अमेरिका: गर्भपात अधिकार के समर्थन में फैलता जा रहा है जन आंदोलन
अल्ट्रा वायलेट नाम के संगठन की सह-संस्थापक शौना थॉमस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का लीक हुआ फैसला कोर्ट और जनता के बीच भरोसे के रिश्ते में एक बड़ी खाई पैदा करेगा। अदालतों से अपेक्षा होती है कि वे जनता की सेवा करें। ऐसा ना करने पर उनकी वैधता संदिग्ध होती है...
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अमेरिका में गर्भपात के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का संभावित फैसला लीक होने के बाद से देश भर में जन विरोध बढ़ता जा रहा है। गर्भपात अधिकार के समर्थक संगठनों ने 14 मई को राष्ट्रीय विरोध दिवस मनाने का एलान कर दिया है। वैसे सोमवार को वेबसाइट पोलिटिको.कॉम में ये खबर लीक होने के बाद से देश भर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। वेबसाइट पोलिटिको ने एक दस्तावेज छाप कर दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात को अवैध घोषित करने का निर्णय कर लिया है। ये फैसला जून में सुनाया जाएगा। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उस दस्तावेज के सही होने की पुष्टि कर दी।
1973 के फैसले को पलटने का निर्णय
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रो. एंड वेड नाम से मशहूर मामले में 1973 में दिए अपने फैसले के तहत गर्भपात को संवैधानिक अधिकार घोषित किया था। लेकिन हाल में 13 अमेरिकी राज्यों में गर्भपात को नियंत्रित करने के कानून बनाए गए हैं। उन्हीं में से मिसीसिपी राज्य में बने कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। वेबसाइट पोलिटिको के मुताबिक इसी मामले सुप्रीम कोर्ट ने 1973 के फैसले पर पुनर्विचार किया और जजों ने उसे पलटने का निर्णय लिया है।
विधि विशेषज्ञों के मुताबिक जून में अगर इसी रूप में फैसला आया, तो 13 राज्यों में गर्भपात कराना तुरंत गैर-कानूनी हो जाएगा। प्रोग्रेसिव खेमों में इसे महिला स्वतंत्रता पर एक तगड़ा प्रहार बताया गया है। कई महिला संगठनों ने मिल कर ‘बैंस ऑफ आवर बॉडीज’ (हमारे शरीर से दूर रहो) नाम का मोर्चा बनाया है। इस मोर्चे में प्लान्ड पैरेंटहुड एक्शन फंड, अल्ट्रा-वायलेट, वूमंस मार्च और मूव ऑन जैसे संगठन शामिल हैँ। 14 मई को राष्ट्रीय विरोध दिवस मनाने का आह्वान बैंस ऑफ आवर बॉडीज की तरफ से ही किया गया है।
बैंस ऑफ आवर बॉडीज के वक्तव्य के मुताबिक 14 मई को देश के हर शहर- कस्बे में गर्भपात के अधिकार के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उनके अलावा न्यूयॉर्क, शिकागो, लॉस एंजिल्स, और वॉशिंगटन में चार प्रमुख जुलूस निकाले जाएंगे। प्लान्ड पैरेंटहुड एक्शन फंड की कार्यकारी निदेशक केली रॉबिनसन ने गुरुवार को कहा- ‘हमें उम्मीद है कि चारों बड़े शहरों में लाखों लोग जुलूस में हिस्सा लेंगे। देश भर में होने वाले कार्यक्रमों में भी सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल होंगे। हमने कार्यक्रम इस रूप में बनाया है कि जो जहां है, वहीं अपना विरोध जताएगा।’
फैसला लीक होने से टूटेगा भरोसा
अल्ट्रा वायलेट नाम के संगठन की सह-संस्थापक शौना थॉमस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का लीक हुआ फैसला कोर्ट और जनता के बीच भरोसे के रिश्ते में एक बड़ी खाई पैदा करेगा। अदालतों से अपेक्षा होती है कि वे जनता की सेवा करें। ऐसा ना करने पर उनकी वैधता संदिग्ध होती है। थॉमस ने कहा- ‘हम विरोध दिवस का आयोजन अपने राजनेताओं के सामने अपनी मांग रखने के लिए कर रहे हैं। ये मांग पाखंडी कॉरपोरेट नेताओं के सामने भी पेश होगी, जो गर्भपात विरोधी नेताओं को वर्षों से चंदा दे रहे हैं।’
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक गर्भपात का मुद्दा सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत बन रहा है। उसके प्रोग्रेसिव समर्थक आरोप लगा रहे हैं कि सत्ता में होने के बावजूद जो बाइडेन प्रशासन और डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस मुद्दे पर सिर्फ जुबानी जमा-खर्च किया है। गर्भपात के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए कानून बनाने से वे अभी भी हिचक रहे हैं।