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अमेरिका में तरजीही दर्जा बचाने की आखिरी कोशिश नाकाम, भारत के लिए बड़ा झटका 

Sat, 04 May 2019 05:48 AM IST
Avdhesh Kumar वाशिंगटन/नई दिल्ली
वाशिंगटन/नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Sat, 04 May 2019 05:48 AM IST
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America failed The last attempt to save in preferential status 
पीएम मोदी, डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिका के साथ तरजीही व्यापार के दर्जे को बचाने की आखिरी कोशिश भी नाकाम हो गई। जीएसपी दर्जे पर प्रतिबंध लागू होने के अंतिम दिन 25 अमेरिकी सांसदों ने व्यापार प्रतिनिधि को पत्र लिखकर फैसला टालने की अपील की। इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद शुक्रवार 3 मई से भारत का तरजीही दर्जा खत्म हो गया।
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डेमोक्रेटिक पार्टी के 21 सांसदों के साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर को पत्र लिखकर भारत का जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफ्रेंस (जीएसपी) का दर्जा खत्म नहीं करने का दबाव बनाया। 
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उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे सौदों पर बातचीत जारी रखे जो भारत के साथ आयात-निर्यात बढ़ाने और नौकरियां पैदा करने में मददगार है। भारत में होने वाले चुनावों को देखते हुए इस फैसले को अभी टाल दिया जाना चाहिए। ताकि, नई सरकार बनने के बाद सीमा शुल्क के मुद्दे पर मोलभाव किया जा सके। वर्तमान परिस्थितियों में यह फैसला अमेरिका के हित में नहीं होगा।
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अमेरिका पर प्रतिकूल असर

सांसदों ने पत्र में लिखा कि भारत का तरजीही दर्जा खत्म किए जाने से वहां निर्यात बढ़ाने की योजना बना रही अमेरिकी कंपनियों को झटका लगेगा। इसके अलावा जीएसपी के तहत शुल्क मुक्त भारतीय वस्तुओं का इस्तेमाल करने वाली अमेरिकी कंपनियों को भी करोड़ों रुपये चुकाने पड़ सकते हैं। न्यू टेक्सास में इस तरह की कंपनियों पर बड़ा असर होगा और वहां उत्पादन में गिरावट से नौकरियां घटने की आशंका है। ऐसे में कोई समाधान निकालना अमेरिका के लिए आयात और निर्यात दोनों मोर्चे पर फायदेमंद साबित होगा।

भारत के लिए बड़ा झटका 

अमेरिका की ओर से 1976 से दिया जा रहा तरजीही दर्जा खत्म होना भारत के लिए बड़ा झटका है। जीएसपी के तहत भारत अभी 39 हजार करोड़ रुपये का शुल्क मुक्त निर्यात अमेरिका को करता है। इसमें कृषि उत्पाद, ऑटोमोबाइल, मशीन के पुर्जे और इंजीनियरिंग उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा भारत अभी अमेरिका को 47.9 अरब डॉलर का निर्यात करता है, जबकि आयात सिर्फ 26.7 अरब डॉलर है। ऐसे में 21.2 अरब डॉलर के निर्यात पर नए सिरे से शुल्क लगाए जाने का डर रहेगा। 

मार्च में दिया था नोटिस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4 मार्च को भारत का तरजीही दर्जा खत्म करने की घोषणा करते हुए 60 दिन का नोटिस जारी किया था, जो 3 मई को पूरा हो गया। अमेरिका का कहना था कि भारत को निर्यात में छूट के बावजूद वह अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाता है। अमेरिका ने भारत से अपने कृषि, डेयरी उत्पादों, मेडिकल उपकरणों, आईटी और संचार उपकरणों पर शुल्क घटाकर बड़ा बाजार मुहैया कराने को कहा था और भारत के स्टील व अल्युमीनियम उत्पादों पर भारी शुल्क लगा दिया था।

अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क का फैसला 16 मई तक टाला

तरजीही दर्जे को दोबारा बहाल किए जाने की उम्मीद में भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लागू करने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि बादाम, अखरोट और दाल सहित 29 अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लागू करने का फैसला 16 मई तक टाल दिया गया है। पहले इसमें 2 मई तक छूट प्रदान की गई थी। स्टील और अल्युमीनियम पर अमेरिका के भारी शुल्क के विरोध में जून 2018 में भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लगाने का फैसला किया था। इसके बाद से कई बार इसकी अवधि बढ़ाई जा चुकी है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव विल्बर रॉस और भारत के वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु 6 मई को द्विपक्षीय मुलाकात में इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। 
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