अफगानिस्तान: हमें जंग खत्म करने या तनाव बढ़ाने में से एक रास्ता चुनना था, ब्लिकंन ने कहा- बाइडन का फैसला सही
अफगानिस्तान से सेना वापसी के फैसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन देश में घिरे गए हैं। मंगलवार को इस पर अमेरिकी संसद में चर्चा हुई। इसमें विदेश मंत्री ब्लिंकन ने बाइडन के पक्ष में जमकर दलीलें पेश की और निर्णय को सही ठहराया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के फैसले का अमेरिकी संसद में विदेश मंत्री जो बाइडन ने जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बाइडन के पास दो ही विकल्प थे, एक तो यह कि वे जंग खत्म करें या दूसरा यह कि इसे तेज करें। 9/11 हमले के बाद अफगानिस्तान में जनवरी 2021 में हमारी बहुत कम सेना रह गई थी और तालिबान ने 2001 के बाद की सबसे मजबूत सैन्य स्थिति कायम कर ली थी। इसलिए उन्होंने जंग खत्म करने का फैसला किया।
By Jan 2021, Taliban was in its strongest military position since 9/11 and we had the smallest number of US forces in Afghanistan since 2001. President Biden faced a choice to end the war or escalating it: US Secretary of State Antony Blinken in US Congress on Afghanistan (1/3) pic.twitter.com/f6xKPFfOGU
— ANI (@ANI) September 14, 2021विज्ञापन
ब्लिंकन ने ये बातें अमेरिकी संसद में अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा के दौरान कहीं। ब्लिंकन ने कहा कि यदि बाइडन अपने पूर्ववर्ती के वादे को पूरा नहीं करते तो हमारी सेनाओं व हमारे सहयोगियों पर हमले शुरू हो जाते और तालिबान अफगानिस्तान के बड़े शहरों में हमले तेज कर देता।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसे हालात में हमें वहां और बड़ी संख्या में अमेरिकी सेना भेजना पड़ती ताकि हम अपना बचाव और हताहतों की संख्या कम कर सकें तथा तालिबान को सत्ता पर काबिज होने से रोक सकें। लेकिन इसके साथ ही एक गतिरोध बहाल होने अनिश्चित काल तक अफगानिस्तान में फंसे रहने की आशंका भी बढ़ जाती।
20 वर्षों के दौरान पाकिस्तानी भूमिका की समीक्षा करेंगे: ब्लिंकन
अमेरिका ने तालिबान को अफगानिस्तान में कब्जा करने में मदद पर पाकिस्तान को फटकार लगाई है। विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अमेरिकी सांसदों से कहा है कि अमेरिका देखेगा कि बीते बीस वर्षों में पाक की क्या भूमिका रही। दरअसल सांसदों ने 9/11 हमले के बाद अफगानिस्तान में पाक की ‘दोहरी नीति’ वाली भूमिका पर नाराजगी जताई और मांग की कि वाशिंगटन इस्लामाबाद से रिश्तों पर पुन: विचार करे।
अमेरिकी सांसदों ने बाइडन प्रशासन से अनुरोध किया कि वह पाकिस्तान के मुख्य गैर नाटो सहयोगी के दर्जे के बारे पर भी फिर से विचार करे। ब्लिंकन को नाराज सांसदों का सामना करना पड़ा। सांसदों ने अफगान सरकार के त्वरित पतन और अमेरिकियों की अफगानिस्तान से निकासी को लेकर विदेश मंत्रालय पर सवाल उठाए।
टेक्सास से डेमोक्रेट सांसद जोकिन कास्त्रो ने ब्लिंकन से कहा, तालिबान को पाक द्वारा लंबे समय से समर्थन देने और वर्षों से समूह के नेताओं को शरण देने के बाद, अब यह समय अमेरिका के लिए पाकिस्तानी रिश्तों के पुनर्मूल्यांकन और इस्लामाबाद के एक मुख्य गैर-नाटो सहयोगी के दर्जे पर पुन: विचार करने का है। इस पर ब्लिंकन ने कहा, इसे हम आने वाले दिनों में देखेंगे कि पाकिस्तान ने पिछले 20 वर्षों में क्या भूमिका निभाई है और आने वाले वर्षों में जिस भूमिका में हम उसे देखना चाहते हैं।
गनी के देश छोड़ने से अवगत नहीं थे
अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से सवाल किया, क्या उन्हें पता था कि अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़ने की योजना बना रहे हैं। इस पर ब्लिंकन ने कहा कि उन्होंने 14 अगस्त की रात को गनी से फोन पर बात की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि वह अंत तक लड़ेंगे। विदेश मंत्री ने कहा कि वह अफगानिस्तान छोड़ने की गनी की योजना से अवगत नहीं थे।
तालिबान व हक्कानी नेटवर्क को पाक मदद
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने माना कि पाकिस्तान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के आतंकियों को पाल रहा है। उन्होंने कहा, पाक को अफगानिस्तान के बारे में वैश्विक समुदाय की नीतियों के हिसाब से चलना चाहिए। जब उनसे अफगानिस्तान में पाकिस्तानी भूमिका पर सवाल पूछे तो ब्लिंकन ने कहा, पाक के अफगानिस्तान में बहुत सारे हित हैं जिसमें से कुछ से सीधे अमेरिकी हितों का साफ टकराव होता है।
पंजशीर में भी की पाक ने तालिबान की मदद
पाकिस्तान पर आरोप है कि उसने पंजशीर को जीतने में तालिबान की मदद की। पाकिस्तान इन आरोपों का खंडन करता है। पाकिस्तान उन दो देशों में शामिल है जिनका तालिबान पर सबसे ज्यादा प्रभाव है। इसके अलावा दूसरा देश कतर है। पाकिस्तान के गृहमंत्री ने खुद माना है कि उनके यहां तालिबानी आतंकी और उनके परिवार रहते हैं। अमेरिका ने जब वर्ष 2001 में हमला किया तो ये आतंकी पाकिस्तान में छिप गए थे। ओसामा बिन लादेन को भी पाकिस्तान के ऐबटाबाद में मारा गया था। तालिबान की अंतरिम सरकार में गृहमंत्री बना सिराजुद्दीन हक्कानी आईएसआई का पाला हुआ है।