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अफगानिस्तान: तालिबान के फैसले का उलटा असर, अफीम के कारोबार में भारी उछाल

Thu, 21 Apr 2022 05:28 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 21 Apr 2022 05:28 PM IST
सार

विश्लेषकों का कहना है कि अगर तालिबान सचमुच अफीम की खेती रोकने में सफल रहा, तो यह अफगानिस्तान में एक बड़ा बदलाव होगा। पिछली बार तालिबान जब सत्ता में था, तब उसने अपने कब्जे वाले इलाकों में अफीम का कारोबार रोक दिया था...

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after taliban announces on ban on opium cultivation, boom in opium business
अफीम - फोटो : Getty Images

विस्तार

अफीम की खेती पर रोक लगाने के तालिबान सरकार के फैसले से फिलहाल अफगानिस्तान के अफीम उत्पादकों और विक्रेताओं की चांदी हो गई है। हालांकि उनमें यह डर भी समा गया है कि अगर तालिबान ने सचमुच यह कारोबार रोकने की गंभीरता दिखाई, तो उनकी आमदनी का जरिया खत्म हो जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबित अफीम की खेती पर रोक लगाने के सरकारी एलान के बावजूद कंदहार और हेल्मांद प्रांतों में अफीम के खेतों में चहल-पहल दिख रही है। उधर विक्रेता तीन गुने दाम पर अफीम बेच रहे हैं।

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तालिबान ने अफीम की खेती रोकने का फैसला इसी महीने लिया है। लेकिन इस कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि तालिबान ने इस सीज़न में खेती जारी रखने की इजाजत दी है। इस समय अफगानिस्तान के लोग गहरी मुसीबत में हैं। देश की 95 फीसदी आबादी को पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है। ऐसे में अंदेशा है कि अफीम की खेती रुकने से इस कारोबार से जुड़े लोग भी भुखमरी का शिकार हो जाएंगे।

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हबीतुल्लाह अखुंदजादा ने किया था एलान

लेकिन फिलहाल सूरत अलग है। अफीम कारोबारी अब्दुल कदूस ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘ये अफीम का सीजन है। प्रतिबंध का एलान होने के बाद से हमारा कारोबार तेजी से बढ़ा है।’ कदूस ने बताया कि फिलहाल वे साढ़े 22 हजार डॉलर प्रति दिन का कारोबार कर रहे हैं। अफगानिस्तान में प्रति व्यक्ति सालाना औसत आमदनी 500 डॉलर से भी कम है।

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अफीम किसान बिस्मिल्लाह जान ने कहा- ‘अभी अफीम की कटाई जारी रखने की इजाजत दी गई है। लेकिन बताया गया है कि अगले साल से अफीम की खेती पर रोक लगा दी जाएगी।’ तीन अप्रैल को तालिबान के सर्वोच्च नेता हबीतुल्लाह अखुंदजादा ने कहा था कि अफीम और अन्य मादक पदार्थों की खेती, उसके उत्पादन, इस्तेमाल और परिवहन पर पूरी रोक लगाई जा रही है।

पिछले साल काबुल पर कब्जा जमाने के तुरंत बाद तालिबान के प्रवक्ता जबिनुल्लाह मुजाहिद ने कहा था कि तालिबान अफगानिस्तान को ‘मादक पदार्थों का देश’ नहीं बनने देगा। उसी के मुताबिक इस महीने फैसला लिया गया। जारी आदेश में कहा गया था कि अफीम की फसल को नष्ट कर दिया जाएगा और उसमें शामिल लोगों को शरिया कानून के तहत सज़ा दी जाएगी। मगर अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल नफी तकूर ने निक्कई एशिया से बातचीत में पुष्टि की कि इस साल किसानों को फसल काट लेने की इजाजत दी गई है।

बड़े बदलाव की ओर अफगानिस्तान

विश्लेषकों का कहना है कि अगर तालिबान सचमुच अफीम की खेती रोकने में सफल रहा, तो यह अफगानिस्तान में एक बड़ा बदलाव होगा। पिछली बार तालिबान जब सत्ता में था, तब उसने अपने कब्जे वाले इलाकों में अफीम का कारोबार रोक दिया था। इस बात को संयुक्त राष्ट्र की मई 2001 में जारी एक रिपोर्ट में भी स्वीकार किया गया था। लेकिन पिछले दो दशकों के दौरान देश में गृह युद्ध के माहौल में नशीली पदार्थों का कारोबार तेजी से बढ़ा।



तकूर ने कहा- ‘पिछले अमीरात (इस्लामी शासन) में सुप्रीम लीडर ने अफीम पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। उस पर पूरा अमल हुआ। इस बार हमें उम्मीद है कि अफीम की खेती को खत्म करने में हमें लोगों का पूरा साथ मिलेगा।’

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