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US: 'मर जाऊं तब भी फलस्तीन समर्थन नहीं छोड़ूगा', अमेरिकी जेल से छूटने के बाद फलस्तीनी कार्यकर्ता ने भरी हुंकार

Mon, 23 Jun 2025 01:57 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 23 Jun 2025 01:57 PM IST
सार

फलस्तीनी एक्टिविस्ट महमूद खलील को अमेरिका में तीन महीने से ज्यादा हिरासत में रखने के बाद रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उन्होंने इस्राइल और गाजा युद्ध के खिलाफ विरोध जारी रखने का ऐलान किया। खलील ने कहा कि चाहे जान चली जाए, फिर भी फिलिस्तीन के लिए आवाज उठाते रहेंगे। अमेरिकी सांसद ओकासियो-कोर्टेज ने उनकी गिरफ्तारी को संविधान पर हमला बताया।

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America Palestinian activist Mahmoud Khalil released from immigration detention center
फलस्तीनी कार्यकर्ता महमूद खलील की रिहाई - फोटो : एएनआई / रॉयटर्स

विस्तार

अमेरिका में इस्राइल विरोधी प्रदर्शन के चलते तीन महीने से ज्यादा समय तक हिरासत में रहे फलस्तीनी कार्यकर्ता महमूद खलील ने रिहाई के बाद बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि चाहे उन्हें जेल में डाल दिया जाए या मार दिया जाए, लेकिन वो फलस्तीन के समर्थन में बोलना नहीं छोड़ेंगे। शनिवार को न्यू जर्सी के नेवार्क इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खलील का जोरदार स्वागत हुआ, जहां कई समर्थकों के साथ अमेरिकी सांसद एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज भी मौजूद रहीं।
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महमूद खलील, जो पहले कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट स्टूडेंट रह चुके हैं, अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की सख्ती और फलस्तीन समर्थक छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का बड़ा चेहरा बन गए थे। वह करीब 104 दिनों तक लुइसियाना के इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर में बंद रहे। रिहाई के बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि अमेरिका और कोलंबिया यूनिवर्सिटी, दोनों गाजा पर हो रहे 'नरसंहार' में हिस्सेदार हैं और वो इसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
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अमेरिकी सरकार पर फंडिंग का लगया आरोप
खलील ने कहा कि अमेरिकी सरकार इस नरसंहार को फंडिंग दे रही है और कोलंबिया यूनिवर्सिटी इसमें निवेश कर रही है। इसलिए मैं हर हालत में विरोध करता रहूंगा, चाहे मुझे फिर से जेल में डाल दें या मार दें, मैं फलस्तीन के लिए आवाज उठाता रहूंगा। उनकी पत्नी ने हाल ही में बेटे को जन्म दिया है, जिसे देखकर खलील ने कहा कि वो अपने बच्चे के भविष्य के लिए भी यह लड़ाई जारी रखेंगे।
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बेबुनियाद आरोप में लगाकर भेजा जेल
एलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज ने खलील की गिरफ्तारी को अमेरिका के संविधान के पहले संशोधन (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ खलील पर हमला नहीं था, बल्कि हर अमेरिकी नागरिक के अधिकारों पर हमला था। ट्रंप प्रशासन उनकी राजनीतिक सोच से असहमत है, इसलिए बेबुनियाद आरोप लगाकर उन्हें जेल में डाला गया।

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कानून के उल्लंघन का आरोप नहीं लगा
खलील पर किसी कानून के उल्लंघन का आरोप नहीं लगा है। लेकिन ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ऐसे प्रदर्शन जो 'यहूदी विरोधी' या हमास समर्थक नजर आते हैं, उनमें शामिल किसी भी गैर-अमेरिकी को देश से निकाला जाना चाहिए। प्रशासन ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इस्राइल पर हमले का हवाला देते हुए यह रुख अपनाया था।


अमेरिकी कोर्ट ने दिया आदेश
हालांकि, अमेरिकी जिला न्यायाधीश माइकल फरबियार्ज ने खलील की रिहाई का आदेश देते हुए कहा कि एक कानूनी निवासी, जिस पर कोई हिंसक आरोप नहीं है और जो भागने की संभावना नहीं रखता, उसे हिरासत में रखना बेहद असामान्य बात है। लेकिन अमेरिकी सरकार ने खलील की रिहाई को चुनौती देते हुए अपील दायर कर दी है।

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बाकी बंदियों के लिए भी आवाज उठाई
खलील ने डिटेंशन सेंटर में बाकी बंदियों के अधिकारों की भी बात उठाई। उन्होंने कहा कि कोई भी इंसान गैरकानूनी नहीं होता। नागरिक हो या प्रवासी, सभी इंसानों के बराबर अधिकार हैं। मैं न सिर्फ फलस्तीन के लिए, बल्कि हर पीड़ित के लिए बोलता रहूंगा। उनकी यह जिद फिलहाल अमेरिका की राजनीति में गर्म बहस का विषय बनी हुई है।


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