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Afghanistan: एक साल बाद फिर से खुलने जा रहे सिनेमाघर, तालिबान राज में 37 फिल्मों में सिर्फ एक महिला अभिनेत्री
Sun, 28 Aug 2022 06:16 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 28 Aug 2022 06:16 PM IST
सार
रिपोर्ट के मुताबिक, 37 फिल्में और डॉक्यूमेंट्रीज प्रदर्शित होने के लिए लाइन में हैं लेकिन यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि आतिफा मोहम्मदी एकमात्र महिला अभिनेत्री हैं, जिन्होंने हाल ही में बनी इन फिल्मों में से एक में भूमिका निभाई है।
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तालिबान के कब्जे से पहले अफगानिस्तान में सिनेमा हॉल के बाहर का हाल (फाइल)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
काबुल पर तालिबान के कब्जे को एक साल का समय 15 अगस्त को पूरा हो चुका है। तालिबान के आते ही अफगानिस्तान में फिल्मों पर पाबंदी लग गई थी। हालांकि अब खबर है कि देशभर के सिनेमाघरों में अफगान फिल्में दिखाई जाएंगी।
कई लोग अफगान सिनेमाघरों के एक साल बाद खुलने की खुशी मना हैं, वहीं कुछ लोग इस प्रक्रिया में महिलाओं के अधिकारों के उल्लंगन के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 37 फिल्में और डॉक्यूमेंट्रीज प्रदर्शित होने के लिए लाइन में हैं लेकिन यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि आतिफा मोहम्मदी एकमात्र महिला अभिनेत्री हैं, जिन्होंने हाल ही में बनी इन फिल्मों में से एक में भूमिका निभाई है।
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फिल्मों के अभिनेता सिनेमाघरों के फिर से खुलने पर खुशी जता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें फिल्मों के निर्माण के लिए धन उपलब्ध कराना होगा। एक कलाकार अब्दुल साबोर खिनजी ने कहा, "एक साल बाद सिनेमा के दरवाजे फिर से खुल गए हैं। हम खुश हैं।"
उन्होंने कहा, हमने फिल्मों पर अपना जेब खर्चा लगाया है। एक अन्य कलाकार फैयाज इफ्तिखार ने कहा, हम अपना काम करने के लिए खुश हैं।
काबुल निवासी जहरा मुर्तजावी ने कहा, "इस क्षेत्र में महिलाओं को प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह महिलाओं का अधिकार है। मुझे नहीं लगता कि महिलाओं की उपस्थिति के बिना एक फिल्म अच्छी लगती है।"
तालिबान ने पिछले महीने ही घोषणा की थी कि महिलाओं और लड़कियों को अपने घरों से बाहर तब तक नहीं निकलना चाहिए जब तकि आवश्यक न हो। तालिबान ने यह भी कहा था कि महिलाओं और लड़कियों को घरों से बाहर निकलने के लिए चेहरे को ढकना जरूरी है। तालिबान का शासन अफगानिस्तान में पहले 1996 से 2000 तक रहा। इसके बाद 15 अगस्त को अमेरिकी सेना की वापसी के साथ वह काबुल पर काबिज हो गया।
सत्ता में आते ही तालिबान ने महिला मामलों के मंत्रालयों को समाप्त कर दिया। लड़कियों की शिक्षा पर भी प्रतिबंध लगा दिया और महिलाओं को लगभग सभी नौकरियों से प्रतिबंधित कर दिया। इसके साथ ही इस समूह ने महिलाओं और लड़कियों को हिंसा से बचाने की व्यवस्था को भी खत्म कर दिया और उनके लिए स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त करना मुश्किल बना दिया।
तालिबान ने हिंसा के जरिए नए नियम लागू किए। जिनमें बताया गया कि उन्हें कैसे कपड़े पहनने चाहिए और कैसा व्यवहार करना चाहिए।
ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) के महिला अधिकार प्रभाग ने कहा कि तालिबान के शासन में महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के उल्लंघनों की सूची लंबी होती जा रही है, बढ़ती जा रही है।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने हमेशा चेतावनी दी थी कि महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करने के तालिबान के वादे झूठे हैं। काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद के दिनों में अफगान अधिकार कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी थी कि समूह महिलाओं पर अपनी कार्रवाई तेज करेगा।
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कई लोग अफगान सिनेमाघरों के एक साल बाद खुलने की खुशी मना हैं, वहीं कुछ लोग इस प्रक्रिया में महिलाओं के अधिकारों के उल्लंगन के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक, 37 फिल्में और डॉक्यूमेंट्रीज प्रदर्शित होने के लिए लाइन में हैं लेकिन यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि आतिफा मोहम्मदी एकमात्र महिला अभिनेत्री हैं, जिन्होंने हाल ही में बनी इन फिल्मों में से एक में भूमिका निभाई है।
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फिल्मों के अभिनेता सिनेमाघरों के फिर से खुलने पर खुशी जता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें फिल्मों के निर्माण के लिए धन उपलब्ध कराना होगा। एक कलाकार अब्दुल साबोर खिनजी ने कहा, "एक साल बाद सिनेमा के दरवाजे फिर से खुल गए हैं। हम खुश हैं।"
उन्होंने कहा, हमने फिल्मों पर अपना जेब खर्चा लगाया है। एक अन्य कलाकार फैयाज इफ्तिखार ने कहा, हम अपना काम करने के लिए खुश हैं।
काबुल निवासी जहरा मुर्तजावी ने कहा, "इस क्षेत्र में महिलाओं को प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह महिलाओं का अधिकार है। मुझे नहीं लगता कि महिलाओं की उपस्थिति के बिना एक फिल्म अच्छी लगती है।"
तालिबान ने पिछले महीने ही घोषणा की थी कि महिलाओं और लड़कियों को अपने घरों से बाहर तब तक नहीं निकलना चाहिए जब तकि आवश्यक न हो। तालिबान ने यह भी कहा था कि महिलाओं और लड़कियों को घरों से बाहर निकलने के लिए चेहरे को ढकना जरूरी है। तालिबान का शासन अफगानिस्तान में पहले 1996 से 2000 तक रहा। इसके बाद 15 अगस्त को अमेरिकी सेना की वापसी के साथ वह काबुल पर काबिज हो गया।
सत्ता में आते ही तालिबान ने महिला मामलों के मंत्रालयों को समाप्त कर दिया। लड़कियों की शिक्षा पर भी प्रतिबंध लगा दिया और महिलाओं को लगभग सभी नौकरियों से प्रतिबंधित कर दिया। इसके साथ ही इस समूह ने महिलाओं और लड़कियों को हिंसा से बचाने की व्यवस्था को भी खत्म कर दिया और उनके लिए स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त करना मुश्किल बना दिया।
तालिबान ने हिंसा के जरिए नए नियम लागू किए। जिनमें बताया गया कि उन्हें कैसे कपड़े पहनने चाहिए और कैसा व्यवहार करना चाहिए।
ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) के महिला अधिकार प्रभाग ने कहा कि तालिबान के शासन में महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के उल्लंघनों की सूची लंबी होती जा रही है, बढ़ती जा रही है।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने हमेशा चेतावनी दी थी कि महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करने के तालिबान के वादे झूठे हैं। काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद के दिनों में अफगान अधिकार कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी थी कि समूह महिलाओं पर अपनी कार्रवाई तेज करेगा।