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अफगानिस्तान: जहां 'दुश्मनों' से ज्यादा 'रक्षकों' ने लोगों को मारा

Fri, 13 Sep 2019 09:03 PM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 13 Sep 2019 09:03 PM IST
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अफगानिस्तान पर हवाई हमला (फाइल) - फोटो : social media
अफगानिस्तान में तालिबान और सरकार के बीच दशकों से चल रहे संघर्ष की कीमत वहां के आम नागरिकों को चुकानी पड़ रही है। अफगान सेना और नाटो सेना की कार्रवाई में अब तक आतंकवादियों से ज्यादा अफगानिस्तानी नागरिकों की मौत हुई है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। जिसके आकड़े चौंकाने वाले हैं। हालांकि अब अमेरिका तालिबान से शांति समझौता करने की पहल कर रहा है।
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अब तक कितने मारे गए?

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने मंगलवार को रिपोर्ट जारी की जिसके मुताबिक साल 2019 के शुरुआती छह महीनों में अफगान सेना द्वारा 403 और नाटो के हाथों 314 नागरिक मारे गए, कुल मिलाकर 717 अफगान नागरिक मारे गए। जबकि इस दौरान तालिबान और अन्य आतंकियों ने 531 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। 
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दोनों मौतों में फर्क क्या है?

आतंकियों द्वारा मारे गए 300 लोग सीधे निशाना बनाए गए थे। जबकि सेना के अभियान के दौरान मारे गए लोग की मौत "ऐसी क्षति थी जिसे टाला नहीं जा सकता था।"

शांति कायम कब होगी?

भले ही अमेरिका अफगानिस्तान में तालिबान के साथ शांति समझौते पर बातचीत कर रहा है, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 1267 समिति का कहना है कि अल कायदा अफगानिस्तान में तालिबान के साथ बहुत नजदीक से सहयोग कर रहा है।
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यूएनएससी आतंकवाद विरोधी समिति की विश्लेषणात्मक सहायता और प्रतिबंध निगरानी टीम की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, "अल-कायदा अफगानिस्तान को अपने नेतृत्व के लिए एक हमेशा से सुरक्षित ठिकाना मानता है, और तालिबान नेतृत्व के साथ अपने दीर्घकालिक और मजबूत संबंधों पर भरोसा करता है।"

इस बीच अमेरिका अफगानिस्तान से अपनी सेना को वापस बुलाने के लिए भी प्रतिबद्ध है। इसे लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने सोमवार को आधिकारिक रूप से कहा, "अफगानिस्तान में युद्ध से कोई हल नहीं निकलने वाला। हम आशा करते हैं कि आने वाले दिनों में तालिबान को बातचीत के लिए तैयार करने में सफल रहेंगे।" 


बता दें कि अमरिका ने 2014 में आधिकारिक रूप से अपने अफगानिस्तान मिशन को रोक दिया था लेकिन स्थानीय लड़ाकों को अब भी सहयोग दे रही है।

पिछले हफ्ते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात के दौरान अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, "अगर मैं उस लड़ाई को जीतना चाहता तो पृथ्वी से अफगानिस्तान का नामोनिशान मिट जाएगा। यह सिर्फ 10 दिनों में खत्म हो जाएगी, (लेकिन) मैं उन एक करोड़ लोगों को नहीं मारना चाहता।
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