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नए गूगल असिस्टेंट के राजनीतिक दुरुपयोग की उठी बहस
एजेंसी, सेन फ्रांसिस्को
Updated Fri, 11 May 2018 04:37 AM IST
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स्मार्टफोन के लिए बनाया गया गूगल का नया डिजिटल असिस्टेंट इतने स्वाभाविक रूप से बातचीत करता है कि यह आपको असली आदमी की तरह लग सकता है। तकनीकी जगत की इस महारथी कंपनी की तरफ से इस हफ्ते पेश किए गए वास्तविक आवाज वाले रोबो सहायक को देखकर जहां कुछ लोगों ने तारीफ की है, वहीं अन्य ने नैतिकता का सवाल उठा दिया है कि मानव जैसे प्रतीत होने वाले सॉफ्टवेयर का उपयोग कैसे किया जा सकता है। इन लोगों ने इस सॉफ्टवेयर के मार्केटिंग और राजनीतिक अभियानों में दुरुपयोग का सवाल उठाया है।
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गूगल के भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचाई ने मंगलवार को गूगल असिस्टेंट के खुद फोन कॉल करते हुए एक हेयर सैलून और एक रेस्टोरेंट में बुकिंग कराने की रिकॉर्डिंग सभी के सामने पेश की थी, जिसमें गूगल असिस्टेंट वहां के स्टाफ से बात कर रहा है, लेकिन वे नहीं जान पाए कि वे एक असली कस्टमर के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सॉफ्टवेयर से बात कर रहे हैं।
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दरअसल नए गूगल असिस्टेंट आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में ‘डुप्लेक्स’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे एक असली आदमी की तरह दूसरे से फोन पर जोड़ती है, जो आश्चर्य में डाल देता है।
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दो दिन पहले मंगलवार को कैलिफोर्निया स्टेट स्थित गूगल के गृह नगर माउंटेन व्यू में आयोजित हुई करीब 7 हजार डेवलपर्स की वार्षिक डेवलपर कांफ्रेंस गूगल आई/ओ में इसका प्रदर्शन होने के बाद शुरू हुई बातचीत तेजी से एक बहस में बदल गई कि जब मानवीय आवाज वाले सॉफ्टवेयर से बात की जा रही हो तो फोन पर दूसरी तरफ मौजूद आदमी को यह बताया जाना चाहिए। इस पर भी बहस शुरू हो गई कि कैसे इस तकनीक का दुरुपयोग सजीव लगने वाली ‘रोबो कॉल’ के रूप में मार्केटिंग और राजनीतिक अभियानों में किया जा सकता है।
ट्विटर को हैशटैग शुरू करने का आइडिया देने वाले प्रॉडक्ट डिजाइनर क्रिस मैसिना ने ट्वीट किया, गूगल डुप्लेक्स अभी तक #आईओ18 में सबसे अविश्वसनीय और भयानक चीज है। द फोर्थ इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन क लिए विश्व इकोनॉमिक फोरम के केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एवं मशीन लर्निंग प्रोजेक्ट के प्रमुख काए फिर्थ-बटरफील्ड के अनुसार, गूगल डुप्लेक्स एक अहम बदलाव है और मशीनों के उचित संचालन को तत्काल समझने की आवश्यकता की तरफ इशारा करता है, जो जनता को यह सोचने में बेवकूफ बना सकता है कि वे (मशीन) मानव ही हैं। फिर्थ-बटरफील्ड ने आगे कहा, ये मशीन राजनीतिक दलों की तरफ से आपको कॉल कर सकती हैं और वोट देने के लिए ज्यादा दृढ़ तरीके से आपकी सोच प्रभावित कर सकती हैं।
निजी डाटा की चोरी का भी सवाल उठा
जब इस समय चारों तरफ ऑनलाइन प्राइवेसी (निजता) का मुद्दा छाया हुआ है, गूगल असिस्टेंट के नए रूप के पेश होने पर इससे जुड़ी चिंताएं और बढ़ गईं। कई लोगों ने सवाल किए कि किसी तरह का डाटा डिजिटल असिस्टेंट अपने पास जमा करेगा और कौन उस तक पहुंच बना सकता है?
आवाज में उतार-चढ़ाव भी मानवीय अंदाज में
डुप्लेक्स ब्लॉग पोस्ट में गूगल के इंजीनियरों यानिव लेवियाथन और योस्सी मातियास ने कहा, गूगल असिस्टेंट से आप कहिए कि चार लोगों के लिए शाम 6 बजे एक टेबल बुक कराए। यह एक मानव आवाज में फोन कॉल करता है। इस आवाज में उसी तरह उतार-चढ़ाव वाले शब्द जैसे ‘उम्म’ और ‘ऊहं’ आदि होते हैं, जिनका उपयोग आमतौर पर कोई आदमी बात करते हुए मन में विचार जुटाते समय करता है।