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बाइडन ने जलवायु परिवर्तन पर चर्चा के लिए मोदी समेत दुनिया के 40 नेताओं को भेजा न्योता
Sat, 27 Mar 2021 06:40 AM IST
Kuldeep Singh
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 27 Mar 2021 06:40 AM IST
सार
- 22 और 23 अप्रैल को होने वाले शिखर सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग को भी बुलावा भेजा गया, मगर इमरान को नहीं दिया गया आमंत्रण
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जो बाइडन (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने पहली वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत दुनिया के 40 बड़े नेताओं को निमंत्रण भेजा है। बाइडन प्रशासन ने बताया कि उन्होंने 22 और 23 अप्रैल को होने वाले इस शिखर सम्मेलन के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी न्योता भेजा है। मगर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को आमंत्रण नहीं भेजा गया है।
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अमेरिकी सरकार के अधिकारियों ने बताया कि इस समारोह के जरिए अमेरिका को जीवाश्म ईंधन से होने वाले जलवायु प्रदूषण को कम करने में वैश्विक स्तर पर कोशिशों में तेजी लाने में मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, दुनिया के 40 नेताओं को निमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है। यह जलवायु चर्चा वर्चुअल तरीके से होगी और और इसका सीधा प्रसारण किया जाएगा। मोदी, पुतिन और जिनपिंग के अलावा जिन लोगों को बुलाया जा रहा है, उनमें बंग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, भूटान के प्रधानमंत्री लोते शेरिंग, जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा, ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसनारो, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन शामिल हैं।
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व्हाइट हाउस ने कहा कि शिखर सम्मेलन के आयोजन से पहले अमेरिका पेरिस समझौते के तहत अपने नए राष्ट्रीय निर्धारित अंशदान के रूप में महत्वाकांक्षी 2030 उत्सर्जन लक्ष्य की घोषणा करेगा। गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को बाहर किए जाने के बाद बाइडन ने अपने कार्यकाल के पहले ही दिन व्हाइट हाउस में पेरिस जलवायु समझौते में अमेरिका की दोबारा वापसी की घोषणा की थी।
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वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री से नीचे रखने पर रहेगा जोर
व्हाइट हाउस ने कहा, यह ग्लासगो में इस साल नवंबर में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (सीओपी-26) के मार्ग में एक मील का पत्थर होगा। शिखर सम्मेलन और सीओपी-26 का मुख्य लक्ष्य वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने के प्रयासों को गति देना है। इस सम्मेलन में उन उदाहरणों को भी रेखांकित किया जाएगा कि किस प्रकार जलवायु महत्वाकांक्षा से अच्छे वेतन वाली नौकरियां पैदा होती हैं और नई तकनीक विकसित करने में मदद मिलती है। साथ ही कमजोर देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के अनुसार ढलने में सहायता मिलती है।