते से ‘अत्यंत निराश’ हैं। उन्होंने संकेत दिया कि प्रशासन समझौते का पालन करेगा लेकिन हर प्रवासी की ‘कड़ी जांच’ की जाएगी। 

बाद में यह पूछे जाने पर कि क्या समझौता बरकरार रहेगा, ट्रंप ने कहा, ‘देखेंगे कि क्या होता है।’ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने कहा था कि ट्रंप प्रशांत देशों में अपतटीय हिरासत केंद्रों में रह रहे 1,250 शरणार्थियों को स्वीकार करने के समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं। ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि पूर्ववर्ती प्रशासन के कदमों का सम्मान किया जाना चाहिए लेकिन उन पर सवाल भी उठाए जा सकते हैं। 
ट्रंप ने कहा कि - ‘मेरे मन में ऑस्ट्रेलिया के लिए बहुत सम्मान है, मैं एक देश के रूप में आस्ट्रेलिया से प्रेम करता हूं लेकिन हमें तब समस्या हुई, जब पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि वह जेलों में बंद 1000 से अधिक अवैध प्रवासियों को देश में प्रवेश देंगे और वे उन्हें इस देश में लेकर आएंगे तो मैंने केवल इसका कारण पूछा है कि हम ऐसा क्यों कर रहे हैं?’
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed