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क्या खत्म होगा दोनों देशों के बीच टकराव: अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता पर टिकी रहेंगी दुनिया भर की निगाहें

Tue, 05 Oct 2021 04:25 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 05 Oct 2021 04:25 PM IST
सार

जनवरी 2020 में हुए फेज-1 समझौते के तहत चीन अमेरिका से 2017 की तुलना में 200 अरब डॉलर की अधिक वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने पर राजी हुआ था। ये खरीदारी उसे 2021 के अंत तक करनी थी। लेकिन ये समझौता होने के कुछ ही समय बाद ट्रंप प्रशासन ने चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध छेड़ दिया...

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America has said that he will now talk openly with China on the question of trade dispute
व्यापार विवाद

विस्तार

अमेरिका ने कहा है कि व्यापार विवाद के सवाल पर चीन से अब ‘खुल कर’ बात करेगा। इसे चीन ने एक सकारात्मक संकेत समझा है। हालांकि अमेरिका की व्यापार प्रतिनिधि कैथरीन टाय ने सोमवार अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के सामने दिए भाषण में आरोप लगाया कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समय चीन के साथ अमेरिका का जो व्यापार समझौता हुआ था, उसकी शर्तों को चीन ने पूरा नहीं किया।

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लेकिन मंगलवार को चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक टिप्पणी में कहा- ‘टाय का खुली वार्ता की बात कहना एक सकारात्मक संकेत है। इससे संकेत मिला है कि दोनों देशों के बीच अगली वार्ता अधिक रचनात्मक होगी, क्योंकि गुजरे तीन वर्षों में आपसी आर्थिक टकराव से दोनों देशों को नुकसान हुआ है।’   
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लेकिन ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स इस बात को अहमियत दी है कि अमेरिका चीन के अधिकारियों को आमने-सामने यह बताने जा रहा है कि उन्होंने व्यापार संबंधी अपनी वचनबद्धताओं को नहीं निभाया है। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक अगर अगली वार्ता फलदायी नहीं रही, तो अमेरिका चीन के खिलाफ और सख्त व्यापारिक कदम उठा सकता है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक टाय की जल्द ही चीन के व्यापार प्रतिनिधि लिउ हे के साथ सीधी बातचीत होगी। इसमें ट्रंप के दौर में जनवरी 2020 में हुए फेज-1 समझौते पर चर्चा की जाएगी।
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अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक लिउ के सामने टाय चीन की उन नीतियों को उठाएंगी, जिनका अमेरिकी श्रमिकों और उत्पादकों पर खराब असर पड़ रहा है। वे जोर डालेंगी कि जनवरी 2020 में हुए समझौते में चीन ने जो वादे किए थे, उन्हें वह अक्षरशः निभाए। सोमवार को दिए भाषण में टाय ने आरोप लगाया कि चीन ने व्यापार संबंधी वैश्विक नियमों का पालन नहीं किया है। उसका खराब असर अमेरिकी और दूसरे देशों के श्रमिकों की समृद्धि पर पड़ा है।

जनवरी 2020 में हुए फेज-1 समझौते के तहत चीन अमेरिका से 2017 की तुलना में 200 अरब डॉलर की अधिक वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने पर राजी हुआ था। ये खरीदारी उसे 2021 के अंत तक करनी थी। लेकिन ये समझौता होने के कुछ ही समय बाद ट्रंप प्रशासन ने चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध छेड़ दिया। इससे फेज-1 समझौता खटाई में पड़ गया। अमेरिका के पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकॉनमिक्स के मुताबिक चीन ने जितनी खरीदारी का वादा किया था, उसके सिर्फ 62 फीसदी की खरीदारी ही उसने की है।

ट्रंप प्रशासन ने व्यापार युद्ध के तहत चीन से आयात होने वाली वस्तुओं पर ऊंची दर से शुल्क लगा दिए। बीजिंग स्थित चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज में व्यापार विशेषज्ञ गाओ लिंगयुन ने ग्लोबल टाइम्स से कहा कि टाय के सीधी वार्ता करने के इरादे से जाहिर है कि ऊंचे शुल्क लगाने के अमेरिकी कदम का उलटा असर हुआ। अमेरिका ना तो चीन से आयात होने वाली वस्तुओं का विकल्प ढूंढ पाया, न ही अपनी कंपनियों को चीन में कारोबार समेट कर लौटने के लिए मजबूर कर सका। दूसरी तरफ ऊंचे शुल्क के कारण चीनी वस्तुएं महंगी हो गईं, जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को नुकसान हुआ। उसका अमेरिका में महंगाई बढ़ाने में भी योगदान रहा है।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि अमेरिका-चीन वार्ता का क्या नतीजा रहता है, उसमें दुनिया की दिलचस्पी रहेगी। अगर उन्होंने अपने मतभेदों को हल करने का कोई रास्ता निकाला, तो उसका वैश्विक बाजार को भी मिलेगा।

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