निजता की चिंता: अब वियतनाम में भी डाटा संरक्षण की पहल, अमेरिकी कंपनियों को होगी मुश्किल
इंटरनेट कंपनियों की नुमाइंदगी करने वाले एक समूह ने चेतावनी दी है कि नए नियमों से वियतनाम की डिजिटल महत्त्वाकांक्षाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इस समूह की सदस्य कंपनियों में गूगल भी शामिल है। इस समूह ने कहा है कि लागू किए गए नियम मुक्त व्यापार के नियमों का उल्लंघन करते हैं...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चीन और यूरोप के बाद अब वियतनाम ने भी सख्त डाटा संरक्षण नियम लागू करने की पहल की है। वहां डिक्री ऑन पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन (निजी डाटा संरक्षण आदेश) जारी किया गया है। इसमें प्रावधान है कि अगर कंपनियों को संवेदनशील डाटा की प्रोसेसिंग करनी है या डाटा देश से बाहर भेजना है, तो इसके लिए उन्हें पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा डाटा संग्रह करने से पहले उन्हें यूजर्स की इजाजत लेनी होगी। ऐसी इजाजत के लिए उन्हें एप या वेबसाइट पर पॉप-अप विंडो की सुविधा देनी होगी।
इंटरनेट कंपनियों की नुमाइंदगी करने वाले एक समूह ने चेतावनी दी है कि नए नियमों से वियतनाम की डिजिटल महत्त्वाकांक्षाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इस समूह की सदस्य कंपनियों में गूगल भी शामिल है। इस समूह ने कहा है कि लागू किए गए नियम मुक्त व्यापार के नियमों का उल्लंघन करते हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि वियतनाम के लिए इन नियमों को लागू करना आसान नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि देश में क्लाउड कंप्यूटिंग का लगभग 80 फीसदी हिस्सा विदेशी कंपनियों के हाथ में है। सरकार की योजना के मुताबिक डिक्री अगले एक दिसंबर से लागू हो जाएगी। गौरतलब है कि यूरोप में जनरल डाटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन बीते एक नवंबर से लागू हो गए। उसके पहले चीन में पर्सनल डाटा के संरक्षण का कानून लागू किया गया था।
डाटा पर व्यापक नजरिया
पर्यवेक्षकों के मुताबिक दूसरे देशों के विपरीत वियतनाम में सरकार ने संवेदनशील डाटा के मामले में केंद्रीकृत नजरिया अपनाया है। यहां लागू किए जा रहे नियमों के तहत स्वास्थ्य, वित्त, राजनीति, स्थल, जीवन, और सामाजिक संबंधों से संबंधित हर डाटा को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। ऑस्ट्रेलिया में सिडनी स्थित न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर ग्राहम ग्रीनलीफ ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- संवेदनशील डाटा किसे कहा जाए, इस बारे में वियतनाम ने बहुत व्यापक नजरिया अपनाया है। वहां दरअसल अब किसी भी डाटा की प्रोसेसिंग करने के लिए कंपनियों को सरकार से इजाजत लेनी होगी।
पांच फीसदी तक का जुर्माना
इस डिक्री को वियतनाम के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय ने तैयार किया है। इस पर अमल सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी उसी की होगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इस नियमों को इस सिद्धांत पर आधारित किया गया है कि कंपनियों को सिर्फ जरूरी डाटा ही इकट्ठा करना चाहिए और वह भी उनके पास न्यूनतम समय तक ही रहना चाहिए। इन नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर वियतनाम में होने वाली उनकी वार्षिक आमदनी के पांच फीसदी तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
हनोई स्थित इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज एंड मीडिया डेवलपमेंट के निदेशक न्गुयेन क्वांग दोंग ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘नागरिकों के नजरिए से अच्छी बात यह है कि अब उन्हें ज्यादा अधिकार मिलेंगे, जबकि कारोबार घरानों को अधिक जवाबदेह होना पड़ेगा। अभी सूचना के मामले में कंपनियां फायदे में हैं। ऐसे में यह सरकार का कर्त्तव्य है कि वह नागरिकों की रक्षा करे।’ लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि इन नियमों की वजह से कंपनियों पर भारी बोझ पड़ेगा। खास कर वियतनाम में कारोबार करने वाली अमेरिकी कंपनियों के सामने इससे नई चुनौतियां पैदा होंगी।