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‘बुढ़ापे की नींद की तरह हर आहट पर चौंकता है अमेरिका’
बीबीसी
Updated Mon, 05 Aug 2013 09:36 AM IST
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भारत में चार दिन के बाद कहीं जाएं तो लगता है कि कुछ नया हो गया है।
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पॉश इलाके में अचानक से एक झुग्गी खड़ी मिलती है या फिर सैंकड़ों एकड़ लहलहलाहती फसल के बीच फ़्लाईओवर की नींव डाल दी जाती है। कहीं नए स्कूल तो कहीं नए मॉल।
चार साल के बाद वाशिंगटन लौटा हूँ। मानो लगता है सब कुछ वहीं का वहीं। व्हॉइट हाउस तो वहीं है ही, उसके अंदर राष्ट्रपति भी वही। ग्वांतानामो जेल अभी भी खुली है। जंजीरों में बंधे नारंगी लिबास पहने क़ैदी अभी भी उसी हाल में हैं जैसे बुश के ज़माने में थे।
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बुढ़ापे की नींद की तरह अमेरिका हर आहट पर अभी भी चौंकता है। 11 सितंबर के हमलों के 10-12 साल और इराक, अफ़गानिस्तान, वज़ीरिस्तान पर हज़ारों टन बारूद बरसाने के बाद भी 'होमलैंड' सुरक्षित नहीं हुआ है।
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एक काले राष्ट्रपति को व्हॉइट हाउस की चाभी लिए पांच साल हो गए लेकिन गोरे-काले की बहस ख़त्म नहीं हुई है। अमेरिकी जेलों में अभी भी सबसे ज़्यादा काले नौजवान ही बंद हैं। सुनसान सड़क पर सामने से आ रहे काले व्यक्ति को देखकर लोग अभी भी सड़क की दूसरी ओर क्रॉस कर जाते हैं।
अमेरिकी सपने
कितनी पीढ़ियां जवान होकर बूढ़ी होने को आईं लेकिन बरसों पहले चोरी छिपे यहां घुसकर अमेरिकी सपने की तलाश कर रहे लाखों लातिनी अमेरिकी अभी भी माथे पर अवैध का ठप्पा लिए घूम रहे हैं।
कभी स्कूली बच्चों पर तो कभी चर्च और गुरूद्वारों पर कोई न कोई सिरफिरा अभी भी गोलियां बरसा जाता है। ग़ालिब की शराब की तरह बंदूक की लत अमेरिका से छूटती ही नहीं।
फ़ॉक्स टीवी चैनल के ऐंकर अभी भी एक मुसलमान विद्वान और लेखक से पूछते हैं कि उन्होंने मुसलमान होकर ईसा मसीह पर क़िताब लिखने की जुर्रत कैसे की। चार साल पहले मेरे ऑफ़िस के बाहर बैठने वाला भिखारी आज भी वहीं दिखता है।
कुछ चीज़े बदली भी हैं। ओबामा अब उम्मीद और बदलाव जैसे शब्दों का पहले जितना इस्तेमाल नहीं करते। सरकार लोगों के और क़रीब हो गई है। उनके ईमेल भी पढ़ती है और टेलीफ़ोन भी सुनती है। साठ साल पहले जॉर्ज ऑरवेल की लिखी कल्पनाएं अब साकार हो रही हैं।
लेकिन इन सबसे दुनिया को हताश होने की ज़रूरत नहीं है। अमेरिका खुश है। गर्मी पूरे जोश के साथ मनाई जा रही है। ओबामा 52 साल के हो गए हैं और कैंप डेविड में जन्मदिन मना रहे हैं। मेरे ऑफ़िस के बाहर बैठनेवाला भिखारी एक बच्चे का बाप बन गया है।