'बढ़ते आतंकवाद के लिए जिम्मेदार है पाकिस्तान'
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पाकिस्तान भले ही खुद की सरजमीं से आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोपों को नकारता रहा हो, लेकिन आज भी उसकी जमीन से आतंकवाद का भरण-पोषण हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान भी काफी हद तक जिम्मेदार है।
इसका सबूत यहां आजादी से घूम रहे आतंकी और इसकी धरती का आतंक के लिए खुलेआम हो रहा इस्तेमाल है। न्यूयॉक टाइम्स अखबार में छपे एक लेख में यह भी कहा गया है कि कुछ विशेषज्ञों ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) को बढ़ावा देने में भी पाक के हाथ होने की आशंका जताई है।
यह किसी से छिपा नहीं है कि पाक खुफिया एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय मुजाहिदीन लड़ाकुओं को मदद करती रही है। इसके भी कई सबूत मिले हैं कि पाकिस्तान तालिबान के साथ है। यह बात न सिर्फ अफगानिस्तान के लिए चिंताजनक है, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है।
अफगान में भारत की पैठ नहीं चाहता पाक
पाकिस्तान तालिबान और अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों को बढ़ावा देने की बात
हमेशा से नकारता रहा है, लेकिन सच्चाई कुछ और है। हक्कानी नेटवर्क का
प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी पाकिस्तान में बेरोकटोक घूमता है।
यही नहीं, वह
देश की खुफिया एजेंसी के मुख्यालय भी जा चुका है। तालिबान के नए सरगना
मुल्ला अख्तर मोहम्मद मंसूर को भी यहां खुलेआम घूमने में कोई दिक्कत पेश
नहीं आती और कुछ रिपोर्टों की मानें तो अलकायदा सरगना एमन अल-जवाहिरी भी
पाकिस्तान में शरण लिए हुए है।
इसके अलावा यहां के मदरसे भी आतंकी
गतिविधियों में लिप्त हैं। वे नौजवानों को कट्टरता का पाठ पढ़ा रहे हैं। पाकिस्तान अफगानिस्तान के खिलाफ तालिबान को अपने तरीके से इस्तेमाल करता है। क्योंकि वह नहीं चाहता कि अफगानिस्तान पर भारत का प्रभाव बढ़े और उसकी अफगान में पैठ बने। इसलिए अफगान पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए वह खुद का साथ देने वाले तालिबानियों को संरक्षण देने का काम करता रहता है।