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नेपाल: देउबा के लिए टेढ़ी खीर बना हुआ है एमसीसी प्रस्ताव के लिए समर्थन जुटाना

Wed, 23 Feb 2022 03:09 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 23 Feb 2022 03:09 PM IST
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सार
देउबा की नेपाली कांग्रेस के नेताओं ने कहा है कि गठबंधन न टूटे, इसके लिए देउबा और दहल के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। लेकिन दहल ने अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि उनकी पार्टी प्रस्ताव को पारित कराने में सहायक बनेगी...
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According to the deadline set by the MCC, the challenge before the Deuba government is to get this resolution passed by February 28
शेर बहादुर देउबा - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अमेरिकी संस्था मिलनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) से 50 करोड़ डॉलर की मदद को मंजूरी दिलाने का प्रस्ताव शेर बहादुर देउबा सरकार ने संसद में भले पेश कर दिया है, लेकिन उसे पारित कराने के लिए जरूरी समर्थन अब तक वह नहीं जुटा पाई है। एमसीसी की तरफ से तय समयसीमा के मुताबिक देउबा सरकार के सामने चुनौती 28 फरवरी तक इस प्रस्ताव को पारित करवा लेने की है। ये मदद लेने का करार 2017 में हुआ था, लेकिन नेपाल में जारी राजनीतिक विरोध के कारण उस करार के संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।



नेपाली मीडिया में छपी खबरों क मुताबिक विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) ने अब तक सरकारी प्रस्ताव को समर्थन देने का कोई संकेत नहीं दिया है। उसने यह जरूर कहा है कि इस प्रश्न पर तभी विचार करेगी, जब सत्ताधारी गठबंधन टूट जाएगा। इसलिए प्रधानमंत्री देउबा को संसदीय समर्थन जुटाने के लिए कई तरह के विकल्पों पर सोच-विचार करना पड़ रहा है।

देउबा-दहल की बातचीत

देउबा ने एक बार फिर से सत्ताधारी गठबंधन में शामिल नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) के नेता पुष्प कमल दहल से बातचीत की है। सोमवार को हुई इस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री ने दहल से साफ पूछा कि प्रस्ताव पर संसद में मतदान के दौरान माओइस्ट सेंटर पार्टी का क्या रुख रहेगा। देउबा की नेपाली कांग्रेस के नेताओं ने कहा है कि गठबंधन न टूटे, इसके लिए देउबा और दहल के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। लेकिन दहल ने अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि उनकी पार्टी प्रस्ताव को पारित कराने में सहायक बनेगी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक नेपाली कांग्रेस के नेता रामचंद्र पौडेल ने दहल के अलावा सत्ताधारी गठबंधन के दो अन्य घटक दलों- नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड सोशलिस्ट) और जनता समाजवादी पार्टी के नेताओँ से बातचीत की है। बताया जाता है कि इस दौरान दहल ने आश्वासन दिया कि सत्ताधारी गठबंधन नहीं टूटेगा और एमसीसी से हुआ समझौता ‘जरूरी प्रक्रिया’ के तहत अपने अंजाम पर पहुंच जाएगा। लेकिन जरूरी प्रक्रिया से उनका क्या मतलब है, यह उन्होंने स्पष्ट नहीं किया।

बताया जहरीला गठबंधन

अब तक माओइस्ट सेंटर और यूनिफाइड सोशलिस्ट पार्टियों का औपचारिक रुख यही है कि वे एमसीसी करार के विरोध में मतदान करेंगी। माओइस्ट सेंटर के कुछ नेताओं ने तो इस मुद्दे पर सत्ताधारी गठबंधन छोड़ देने तक की धमकी दी है। इसे देखते हुए देउबा ने कई स्तरों पर बातचीत जारी रखी है। पूर्व प्रधानमंत्री और यूएमएल पार्टी के प्रमुख केपी शर्मा ओली से भी कई बार बात कर चुके हैं। लेकिन यूएमएल पार्टी के नेता सुबास चंद्र नेमबांग ने कहा है- ‘हमारा रुख साफ है। जब तक यह जहरीला गठबंधन नहीं टूटता है, हम नेपाली कांग्रेस को समर्थन नहीं दे सकते।’


उधर नेपाली कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यूएमएल पार्टी को अनुमोदन प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि सबसे उसने ही 2019 में ऐसे एक प्रस्ताव को संसद में रजिस्टर्ड कराया था। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि सत्ता से बाहर होने के यूएमएल ने अपना रुख बदल लिया है। अब उसने ऐसी शर्त लगा दी है, जिसे स्वीकार करना देउबा के लिए आसान नहीं है।

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