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एडीबी की रिपोर्ट : महामारी के बीच दक्षिण पूर्वी एशिया में 47 लाख गरीब और बढ़े, सरकारें आर्थिक विकास को तुरंत बढ़ावा दें

Thu, 17 Mar 2022 12:43 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, मनीला।
एजेंसी, मनीला। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 17 Mar 2022 12:43 AM IST
सार

एडीबी के अध्यक्ष मासत्सुगु असाकावा ने कहा है कि महामारी ने व्यापक स्तर पर बेरोजगारी, असमानता और बढ़ती गरीबी के स्तर को जन्म दिया है। इसमें खासकर महिलाएं, युवा श्रमिक और दक्षिण पूर्व एशिया में बुजुर्ग लोग शामिल हैं। एडीबी ने रिपोर्ट में कहा है कि साल 2021 में कोविड-19 के दौर में आर्थिक गतिविधियां कम होने के कारण दक्षिण पूर्व एशिया में 93 लाख कम नियोजित कर्मचारी थे, जिससे लाखों लोग बिना काम के ही रह गए।

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ADB report: 47 Lakh poor people in Southeast Asia increased amid During Coronavirus pandemic, governments should immediately boost economic development
एडीबी - फोटो : twitter

विस्तार

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने बुधवार को कहा है कि महामारी ने 2021 में दक्षिण पूर्व एशिया के भीतर सर्वाधिक गरीब लोगों की संख्या में 47 लाख लोग और जोड़े हैं। इस आंकड़े ने गरीबी से लड़ने में फायदे को उलट दिया है। एडीबी ने आग्रह किया है कि सरकारें आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए तुरंत कदम उठाएं।

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एडीबी ने एक रिपोर्ट में कहा है कि अत्यधिक गरीबी में उन लोगों को रखा गया है जिनकी आय 145 रुपये (1.90 डॉलर) प्रतिदिन से कम होती है। इससे पहले यह संख्या 2.43 करोड़ थी जो दक्षिण पूर्व एशिया की सामूहिक 65 करोड़ आबादी का 3.7 फीसदी थी। महामारी से पहले इस क्षेत्र में रहने वाले अत्यधिक गरीब लोगों की संख्या 2019 में 1.49 करोड़ थी और 2018 में 1.8 करोड़ थी। 
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एडीबी के अध्यक्ष मासत्सुगु असाकावा ने कहा, महामारी ने व्यापक स्तर पर बेरोजगारी, असमानता और बढ़ती गरीबी के स्तर को जन्म दिया है। इसमें खासकर महिलाएं, युवा श्रमिक और दक्षिण पूर्व एशिया में बुजुर्ग लोग शामिल हैं। एडीबी ने कहा, 2021 में कोविड-19 के दौर में आर्थिक गतिविधियां कम होने के कारण दक्षिण पूर्व एशिया में 93 लाख कम नियोजित कर्मचारी थे, जिससे लाखों लोग बिना काम के ही रह गए।
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चीन : ओमिक्रॉन प्रसार से प्रशासन पर दबाव
चीन के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासन के आगामी हफ्तों में तेज दबाव में आने की आशंका है क्योंकि 2020 के बाद कोविड-19 मामलों की सबसे बड़ी लहर से चिकित्सा संस्थानों पर दबाव बढ़ा है। पिछले 10 सप्ताहों में चीन में ओमिक्रॉन प्रसार के बीच नए घरेलू मामलों की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ी है और ये 2021 की तुलना में 14,000 से ज्यादा हो गए हैं। इस कारण कई शहरों में लॉकडाउन लगाना पड़ा। हालात इतने विकट हो रहे हैं कि चीन जैसे-तैसे कोरोना के पुराने बुरे दौर से उबरने में जुटा था लेकिन अब वह दोबारा वहीं पहुंच गया है। 

पूर्वोत्तर प्रांत जिलिन में प्रकोप सबसे अधिक है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के महामारी विज्ञान के प्रोफेसर चेन झेंगमिन ने कहा कि आगामी दो सप्ताह यह निर्धारित करने के लिए अहम होंगे कि क्या नई कोशिशों से देश में संक्रमण का विकास रुक पाया है। हालांकि चीन में टीका दर 90 फीसदी है। लेकिन बुजुर्गों को पर्याप्त बूस्टर खुराक नहीं मिली है। इस  कारण मौत के आंकड़ों में बढ़ोतरी का खतरा है।

न्यूजीलैंड ने पर्यटन उद्योग को फिर से खोलने की घोषणा की
न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने बुधवार को कहा कि देश में कोरोना वायरस प्रतिबंधों में ढील दी जा रही है और एक मई से पर्यटकों को देश आने की अनुमति होगी। उन्होंने कहा, हम दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने पर्यटकों के लिए सीमाएं खोलने की पूर्व घोषित तारीख में बदलाव किया। इसके तहत अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन व यूरोप के पर्यटक देश में आ सकते हैं।


ओमिक्रॉन का संबंध बच्चों में होने वाली सांस की बीमारी से : अध्ययन
सार्स-कोव-2 के ओमिक्रॉन स्वरूप से संक्रमण का संबंध छोटे बच्चों में आम तौर पर पाई जाने वाली सांस संबंधी बीमारी से है, जिसे कंठशोथ या क्रूप कहा जाता है। यह सांस की नली से जुड़ा संक्रमण है जो सांस को रोकता है और जिसमें एक खास किस्म की सूखी खांसी होती है। हाल में पत्रिका ‘पीडियाट्रिक्स’ में प्रकाशित अध्ययन में उन 75 बच्चों का जिक्र किया गया है जो एक मार्च 2020 से 15 जनवरी 2022 तक क्रूप और कोविड-19 की समस्या के साथ बोस्टन चिल्ड्रंस हॉस्पिटल के आपात विभाग में आए।

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