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अमेरिका ने फिर कहा- अभी भी आतंकवाद के साथ खड़ा है पाकिस्तान, अच्छा नहीं होगा

Sat, 17 Mar 2018 12:53 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 17 Mar 2018 12:53 PM IST
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America unhappy with Pakistan’s action on terrorism
डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिका ने एक बार फिर पाकिस्तान में हो रही आतंकी गतिविधियों पर सवाल उठाए हैं। अमेरिका ने  कहा कि वह पाकिस्तान के व्यवहार से खुश नहीं है। क्योंकि वहां लगातार आतंकी गतिविधियां जारी हैं, जिसपर लगाम लगाने की जरूरत है। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि आतंकवादियों के खिलाफ भारत को निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खासतौर पर जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ रणनीति तैयार करनी चाहिए।
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अधिकारी ने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान के खिलाफ जो भी जरूरी है वह करने के लिए तैयार है। बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा मिलने वाली सैन्य मदद को बंद कर दिया है। अधिकारी ने कहा कि हम अभी भी मांग कर रहे हैं कि वह पाकिस्तान में पनप रहे आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। उन्होंने यह भी कहा कि हमें यह उम्मीद थी कि पाकिस्तान लश्कर और जैश ए मोहम्मद जैसे संगठनों पर कार्रवाई करेगा लेकिन पाक ने ऐसा नहीं किया।  
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अधिकारी ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद दक्षिण एशिया में आतंकियों के खिलाफ नई नीति निर्धारित की थी। जिसमें ट्रंप प्रशासन ने ध्यान दिया कि पाकिस्तान को छोड़कर अन्य देशों में चीजे सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। लेकिन पाकिस्तान से भी ऐसी ही अपेक्षा की गई थी। 
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उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान द्वारा की गई कार्रवाई से अमेरिका संतुष्ट नहीं है। पाकिस्तान चाहे तो वहां से आतंकवाद को खत्म कर सकता है, वह सक्षम है, लेकिन वह ऐसा नहीं करना चाहता। 

अमेरिका ने पाक को अंतरराष्ट्रीय आतंकी फंडिंग करने वाले देशों की निगरानी सूची (ग्रे लिस्ट) में शामिल करने का फैसला किया था

America unhappy with Pakistan’s action on terrorism
Donald trump
बता दें कि पाकिस्तान को बड़ा झटका देते हुए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी फंडिंग करने वाले देशों की निगरानी सूची (ग्रे लिस्ट) में शामिल करने का फैसला किया था। दुनिया भर में मनी लांड्रिंग की निगरानी करने वाले एफएटीएफ की बैठक में चीन, तुर्की और सऊदी अरब ने पाकिस्तान का बचाव करने की तमाम कोशिश की लेकिन भारत और अमेरिका के सघन अभियान के सामने उनकी एक न चली। आखिर में चीन ने अपना विरोध वापस ले लिया। इससे पहले पाकिस्तान को 2015 तक तीन साल के लिए इस सूची में रखा गया था।

एफएटीएफ के इस फैसले के बाद पाक को अब जून में आधिकारिक रूप से इस सूची में शामिल कर दिया जाएगा। पेरिस में यह बैठक तीन दिन तक चली थी। बैठक में पाकिस्तान के खिलाफ यह कदम अमेरिकी प्रस्ताव के बाद उठाया गया। चीन ने नामांकन के लिए अपनी आपत्ति वापस ले ली थी जिसके बाद इस प्रस्ताव को एफएटीएफ ने 36-1 के अंतर से पारित कर दिया था।

बैठक में सिर्फ तुर्की ने पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया था, जबकि बाकी सभी देश उसके खिलाफ खड़े हो गए। पाक को पहले तीन माह के लिए इस सूची में डालने का फैसला किया गया था।
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