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एशिया में कौन है प्रभावशाली: अमेरिका संभला तो घटा चीन का असर, कोरोना से भारत और जापान को पहुंचा नुकसान

Mon, 06 Dec 2021 07:31 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 06 Dec 2021 07:31 PM IST
सार

इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले लॉवी इंस्टीट्यूट ने कहा कि चीनी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर निकट भविष्य में भी अमेरिका से अधिक रहेगी। लेकिन चीन की जनसंख्या की बढ़ती औसत उम्र और आर्थिक ढांचा संबंधी कमजोरियों के कारण उसकी वृद्धि दर आगे चल कर समस्याग्रस्त हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है- चीन का उदय जारी रहेगा, यह निश्चित नहीं है...

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According to the Lowy Institute Asia Power Index 2021 report, China is ahead of US in terms of economic potential and relations with various countries
अमेरिका चीन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

इस साल में एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका ने अपना प्रभाव बढ़ाया। इस तरह वह चीन से आगे निकल गया। ये बात ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लॉवी इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में कही गई है। इसके पहले इस क्षेत्र में चीन लगातार अपना प्रभाव बढ़ा रहा था। लॉवी इंस्टीट्यूट ने इस क्षेत्र में बड़ी ताकतों के प्रभाव के बारे में अपनी अध्ययन रिपोर्ट का प्रकाशन 2018 में शुरू किया था। इस रिपोर्ट में 26 देशों को शामिल किया जाता है। ये थिंक टैंक अपने अध्ययन के दौरान इन देशों के प्रभाव पर गौर करता है। इस साल पहली बार उसने देखा कि यहां अमेरिका का असर बढ़ा है। लॉवी इंस्टीट्यूट सैनिक क्षमता, रक्षा नेटवर्क, आर्थिक, कूटनीतिक और सांस्कृतिक प्रभाव, आंतरिक शक्ति, और भावी संसाधनों का अनुमान लगाते हुए प्रभाव सूचकांक तैयार करता है।

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अमेरिका को 82.2 अंक दिए

इन कसौटियों पर इस बार इस संस्था ने अमेरिका को 82.2 अंक दिए हैं। जबकि 2020 में उसे 81.6 अंक मिले थे। अमेरिका के अलावा ब्रुनेई, श्रीलंका, और बांग्लादेश ऐसे देश रहे, जिनके अंकों में वृद्धि हुई। चीन को सिर्फ 74.6 अंक मिले। 2018 से लेकर इसके पहले तक उसे इतने कम अंक कभी नहीं मिले थे। हालांकि इस बार अमेरिका का प्रभाव बढ़ा, लेकिन इंस्टीट्यूट ने कहा है कि भविष्य में अमेरिका या चीन दोनों में से कौन इस क्षेत्र में प्रमुख ताकत रहेगा, इस बारे में अभी कुछ साफ-साफ नहीं कहा जा सकता।

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रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक क्षमता और विभिन्न देशों के साथ संबंधों के मामले में चीन अमेरिका से आगे रहा। वैसे सैनिक क्षमता और आंतरिक शक्ति की कसौटियों पर भी उसके अंक बढ़े। लॉवी इंस्टट्यूट ने कहा है कि इस क्षेत्र में सैनिक वर्चस्व खत्म होना और उसकी आर्थिक प्रासंगिकता में कमी अमेरिका के लिए चिंता का पहलू होना चाहिए। इसमें ध्यान दिलाया है कि मुक्त व्यापार समझौते- सीपीटीपीपी में शामिल न होने के कारण अमेरिका का आर्थिक महत्त्व इस इलाके में घटा है। जबकि चीन ने इसमें शामिल होने के लिए अर्जी दे दी है।

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अमेरिका को पछाड़ देगी चीन की अर्थव्यवस्था

इंस्टीट्यूट ने कहा कि चीनी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर निकट भविष्य में भी अमेरिका से अधिक रहेगी। लेकिन चीन की जनसंख्या की बढ़ती औसत उम्र और आर्थिक ढांचा संबंधी कमजोरियों के कारण उसकी वृद्धि दर आगे चल कर समस्याग्रस्त हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है- ‘चीन का उदय जारी रहेगा, यह निश्चित नहीं है। इसकी संभावना बहुत कम है कि चीन कभी उतना वर्चस्व बना सकेगा, जितना कभी अमेरिका का था।’


इस रिपोर्ट में जापान, भारत, रूस, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर ने सबसे प्रभावशाली आठ देशों में अपनी जगह बनाए रखी है। लेकिन इंडोनेशिया अब नौवें स्थान पर आ गया है। जबकि मलेशिया टॉप टेन से बाहर हो गया है। उसकी जगह थाईलैंड ने ले ली है।


वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम के मुताबिक इस बार लॉवी इंस्टीट्यूट ने टीका कूटनीति (वैक्सीन डिप्लोमैसी) को भी एक कसौटी बनाया। इसमें अमेरिका ने बाजी मार ली, जिसने इस क्षेत्र के देशों को चीन की तुलना में दोगुना मदद दी है। उधर कोरोना महामारी के दौरान हुए नुकसान के कारण जापान और भारत को अंकों की क्षति हुई।

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