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अफगानिस्तान में तबाही: तालिबान ने किया कंधार पर कब्जा, काबुल के बेहद करीब पहुंचा

Fri, 13 Aug 2021 06:53 AM IST
Amit Mandal एजेंसी, काबुल। 
एजेंसी, काबुल।  Published by: Amit Mandal Updated Fri, 13 Aug 2021 06:53 AM IST
सार

  • लश्करगाह के पुलिस मुख्यालय तालिबान के हाथों में, कब्जे वाले इलाकों में लहराए झंडे
  • अफगानिस्तान के छह शहरों में 1,000 से ज्यादा अपराधियों और तस्करों को छुड़ा लिया
  • तालिबान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम 10वीं प्रांतीय राजधानी गजनी पर भी कब्जा कर लिया

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Afghanistan: Taliban capture Ghazni, 10th provincial capital, close to Kabul
Taliban - फोटो : PTI

विस्तार

गजनी, हेरात व लश्करगाह के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान के रणनीतिक शहर और प्रांतीय राजधानी कंधार के साथ ही घोर प्रांत की राजधानी फिरोज कोह को भी अपने कब्जे में ले लिया है। कंधार प्रांत को ही तालिबान की जन्म स्थली माना जाता है। अब तालिबान ने अफगानिस्तान के समूचे दक्षिणी भाग समेत करीब दो तिहाई क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बना लिया है। अब वह अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से महज 90 किलोमीटर दूर रह गया है। हालांकि काबुल को फिलहाल सीधा खतरा नहीं है, लेकिन अमेरिकी मिलिट्री इंटेलिजेंस का ताजा अनुमान है कि इस गति से अगले 30 दिन में तालिबान राजधानी पर अपना नियंत्रण कर लेगा।

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तालिबान के लड़ाके ऐतिहासिक शहर में ग्रेट मस्जिद से आगे बढ़ गए और सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक सरकारी इमारत से रुक-रुककर गोलीबारी होती रही जबकि बाकी हिस्सों में तालिबान कब्जे के कारण शांति देखी गई। बदतर होते सुरक्षा हालात को देखते हुए अमेरिका काबुल में अमेरिकी दूतावास से कर्मियों को निकालने के लिए 3,000 सैनिकों को भेज रहा है। वहीं, ब्रिटेन भी देश से अपने नागरिकों को निकलने में मदद देने के लिए कुछ समय के लिए करीब 600 सैनिकों की वहां पर तैनाती करेगा। कनाडा ने भी विशेष बलों को अफगानिस्तान में तैनात करने की तैयारी कर ली है ताकि काबुल में कनाडाई दूतावास बंद करने से पहले अपने कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला जा सके। उधर, कब्जे वाले इलाकों में तालिबान ने स्थानीय महिलाओं को लड़ाकों से शादी की बाध्यता शुरू कर दी है।
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तालिबान की जन्मस्थली है कंधार, भारत का अगवा विमान यहीं उतरा
कंधार वही जगह है जहां 1990 के दशक में सर्वप्रथम तालिबान का कब्जा हुआ था और काबुल में बैठी नजीबुल्ला सरकार उखाड़कर आतंकियों ने देश को इस्लामी मुल्क घोषित किया था। कंधार दश का दूसरा सबसे ब़ा शहर है और तालिबान आंदोलन का जन्म यहीं से होने के कारण इसे आतंकियों की राजधानी भी कहा जाता है। 1999 में भारतीय एयरलाइंस के विमान आईसी-814 को अगवा कर यहीं लाया गया था। कंधार में ही तालिबान के संस्थापक मुल्ला मोहम्मद उमर का जन्म हुआ था। इसके बाद 2001 में अमेरिकी सेना ने छह लाख की आबादी वाले इस शहर से तालिबान को मार भगाया था। यहां के हवाईअड्डे पर आमेरिका और नाटो सेनाओं के करीब 26 हजार सैनिक तैनात थे लेकिन अब ये सैनिक पूरा इलाका खाली कर चुके हैं। 
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गजनी पर भी कब्जा
अफगानिस्तान के एक सांसद, दो अफगान अफसरों ने पुष्टि की है कि तालिबान आतंकियों ने प्रांतीय राजधानी गजनी पर कब्जा कर लिया है। पिछले कई घंटों से यहां भीषण लड़ाई चल रही थी। राजधानी के बाहरी क्षेत्र में अब भी संघर्ष जारी है लेकिन राजधानी में तालिबान अपना झंडा लहरा दिया है। उधर, हेलमंद प्रांत में की राजधानी लश्करगाह में कार बम से हमला कर तालिबान ने पुलिस मुख्यालय पर भी कब्जा जमा लिया है। हेलमंद की सांसद नसीमा नियाजी ने बताया कि मुख्यालय की इमारत पर कब्जे के बाद कुछ पुलिस अफसरों ने तालिबान के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है। उधर, तालिबान के कब्जाए छह अफगानिस्तानी शहरों से उसने 1,000 से ज्यादा कैदी छुड़ा लिए हैं। जेल प्रशासन के निदेशक सफीउल्लाह जलालजई ने कहा, इनमें से ज्यादातर को नशीली दवाओं की तस्करी, अपहरण और सशस्त्र डकैती के लिए सजा सुनाई गई थी।  

छुड़ाए गए कैदियों में कई तालिबान आतंकी थे
तालिबान ने जिन छह शहरों की जेलों में नशीली दवाओं की तस्करी, सशस्त्र डकैती और अपहरण के दोषियों को तालिबान ने छुड़ाया है उनमें कई तालिबान आतंकी भी थे। कुंदुज में रिहा कराए गए 630 कैदियों में 180 तालिबान आतंकी थे। इनमें से 15 को अफगान सरकार ने मौत की सजा सुनाई थी। निमरोज प्रांत के जरांज शहर से छुड़ाए गए 350 कैदियों में से 40 तालिबान आतंकी थे। हालांकि अफगान सरकार ने कहा है कि आतंकियों को पकड़ने के बाद जेल से छुड़ाए गए सभी कैदी दोबारा पकड़े जाएंगे।

हताहतों की जानकारी नहीं
हेलमंद प्रांत की राजधानी लश्करगाह के पुलिस मुख्यालय पर कब्जे के बाद यहां मौजूद अफगान बलों ने तालिबान के आगे समर्पण कर दिया और पास स्थित अन्य गवर्नर के दफ्तर में चले गए। यहां अब भी सरकारी बलों का नियंत्रण है। सांसद नसीमा नियाजी ने बताया कि अभी यह जानकारी नहीं मिली है कि इस हमले में कितने लोग हताहत हुए हैं। उन्हें इस हमले में कई लोगों के हताहत होने की आशंका है।

इमरान का दर्द : अमेरिका की पसंद है भारत 
पाक पीएम इमरान खान ने अपने घर पर विदेशी पत्रकारों से बात करते हुए अपना दर्द बयां किया। उन्होंने अमेरिका पर कटाक्ष करते हुए कहा, वाशिंगटन पाकिस्तान को 20 साल तक अफगानिस्तान में छेड़े गए युद्ध में इस्तेमाल करने के रूप में देखता है और जब रणनीतिक साझेदारी की बात आती है तो वह भारत को पसंद करता है। उन्होंने कहा, अमेरिका ने पाक को सिर्फ अफगानिस्तान में फैली गंदगी को साफ करने के लिए फायदेमंद समझता है। खान ने कहा, मैं समझता हूं कि अमेरिकियों ने फैसला कर लिया है कि उनका रणनीतिक साथी अब भारत है और इसी वजह से वे पाक के साथ अलग बर्ताव कर रहे हैं। 

गनी के राष्ट्रपति रहते समझौता नहीं करेगा तालिबान
अफगानिस्तान में जारी संघर्ष के बीच पाक पीएम इमरान खान ने कहा है कि जब तक अशरफ गनी देश के राष्ट्रपति रहेंगे तब तक आतंकी गुट अफगानिस्तान सरकार से बात नहीं करेगा। उन्होंने अपने मन की बात रखते हुए कहा कि मौजूदा हालात में राजनीतिक समझौता मुश्किल दिख रहा है। उन्होंने कहा, मैंने तालिबान को मनाने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने कहा कि गनी के होते हम बात नहीं कर सकते।

गनी ने की नए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की नियुक्ति
अफगानिस्तान में तालिबान के तेजी से बढ़ते कदमों पर अंकुश लगाने के लिए राष्ट्रपति अशरफ गनी ने नए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के रूप में हैबतुल्लाह अलीजई की नियुक्ति की है। गनी ने यह नियुक्ति वली मोहम्मद अहमदजई की जगह की है। अफगानिस्तान टाइम्स ने बताया कि अलीजई ने इससे पहले अफगान नेशनल आर्मी कमांडो के कमांडर के रूप में काम किया है।

अफगान नेतृत्व तय करे उसमें लड़ने की इच्छाशक्ति है या नहीं : व्हाइट हाउस
वाशिंगटन। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के ज्यादातर हिस्सों को अपने कब्जे में लेने के बीच व्हाइट हाउस ने कहा कि यह अफगान नेतृत्व को तय करना है कि क्या उनके पास जवाबी कार्रवाई की राजनीतिक इच्छाशक्ति है या नहीं। प्रवक्ता जेन साकी ने कहा, अमेरिका ने दो दशकों तक अफगानिस्तान की राष्ट्रीय सेना को प्रशिक्षण दिया है और उनके पास तालिबान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की क्षमता व हथियार हैं। उन्होंने कहा, अमेरिका युद्धग्रस्त देश में बिगड़े सुरक्षा हालात पर करीबी नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, हम अफगान बलों के साथ हवाई हमले करते रहेंगे।


इस साल करीब चार लाख लोग विस्थापित हुए : संयुक्त राष्ट्र
अफगानिस्तान में बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच इस साल की शुरुआत से करीब चार लाख लोग विस्थापित हुए हैं, खासकर मई में बड़ी संख्या में लोग विस्थापन के लिए मजबूर हुए हैं। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरस के प्रवक्ता ने दी है। प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, इस साल की शुरुआत से करीब 3,90,000 लोग देश में संघर्ष के कारण विस्थापित हुए हैं जिनकी संख्या मई में एकाएक बढ़ी है। एक जुलाई से पांच अगस्त, 2021 के बीच मानवीय समुदाय ने सत्यापित किया है कि आंतरिक रूप से विस्थापित 5,800 लोग काबुल पहुंचे जो संघर्ष एवं अन्य खतरों से बचाने की गुहार लगा रहे हैं। 

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