जम्मू-कश्मीर: अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद घुसपैठ बढ़ी, बड़ी वारदात का खतरा

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 02 Oct 2021 08:11 PM IST

सार

जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने वाले ज्यादातर आतंकी जैश-ए-मुहम्मद व लश्कर ए तैयबा से जुड़े हैं।
जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षाबल
जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ बढ़ गई है। राज्य को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद यह पहला मौका है, जब सीमावर्ती राज्य में आतंकी घुसपैठ में तेजी आई है। आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं।
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जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने वाले ज्यादातर आतंकवादी पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद व लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं। ईयू टुडे ने निक्केई एशिया के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह दावा किया है। जानकारों का यह भी कहना है कि लश्कर व जैश के आतंकियों ने अफगानिस्तान में तालिबान की मदद नहीं की, लेकिन ये वहां मौजूद थे। इनके हक्कानी नेटवर्क से संबंध रहे हैं। अब ये जम्मू कश्मीर में भड़काऊ कार्रवाई कर सकते हैं।


जुलाई के बाद 50 आतंकी घुसे
रिपोर्ट में कहा गया है कि ये आतंकी इससे पूर्व अफगानिस्तान में तालिबान और उसके एक गुट हक्कानी नेटवर्क के लिए लड़ रहे थे। वहां की सत्ता पर तालिबान के काबिज होने के बाद इन्होंने जम्मू-कश्मीर की ओर रुख किया। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई के बाद करीब 50 आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुसे हैं। ये अभी सक्रिय हैं। ये आतंकी पाकिस्तान के पंजाब व अफगानिस्तान के सीमावर्ती जनजातीय इलाकों के हैं। जानकारों का कहना है कि जैश व लश्कर के ये आतंकी राज्य में हिंसक वारदात को अंजाम दे सकते हैं। हालांकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों पूरी मुस्तैदी से जुटी हैं और आतंकियों की धरपकड़ लगातार जारी है।

2018 के बाद घटने लगे आतंकी
जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2018 में सबसे ज्यादा आतंकी सक्रिय थे, लेकिन सरकार की तरफ से सीमा की सुरक्षा बढ़ाए जाने और राज्य के पुनर्गठन के बाद उनकी संख्या कम होती गई। इस बीच, आतंकवाद को लेकर हाल ही में आई अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद समेत कम से कम 12 संगठनों का अड्डा बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ आतंकी संगठन 1980 के दशक से ही अस्तित्व में हैं।

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