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Joe Biden: राष्ट्रपति बाइडन का हिंद-प्रशांत के तीन देशों का दौरा, महत्वकांक्षी एजेंडे को साधने की कोशिश
Mon, 15 May 2023 06:20 AM IST
गुलाम अहमद
एजेंसी, वॉशिंगटन
एजेंसी, वॉशिंगटन
Published by: गुलाम अहमद
Updated Mon, 15 May 2023 06:20 AM IST
सार
जो बाइडन सबसे पहले हिरोशिमा जाएंगे, जहां वह 19-21 मई तक चलने वाली जी-7 की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस बार जी-7 की मेजबानी जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा कर रहे हैं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन।
- फोटो : ANI
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विस्तार
हिंद प्रशांत के तीन देशों के आठ दिवसीय यात्रा के जरिये अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन महत्वाकांक्षी एजेंडे को साधेंगे। इस यात्रा के जरिये वह दीर्घकालिक सहयोगियों से रिश्ते प्रगाढ़ करेंगे, वहीं पापुआ न्यू गिनी जैसे छोटे देश का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन जाएंगे।
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तीन देशों का दौरा लोगों के बीच यह संदेश भी देने में मददगार साबित हो सकता है कि 80 वर्षीय बाइडन एक बार फिर अमेरिका की बागडोर संभालने में सक्षम हैं। हालांकि, वह अमेरिका की ऋण सीमा बढ़ाने के मुद्दे पर रिपब्लिकन सांसदों के साथ गतिरोध का सामना कर रहे हैं और अगर यह मसला आने वाले हफ्ते में नहीं सुलझा तो देश आर्थिक मंदी की तरफ बढ़ सकता है।
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बाइडन सबसे पहले हिरोशिमा जाएंगे, जहां वह 19-21 मई तक चलने वाली जी-7 की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस बार जी-7 की मेजबानी जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा कर रहे हैं। हिरोशिमा किशिदा का गृहनगर है। यह वही शहर है, जहां अमेरिका ने 1945 में दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया था। बाइडन ने हिंद-प्रशांत में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच क्षेत्र के देशों से संबंध मजबूत करने का आह्वान किया है। इसके बाद वह भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया व जापान के समूह क्वाड की बैठक लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे।
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तिब्बतियों का डीएनए जुटाए जाने पर अमेरिका चिंतित
इधर, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने तिब्बती लोगों का डीएनए जबरन जुटाए जाने की खबरों पर चिंता जाहिर की है। तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में पुलिस जून 2016 से ही पूरे क्षेत्र के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के डीएनए जुटा रही है। ब्लिंकेन ने कहा, 'हम डीएनए संग्रह को तिब्बती आबादी पर नियंत्रण और निगरानी का हथियार बनाए जाने की खबरों पर चिंतित हैं।'
साथ ही जोड़ा कि मानव जीनोमिक डेटा तक पहुंच मानव अधिकारों को लेकर चिंताएं बढ़ाने वाली है और डीएनए के आधार पर जीनोमिक निगरानी के संभावित खतरे को भी बढ़ाती है। गौरतलब है कि डीएनए जुटाना किसी आपराधिक जांच से संबंद्ध नहीं होता है और कोई भी इससे इंकार नहीं कर सकता है। एक सामाजिक नागरिक संगठन सिटीजंस लैब के मुताबिक, शोध से पता चलता है कि बड़े पैमाने पर डीएनए संग्रह करना तिब्बतियों पर सामाजिक नियंत्रण की एक कवायद का हिस्सा है।