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परमाणु हमले से बचने के लिए बनाए थे बंकर अब कैफे और रिजॉर्ट में हो रहे तब्दील
Wed, 31 Jul 2019 09:43 AM IST
Trainee Trainee
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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Published by: Trainee Trainee
Updated Wed, 31 Jul 2019 09:43 AM IST
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bunker resort
- फोटो : social media
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उत्तर पूर्वी यूरोप के देश अल्बानिया में शीत युद्ध के दौरान 1960 से 1980 के बीच करीब पौने दो लाख मिलिट्री बंकर बनाए गए थे। इन बंकरों का इस्तेमाल अब घर, कैफे और रिजॉर्ट के तौर पर हो रहा है। इन बंकरों को शीत युद्ध के दौरान परमाणु हमले से बचने के लिए बनाया गया था।
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वर्तमान समय में अल्बानिया के समुद्र तट पर बने 250 बंकरों को रिजॉर्ट में तब्दील किया जा रहा है। यहां कदम-कदम पर बंकर बने हैं। कई दशकों के कम्युनिस्ट शासन के दौरान ये देश बाकी दुनिया से पूरी तरह से अलग-थलग रहा।
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वामपंथी तानाशाह एनवर होक्सहा को दुश्मनों का ऐसा खौफ हुआ कि उसने पूरे देश में बंकर बनवा डाले। आज ये बंकर पर्यटन का जरिया बन गए हैं। रोजाना डेढ़ हजार से ज्यादा पर्यटक यहां आते हैं। पहाड़ियों से लेकर खेतों तक, हाइवे से लेकर समुद्र तट तक बंकरों का बोलबाला है। तब एक बंकर बनाने में दो बेडरूम का मकान बनाने के बराबर खर्च आया था।
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इन बंकरों को तानाशाह एनवर होक्सहा ने बर्फीले पहाड़ों से लेकर रेतीले समुद्री तटों, घास के मैदानों, जंगलों और यहां तक कि देश के प्रसिद्ध होटल के मैदान तक में बनवा दिया था। बंकरों को बनाने की वजह से ही अल्बानिया यूरोप का सबसे गरीब देश बन गया। लेकिन अब बड़ी तादाद में विदेशी सैलानी बंकरों वाले इस देश में घूमने आते हैं।
ब्रिटिश फोटोग्राफर रॉबर्ट हॉकमैन ने पिछले दस वर्षों की अपनी अल्बानिया की यात्रा के दौरान इन बंकरों को चित्रण किया। फोटोग्राफर ने कहा कि जब दुनिया रॉकेट बना रही थी, तब यहां के शासक बंकर बना रहे थे। उन्होंने बताया कि मैं अल्बानियाई इतिहास के इस संक्रमणकालीन अध्याय का एक रिकॉर्ड बनाना चाहता था, जिसमें न केवल बंकरों को बल्कि अल्बानियाई लोगों और उनके देश के स्थिति को दर्शकों के साथ साझा किया जा सके।
अब यहां बंकरों के कबाड़ को बेचने का रोजगार खूब फल-फूल रहा है। इस काम को करने वाले एडी कहते हैं कि कई बार उन्हें बंकर तोड़ने का ठेका भी मिलता, वो पहाड़ों में जाकर बने बंकर तोड़ते हैं। एडी ने बताया कि वह बचपन में इन बंकरों में छुपकर जर्मन फौजियों को मारने के खेल खेला करते थे।