हुवावे कंपनी की मुख्य वित्तीय अधिकारी की रिहाई: अचानक चीन के प्रति इतना नरम कैसे हो गया अमेरिका?
हुवावे कंपनी की मुख्य वित्तीय अधिकारी मेंग वानझाऊ की नजरबंदी डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति काल में हुई थी। तब अमेरिका ने उन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। इसमें कहा गया था कि मेंग ने हुवावे कंपनी के स्काईकॉम नाम की एक कंपनी से रिश्ते के स्वरूप के बारे में एचएसबीसी बैंक को गुमराह किया। लेकिन मेंग ने इस मामले में खुद को निर्दोष बताया है...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिका और चीन के बीच अंदरखाने बनी सहमति के तहत हुवावे कंपनी की मुख्य वित्तीय अधिकारी मेंग वानझाऊ की रिहाई हो गई है। मेंग की नजरबंदी के बदले में चीन ने कनाडा के जिन दो नागरिकों को पकड़ रखा था, उन्हें भी छोड़ दिया गया है। लेकिन चीन के प्रति अमेरिकी रुख में अचानक ये नरमी क्यों आई, अब यह यहां कयास का विषय बन गया है। टीवी चैनल अल-अजीरा की खबर के मुताबिक चीन से ये करार कर अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन प्रशासन ने अपने आलोचकों को यह कहने का मौका दे दिया है कि वे चीन के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं।
बीबीसी की एक खबर के मुताबिक मेंग के मामले में कई महीनों से अमेरिका और चीन के बीच परदे के पीछे संपर्क बना हुआ था। इस दौरान मेंग की रिहाई सुनिश्चित कराने के लिए हुवावे कंपनी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को वाशिंगटन भेजा। मेंग हुवावे कंपनी के मालिक रेन जेंगफेई की बेटी हैं। बताया जाता है कि रेन ने अपनी बेटी को रिहा करवाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकी हुई थी। इसमें चीन सरकार का पूरा साथ भी उन्हें मिला। मेंग की रिहाई होने के बाद चीन ने कनाडा के नागरिकों माइकल कोवरिग और माइकल स्पेवॉर को रिहा कर दिया।
चीन के टेक्नोलॉजी विश्लेषक रुई मा ने बीबीसी से कहा कि चीन की कई कंपनियां भी ये विवाद सुलझाना चाहती थीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब अमेरिका और चीन के संबंधों में तनाव के ऐसे पहलू नहीं आएंगे। लेकिन रुई ने कहा- ‘कोई ऐसा मान कर नहीं चल रहा है कि एक बार फिर से तनाव पैदा नहीं होगा।’ 2018 में मेंग को कनाडा में नजरबंद करने के बाद अमेरिका और चीन के बीच तनाव में भारी इजाफा हुआ। मेंग को अमेरिका की प्रत्यर्पण अर्जी के आधार पर कनाडा में नजरबंद किया गया था। अमेरिका ने अब प्रत्यर्पण अर्जी वापस ले ली है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे अमेरिका और चीन के बीच तनाव घटने की शुरुआत हो सकती है।
मेंग की नजरबंदी डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति काल में हुई थी। तब अमेरिका ने उन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। इसमें कहा गया था कि मेंग ने हुवावे कंपनी के स्काईकॉम नाम की एक कंपनी से रिश्ते के स्वरूप के बारे में एचएसबीसी बैंक को गुमराह किया। लेकिन मेंग ने इस मामले में खुद को निर्दोष बताया है। बताया जाता है कि मेंग की रिहाई के बावजूद उन पर और हुवावे कंपनी पर अमेरिका में मुकदमा जारी रहेगा। लेकिन अभी उस पर सुनवाई स्थगित कर दी गई है। बताया गया है कि सुनवाई दिसंबर 2022 तक स्थगित रहेगी।
कनाडा में अपनी रिहाई के बाद मेंग ने कहा- ‘मेरी जिंदगी बिल्कुल उलट-पुलट गई है। यह मेरे जीवन में बड़ी रुकावट का समय रहा। लेकिन हर बादल के साथ एक बिजली की चमक रहती है।’
चीन में इस समझौते का स्वागत किया गया है। चीनी सूत्रों ने कहा है कि मेंग निर्दोष हैं, जिन्हें अमेरिका ने चीन के खिलाफ चलाई गई अपनी मुहिम के तहत निशाना बनाया। लेकिन पर्यवेक्षकों के बीच ये रहस्य कायम है कि बढ़ते तनाव के बीच अचानक अमेरिका और चीन के बीच ये समझौता कैसे और क्यों हो गया?