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रूस पर लगाए प्रतिबंधों के साथ-साथ ‘वार्ता और कूटनीति’ को कैसे अहमियत देंगे बाइडन?
Fri, 16 Apr 2021 02:59 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 16 Apr 2021 02:59 PM IST
सार
रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने रूस पर लगाए गए नए प्रतिबंधों का स्वागत किया है। लेकिन उन्होंने इसके लिए बाइडन प्रशासन की कड़ी आलोचना की है कि उसने प्रतिबंधों के तहत नॉर्ड स्ट्रीम-2 पाइपलाइन का मसला शामिल नहीं किया...
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व्लादिमीर पुतिन के साथ जो बाइडन
- फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
रूस पर नए सख्त प्रतिबंध लगा कर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने ये साफ कर दिया है कि उनकी विदेश नीति में प्रतिबंध और दूसरे आक्रामक तरीके अहम बने रहेंगे। लेकिन यहां विश्लेषकों ने इस पर हैरत जताई है कि ऐसे सख्त रुख के बावजूद बाइडन रूस या चीन के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने के संदेश भी दे रहे हैं। जबकि उनके कदमों पर दूसरे पक्ष की कड़ी प्रतिक्रिया लाजिमी है।
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गुरुवार को रूसी अधिकारियों पर पाबंदियों के एलान के कुछ ही घंटों बाद बाइडन ने रूस के साथ ‘वार्ता और कूटनीतिक प्रक्रिया’ का आह्वान किया। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने बताया कि हाल में रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने प्रतिबंधों की चेतावनी दे दी थी। लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने इसी साल पुतिन के साथ शिखर बैठक का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रूस अमेरिका के साथ ‘रणनीतिक वार्ता’ शुरू करेगा, जिससे ईरान, जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 महामारी जैसे मामलों में सहयोग के एजेंडे को आगे बढ़ाया जा सके।
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गौरतलब है कि नए प्रतिबंध हाल में अमेरिकी सरकारी विभागों और कंपनियों के डाटा की हुई हैकिंग में रूस के कथित हाथ और अमेरिकी चुनाव में रूस के कथित दखल के मामलों में लगाए गए हैं। बाइडन प्रशासन का आरोप है कि 2016 की तरह ही पिछले राष्ट्रपति चुनाव में भी रूस ने डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। रूस ने इन दोनों आरोपों का खंडन किया है। नए अमेरिकी प्रतिबंधों की घोषणा के कुछ देर बाद रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने जो कार्रवाई की है, उसका उसी अनुपात में जवाब दिया जाएगा। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने कहा कि मास्को स्थित अमेरिकी राजदूत को ‘सख्त बातचीत’ के लिए बुलाया गया है। जाखारोवा ने कहा- ‘ये मुलाकात मुधर नहीं होगी।’
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अमेरिका ने 30 रूसी व्यक्तियों और संगठनों पर प्रतिबंध लगाए हैं। ये लोग अमेरिकी वित्तीय संस्थाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। विश्लेषकों ने कहा है कि बाइडन प्रशासन का ताजा एलान वर्षों बाद रूस के खिलाफ उठाया गया कोई सख्त कदम है। पूर्व राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कई बार रूस के खिलाफ कड़े बयान दिए थे, लेकिन उनके प्रशासन ने कोई कड़ा कदम नहीं उठाया। अमेरिका के भीतर लंबे समय से ये शिकायत रही है कि रूसी संगठन अमेरिका में हैकिंग में लगे हैं। लेकिन जानकारों का कहना है कि गुरुवार को उठाए गए कदम कितने प्रभावी होंगे, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने रूस पर लगाए गए नए प्रतिबंधों का स्वागत किया है। लेकिन उन्होंने इसके लिए बाइडन प्रशासन की कड़ी आलोचना की है कि उसने प्रतिबंधों के तहत नॉर्ड स्ट्रीम-2 पाइपलाइन का मसला शामिल नहीं किया। ये पाइपलाइन रूस से जर्मनी तक बिछाई जा रही है। अगर इस मामले से जुड़े पक्षों पर पाबंदियां लगाई जाती हैं, तो उससे जर्मनी भी प्रभावित होगा। प्रतिबंधों की घोषणा के बाद रिपब्लिकन सीनेटर जिम रिश ने कहा- नॉर्ड स्ट्रीम-2 के मामले में पाबंदी ना लगा कर बाइडन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले में कदम पीछे खींच रहा है।
हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रिपब्लिकन सदस्य माइकल मैकॉल ने कहा- अगर बाइडन प्रशासन पुतिन सरकार को कीमत चुकाने के लिए मजबूर करने के लिए सचमुच गंभीर है, तो उसे सुनिश्चित करना चाहिए कि नॉर्ड स्ट्रीम-2 प्रोजेक्ट कभी पूरा ना हो। गौरतलब है कि नए अमेरिकी प्रतिबंधों का यूरोपियन यूनियन, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने समर्थन किया है और अपने यहां भी इसे लागू करने की घोषणा की है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर नॉर्ड स्ट्रीम-2 के मामले में प्रतिबंध लगाए गए, तो उससे अमेरिका का यह गठजोड़ टूट सकता है, क्योंकि यूरोपियन यूनियन शायद उस पर सहमत ना हो।
विश्लेषकों की राय है कि बाइडन के ताजा कदमों के साथ ये साफ हो गया है कि विदेशी मामलों में उनके दौर में अमेरिकी नीति में कोई खास बदलाव नहीं होगा। अमेरिका प्रतिबंध लगाने या एकतरफा बमबारी करने की नीति पर चलता रहेगा। गौरतलब है कि बीती फरवरी में अमेरिका ने सीरिया में बमबारी की थी। इस नीति से बाइडन की बातचीत करने या कूटनीति को अहमियत देने की लगातार जताई जाने वाली इच्छा पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसलिए कि दूसरे पक्ष संभवतया अमेरिका के आक्रामक रुख का जवाब देंगे और उससे माहौल और तनावपूर्ण होगा।