फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Afghanistan: We had to choose a path between ending the war or increasing tension, Blinken said - Bidens decision was right

अफगानिस्तान: हमें जंग खत्म करने या तनाव बढ़ाने में से एक रास्ता चुनना था, ब्लिकंन ने कहा- बाइडन का फैसला सही

Tue, 14 Sep 2021 10:57 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 14 Sep 2021 10:57 PM IST
सार

अफगानिस्तान से सेना वापसी के फैसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन देश में घिरे गए हैं। मंगलवार को इस पर अमेरिकी संसद में चर्चा हुई। इसमें विदेश मंत्री ब्लिंकन ने बाइडन के पक्ष में जमकर दलीलें पेश की और निर्णय को सही ठहराया।

विज्ञापन
Afghanistan: We had to choose a path between ending the war or increasing tension, Blinken said - Bidens decision was right
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन - फोटो : ANI

विस्तार

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के फैसले का अमेरिकी संसद में विदेश मंत्री जो बाइडन ने जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बाइडन के पास दो ही विकल्प थे, एक तो यह कि वे जंग खत्म करें या दूसरा यह कि इसे तेज करें। 9/11 हमले के बाद अफगानिस्तान में जनवरी 2021 में हमारी बहुत कम सेना रह गई थी और तालिबान ने 2001 के बाद की सबसे मजबूत सैन्य स्थिति कायम कर ली थी। इसलिए उन्होंने जंग खत्म करने का फैसला किया। 

विज्ञापन

 


ब्लिंकन ने ये बातें अमेरिकी संसद में अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा के दौरान कहीं। ब्लिंकन ने कहा कि यदि बाइडन अपने पूर्ववर्ती के वादे को पूरा नहीं करते तो हमारी सेनाओं व हमारे सहयोगियों पर हमले शुरू हो जाते और तालिबान अफगानिस्तान के बड़े शहरों में हमले तेज कर देता। 

विज्ञापन
विज्ञापन


अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसे हालात में हमें वहां और बड़ी संख्या में अमेरिकी सेना भेजना पड़ती ताकि हम अपना बचाव और हताहतों की संख्या कम कर सकें तथा तालिबान को सत्ता पर काबिज होने से रोक सकें। लेकिन इसके साथ ही एक गतिरोध बहाल होने अनिश्चित काल तक अफगानिस्तान में फंसे रहने की आशंका भी बढ़ जाती। 

20 वर्षों के दौरान पाकिस्तानी भूमिका की समीक्षा करेंगे: ब्लिंकन

अमेरिका ने तालिबान को अफगानिस्तान में कब्जा करने में मदद पर पाकिस्तान को फटकार लगाई है। विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अमेरिकी सांसदों से कहा है कि अमेरिका देखेगा कि बीते बीस वर्षों में पाक की क्या भूमिका रही। दरअसल सांसदों ने 9/11 हमले के बाद अफगानिस्तान में पाक की ‘दोहरी नीति’ वाली भूमिका पर नाराजगी जताई और मांग की कि वाशिंगटन इस्लामाबाद से रिश्तों पर पुन: विचार करे।

अमेरिकी सांसदों ने बाइडन प्रशासन से अनुरोध किया कि वह पाकिस्तान के मुख्य गैर नाटो सहयोगी के दर्जे के बारे पर भी फिर से विचार करे। ब्लिंकन को नाराज सांसदों का सामना करना पड़ा। सांसदों ने अफगान सरकार के त्वरित पतन और अमेरिकियों की अफगानिस्तान से निकासी को लेकर विदेश मंत्रालय पर सवाल उठाए।

टेक्सास से डेमोक्रेट सांसद जोकिन कास्त्रो ने ब्लिंकन से कहा, तालिबान को पाक द्वारा लंबे समय से समर्थन देने और वर्षों से समूह के नेताओं को शरण देने के बाद, अब यह समय अमेरिका के लिए पाकिस्तानी रिश्तों के पुनर्मूल्यांकन और इस्लामाबाद के एक मुख्य गैर-नाटो सहयोगी के दर्जे पर पुन: विचार करने का है। इस पर ब्लिंकन ने कहा, इसे हम आने वाले दिनों में देखेंगे कि पाकिस्तान ने पिछले 20 वर्षों में क्या भूमिका निभाई है और आने वाले वर्षों में जिस भूमिका में हम उसे देखना चाहते हैं। 

गनी के देश छोड़ने से अवगत नहीं थे

अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से सवाल किया, क्या उन्हें पता था कि अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़ने की योजना बना रहे हैं। इस पर ब्लिंकन ने कहा कि उन्होंने 14 अगस्त की रात को गनी से फोन पर बात की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि वह अंत तक लड़ेंगे। विदेश मंत्री ने कहा कि वह अफगानिस्तान छोड़ने की गनी की योजना से अवगत नहीं थे।

तालिबान व हक्कानी नेटवर्क को पाक मदद
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने माना कि पाकिस्तान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के आतंकियों को पाल रहा है। उन्होंने कहा, पाक को अफगानिस्तान के बारे में वैश्विक समुदाय की नीतियों के हिसाब से चलना चाहिए। जब उनसे अफगानिस्तान में पाकिस्तानी भूमिका पर सवाल पूछे तो ब्लिंकन ने कहा, पाक के अफगानिस्तान में बहुत सारे हित हैं जिसमें से कुछ से सीधे अमेरिकी हितों का साफ टकराव होता है।

पंजशीर में भी की पाक ने तालिबान की मदद

पाकिस्तान पर आरोप है कि उसने पंजशीर को जीतने में तालिबान की मदद की। पाकिस्तान इन आरोपों का खंडन करता है। पाकिस्तान उन दो देशों में शामिल है जिनका तालिबान पर सबसे ज्यादा प्रभाव है। इसके अलावा दूसरा देश कतर है। पाकिस्तान के गृहमंत्री ने खुद माना है कि उनके यहां तालिबानी आतंकी और उनके परिवार रहते हैं। अमेरिका ने जब वर्ष 2001 में हमला किया तो ये आतंकी पाकिस्तान में छिप गए थे। ओसामा बिन लादेन को भी पाकिस्तान के ऐबटाबाद में मारा गया था। तालिबान की अंतरिम सरकार में गृहमंत्री बना सिराजुद्दीन हक्कानी आईएसआई का पाला हुआ है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed