सत्ता पर कब्जे के बाद सेना ने म्यामांर में सैकड़ों सांसदों को किया नजरबंद
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म्यामांर में तख्तापलट के बाद सत्ता पर कब्जा करने के एक दिन बाद मंगलवार को सेना ने सैकड़ों संसद सदस्यों को उनके सरकारी आवास में नजरबंद कर दिया और उसके बाहर सैनिक तैनात कर दिए गए।
लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू की सहित वरिष्ठ नेताओं को सोमवार को ही हिरासत में ले लिया गया था। नजरबंद किए गए एक सांसद ने कहा कि उन्होंने और 400 अन्य सांसदों ने रात जाग कर काटी। सांसद ने कहा कि हमें सतर्क और जागते रहना पड़ा। उस परिसर के अंदर पुलिस और बाहर सैनिक थे, जहां सू ची की पार्टी के सदस्यों और अन्य छोटे दलों के नेताओं को रखा गया है।
गौरतलब है कि म्यामांर में सेना ने सोमवार को तख्तापलट कर दिया और शीर्ष नेता आंग सान सू की समेत उनकी पार्टी के कई शीर्ष नेताओं को हिरासत में ले लिया। सेना के स्वामित्व वाले ‘मयावाडी टीवी’ ने सोमवार सुबह घोषणा की कि सेना ने एक साल के लिए देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है।
सेना ने कहा, आपातकाल के बाद होंगे चुनाव
उधर, म्यांमार की सेना ने कहा कि देश में एक साल का आपातकाल खत्म होने के बाद चुनाव होंगे। इस दौरान चुनाव आयोग में सुधार किया जाएगा और पिछले साल नवंबर में होने वाले चुनावों की समीक्षा भी की जाएगी। सेना ने दोहराया कि 8 नवंबर, 2020 को चुनावों में बड़े पैमाने पर मतदान के दौरान धोखाधड़ी हुई थी। बता दें कि इस चुनाव में नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी ने 83 फीसदी सीटें जीत ली थीं। सेना और सरकार के बीच तभी से तनाव था जिसकी परिणति तख्तापलट के साथ हुई है।
सेना ने दी थी संविधान खत्म करने की चेतावनी
संसद के नए सत्र से पहले सेना ने चेतावनी दी थी कि चुनाव में वोट के फर्जीवाड़े की शिकायत पर यदि कार्रवाई नहीं हुई तो सेना कदम उठाएगी। इस हफ्ते सैन्य प्रवक्ता द्वारा तख्तापलट की संभावनाओं को खारिज करने से इनकार करने के बाद से ही देश में सियासी तनाव बढ़ गया था। वहीं, कमांडर इन चीफ ने यहां तक कह दिया कि यदि संविधान का पालन नहीं किया गया तो उसे वापस ले लिया जाएगा।
लंबे समय नजरबंद रहीं सू की
म्यांमार में 2011 तक सेना का शासन रहा है। आंग सान सू की ने कई साल तक देश में लोकतंत्र लाने के लिए लड़ाई लड़ी। इस दौरान उन्हें लंबे समय तक घर में नजरबंद रहना पड़ा। लोकतंत्र आने के बाद संसद में सेना के प्रतिनिधियों के लिए तय कोटा रखा गया। संविधान में ऐसा प्रावधान किया गया कि सू की कभी राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ सकतीं।