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रिपोर्ट में दावा: तालिबानी सरकार का 9/11 हमले की 20वीं बरसी के दिन हो सकता है शपथ ग्रहण

Thu, 09 Sep 2021 09:48 PM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल/वॉशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल/वॉशिंगटन। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 09 Sep 2021 09:48 PM IST
सार

एक ओर जहां अमेरिका ने कहा है कि वह तालिबान की सरकार को मान्यता देने में जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहता है। वहीं दूसरी ओर खबरें आ रही हैं कि तालिबान अपनी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह जरिए यूएस के घाव कुरेदने की कोशिश कर सकता है।

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Afghanistan : Taliban Govt likely to hold oath taking ceremony on September 11, says Report
तालिबान नेता - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अफगानिस्तान पर कब्जा जमाने के बाद तालिबान अपनी अंतरिम सरकार का एलान कर चुका है। यही नहीं उसने प्रधानमंत्री से लेकर तमाम मंत्रियों के नाम भी दुनिया के सामने रख दिए हैं। परंतु सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस सरकार का शपथ ग्रहण समारोह कब होगा। इस संबंध में आ रही मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह शपथ ग्रहण अमेरिका के जख्म कुरेदने वाला हो सकता है। जी हां, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तालिबान अपनी अंतरिम सरकार के मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह अमेरिका पर हुए 9/11 हमले की 20वीं बरसी यानी आने वाली तारीख 11 सितंबर को आयोजित कर सकता है।

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रिपोर्टों के अनुसार, तालिबान की अंतरिम सरकार ने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए चीन, तुर्की, पाकिस्तान, ईरान, कतर, भारत और अमेरिका सहित विभिन्न देशों को निमंत्रण दिया है। तालिबान ने अपने अंतरिम सरकार के मंत्रियों के नामों की घोषणा की है, इस बात पर जोर दिया कि अफगानिस्तान में यह सरकार कार्यवाहक व्यवस्था के तहत बनाई जा रही है। तालिबान अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मांग कर रहा है। उसने दूसरे देशों से अपने दूतावास फिर से खोलने के लिए भी कहा है।
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तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि हम मानते हैं कि निवेश के लिए शांति और स्थिरता जरूरी है। हम चीन सहित सभी पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। मुजाहिद ने कहा कि युद्ध खत्म हो गया है, अब देश संकट से बाहर निकल रहा है। यह अब शांति और पुनर्निर्माण का समय है। हमें लोगों के समर्थन की जरूरत है। अफगानिस्तान को मान्यता मिलने का अधिकार है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को काबुल में अपने दूतावास खोलने चाहिए।
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आतंकवादियों को बनाया मंत्री
अफगानिस्तान में 33 मंत्रियों की बनाई गई आतंकी सरकार में आठ मंत्री ऐसे हैं जो पाकिस्तानी मदरसे जामिया हककानिया सेमिनरी के छात्र रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इसमें हक्कानी नेटवर्क के मुखिया और तालिबानी सरकार में नियुक्त किए गए गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी से लेकर तालिबानी सरकार के उप प्रधानमंत्री बनाए गए अब्दुल गनी बरादर समेत रहबरी शूरा काउंसिल से जुड़े कई सदस्य और छह अन्य मंत्री पाकिस्तान के इस मदरसे के स्टूडेंट रहे हैं।

इसके अलावा तालिबान सरकार में बनाए गए प्रधानमंत्री और कट्टरपंथी संगठन रहबरी शूरा के मुखिया मुल्ला अखुंद, उप प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर, दूसरे उप प्रधानमंत्री अब्दुल सलाम हनफी, गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी को खतरनाक आतंकी घोषित किया जा चुका है। तालिबान के प्रधानमंत्री उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री समेत विदेश मंत्री को प्रतिबंधित सूची में भी डाला जा चुका है। जबकि तालिबान के नियुक्त किए गए गृहमंत्री हक्कानी पर तो अमेरिका ने पचास लाख डॉलर का इनाम भी घोषित किया है।

बीस साल पहले अमेरिका पर हुआ था सबसे बड़ा हमला
बता दें कि 20 साल पहले वर्ष 2001 में अलकायदा के आतंकवादियों ने अमेरिका पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया था। इसमें विमानों को हाईजैक करके आतंकवादियों ने वर्ल्ड ट्रेड सेंडर के ट्विन टावर और पेंटागन मुख्यालय से टकरा दिया था। इन हमलों में करीब तीन हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे। यही वो हमला था जिसके बाद बदला लेने के लिए अमेरिका ने अपने सैनिकों के साथ अफगानिस्तान में कदम रखा था।

तालिबान सत्ता से हटा, अलकायदा आदि के आतंकी ठिकानों पर बमबारी की गई। एक तरह से दो दशक तक युद्ध जैसे हालात से बने रहे। अरबों डॉलर खर्च करने और हजारों सैनिकों की कुर्बानी के बाद भी अंत में अमेरिका को अपनी सेनाएं वापस बुलानी पड़ीं। खास बात तो यह है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी से पहले ही तालिबान ने काबुल सहित पूरे देश पर कब्जा जमा लिया था।

तालिबान को मान्यता देने की जल्दबाजी में नहीं अमेरिका: व्हाइट हाउस
अमेरिका अफगानिस्तान में गठित अंतरिम सरकार को मान्यता देने की हड़बड़ी में नहीं है और वह वहां से अपने नागरिकों को निकालने के लिए तालिबान से बातचीत कर रहा है। यह जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने दी है।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने पत्रकारों को बताया, मौजूदा सरकार में न तो राष्ट्रपति और न ही राष्ट्रीय सुरक्षा टीम में से कोई यह कहेगा कि तालिबान वैश्विक समुदाय का सम्मानित और महत्वपूर्ण सदस्य है।

उसने किसी भी तरह से कोई सम्मान अर्जित नहीं किया है और हमें भी कभी ऐसा नहीं लगा है। उन्होंने कहा, अफगान में यह कार्यवाहक मंत्रिमंडल है, जिसमें चार पूर्व कैदी तालिबान लड़ाके भी शामिल हैं।

दुनिया सब देख रही है: साकी

साकी के मुताबिक, हमने यह नहीं कहा कि हम इस सरकार को मान्यता देंगे। न ही हमें मान्यता देने की जल्दबाजी है। लेकिन हम अमेरिकी नागरिकों, वैध स्थायी निवासियों और एसआईवी आवेदकों को अफगानिस्तान से बाहर निकालने के लिए तालिबान से बात कर रहे हैं क्योंकि फिलहाल वहां उसका ही नियंत्रण है।

साकी ने कहा, तालिबान सरकार का आंतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी हक्कानी नेटवर्क का आतंकवादी है, जो एक बम विस्फोट मामले में वांछित अपराधी है, जिसमें एक अमेरिकी समेत छह लोग मारे गए थे। वह अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ सीमा पार होने हमलों में भी शामिल रहा। 

उसके सिर पर एक करोड़ डॉलर का इनाम है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि हम तालिबान से बातचीत क्यों कर रहे हैं। लेकिन क्या हमें अफगानिस्तान में बचे हुए अमेरिकियों को बाहर निकालने के लिए उन लोगों से बात नहीं करनी चाहिए।

प्रेस सचिव ने दोहराया, यह सब अमेरिका समेत वैश्विक समुदाय देख रहा है कि तालिबान बाहर जाने के इच्छुक लोगों को निकलने दे रहा है या नहीं। वह महिलाओं के साथ कैसे पेश आ रहा है। वह कैसा बर्ताव और काम कर रहा है। लिहाजा, अमेरिका उसे कोई मान्यता देने नहीं जा रहा है।

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