पाक सरकार से सहमति के बाद लाल मस्जिद से हटेगा मौलाना, भूमि आवंटन पर हुआ समझौता
- सील इमारत में प्रवेश कर गई महिला छात्राओं को छोड़ना शुरू
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पाकिस्तान की सरकारी संपत्ति लाल मस्जिद पर कब्जा जमाए बैठे मौलाना अब्दुल अजीज ने तीन दिन की लंबी वार्ता के बाद इसे खाली करने पर सहमति जताई है। डॉन न्यूज के मुताबिक यह सहमति जामिया हफसा की स्थापना के लिए 20 कनाल (2.5 एकड़) भूमि आवंटित करने के समझौते के बाद जताई गई है। मौलाना के मंगलवार तक यह परिसर खाली करने की उम्मीद है।
सहमति के बाद इस्लामाबाद के एच-11 स्थित जामिया हफसा मदरसा में प्रवेश करने वाली 100 महिला छात्राओं को भी मस्जिद से छोड़ना शुरू कर दिया है। ये छात्राएं बृहस्पतिवार को एच-11 स्थित शाखा की सील इमारत में प्रवेश कर गई थीं। मदरसे के आसपास से पुलिस बल भी हटाया जा चुका है। वार्ता के दौरान मौलाना ने दावा किया कि पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के खिलाफ उन्होंने आंदोलन इसलिए शुरू किया था क्योंकि राजधानी में मस्जिदों को ध्वस्त किया जा रहा था और ऐसी ही घटनाएं दोबारा शुरू हो गई हैं।
अधिकारियों सुप्रीम कोर्ट के आलोक में उनकी मांगों के निराकरण का आश्वासन दिया है। बता दें कि अजीज को 2004 में अदालती आदेशों के बाद लाल मस्जिद के प्रमुख पद से इसलिए हटा दिया गया था क्योंकि उसने वजीरिस्तान में आतंकियों के विरुद्ध चल रहे ऑपरेशन में पाक सेना के खिलाफ फतवा जारी किया था।
पाकिस्तान में आयोजित होगा अफगान शरणार्थियों पर सम्मेलन
पाकिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर 17 फरवरी को अफगान शरणार्थियों पर दो दिनी विश्व सम्मेलन होने जा रहा है। इसमें 20 देशों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी अफगान शरणार्थियों की चुनौतियों की पहचान करेंगे। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के मुताबिक अफगानिस्तान के लिए शरणार्थियों की स्वैच्छिक, गरिमापूर्ण और स्थायी प्रत्यावर्तन के समाधान पर चर्चा होगी।
इस शरणार्थी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त फिलिपो ग्रैंडे, मंत्रियों और लगभग 20 देशों के अफगान शरणार्थियों का समर्थन कर रहे वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। पाकिस्तान को भरोसा है कि सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को और मजबूत करेगा, क्योंकि शरणार्थियों और संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक परिदृश्य में शरणार्थी फोरम अफगान शरणार्थियों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने के लिए सहमत हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक दुनियाभर में करोड़ों की संख्या में लोग जबरन विस्थापित होते हैं, जिससे ये एक विश्व संकट बन चुका है। इसकी चुनौतियों को दूर करना जरूरी है।