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एच-1B वीजा कोटे में कटौती करेगा अमेरिका, तो उसे ही होगा नुकसान!
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
Updated Wed, 09 Aug 2017 08:19 AM IST
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अमेरिका एच-1बी वीजा देना कम करने के बारे में सोच क्या रहा है, इससे उसे ही नुकसान उठाने की बात सामने आने लगी है। ऐसी रिपोर्ट खुद एक अमेरिकी रिसर्च सेंटर ने दी है, जिसके मुताबिक एच-1बी वीजा नीति में बदलाव लाने की वजह से अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। अमेरिका की ट्रंप सरकार एच-1बी वीजा प्रोग्राम की समीक्षा कर रही है और हो सकता है कि वो एच-1 वीजा प्रोग्राम के तहत अमेरिका आने वाले पेशेवरों की आवाजाही पर सीमित लगाम भी लगाए। अगर अमेरिका ऐसा करता है, तो उसे ही नुकसान उठाना पड़ेगा।
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रिपोर्ट के मुताबिक अगर अमेरिका एच-1बी वीजा कार्यक्रम के नियमों में कड़ाई करता है, तो उसे अपने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में मुश्किलें उठानी पड़ेंगी। क्योंकि अगर एच-1बी वीजा प्रोग्राम में कटौती की जाती है, तो भारत जैसे देशों से आने वाले पेशेवरों की संख्या कम हो जाएगी। इससे अमेरिका को पक्के तौर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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अमेरिका के एक शीर्ष शोध संस्थान सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट (सीजीडी) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार गैर-आव्रजन एच-1बी वीजा की समीक्षा कर रही है। इसका अधिकतर उपयोग भारतीय आईटी पेशेवर करते हैं और यह अमेरिका व भारत दोनों के लिए ही फायदेमंद है।
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इस शोध पत्र के सह-लेखक और सीजीडी में फेलो गौरव खन्ना ने कहा, ‘यह सुनिश्चित करना वास्तव में महत्वपूर्ण है कि दोनों देशों के आईटी क्षेत्र योग्य लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर सकें, क्योंकि यही लोग दोनों देशों की वृद्धि और नवोन्मेष को वास्तव में आगे बढ़ाएंगे।’ यह बात ‘द आईटी बूम एंड अदर यूनिंटेंडेड कांसीक्यूएंसेस ऑफ चेजिंग द अमेरिकन ड्रीम’ शीर्षक की रिपोर्ट में कही गई है। खन्ना ने कहा कि एच-1बी कार्यक्रम का वास्तव में दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ हुआ है।
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रिपोर्ट के मुताबिक अगर अमेरिका एच-1बी वीजा कार्यक्रम के नियमों में कड़ाई करता है, तो उसे अपने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में मुश्किलें उठानी पड़ेंगी। क्योंकि अगर एच-1बी वीजा प्रोग्राम में कटौती की जाती है, तो भारत जैसे देशों से आने वाले पेशेवरों की संख्या कम हो जाएगी। इससे अमेरिका को पक्के तौर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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अमेरिका के एक शीर्ष शोध संस्थान सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट (सीजीडी) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार गैर-आव्रजन एच-1बी वीजा की समीक्षा कर रही है। इसका अधिकतर उपयोग भारतीय आईटी पेशेवर करते हैं और यह अमेरिका व भारत दोनों के लिए ही फायदेमंद है।
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इस शोध पत्र के सह-लेखक और सीजीडी में फेलो गौरव खन्ना ने कहा, ‘यह सुनिश्चित करना वास्तव में महत्वपूर्ण है कि दोनों देशों के आईटी क्षेत्र योग्य लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर सकें, क्योंकि यही लोग दोनों देशों की वृद्धि और नवोन्मेष को वास्तव में आगे बढ़ाएंगे।’ यह बात ‘द आईटी बूम एंड अदर यूनिंटेंडेड कांसीक्यूएंसेस ऑफ चेजिंग द अमेरिकन ड्रीम’ शीर्षक की रिपोर्ट में कही गई है। खन्ना ने कहा कि एच-1बी कार्यक्रम का वास्तव में दोनों अर्थव्यवस्थाओं को लाभ हुआ है।