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दावा : शारीरिक मेहनत के दौरान मास्क पहनने से फेफड़े नहीं होते प्रभावित

Wed, 18 Nov 2020 04:23 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Published by: देव कश्यप Updated Wed, 18 Nov 2020 04:23 AM IST
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According to Research Lungs are not affected by wearing masks during physical exertion
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

एक नए शोध में दावा किया गया है कि शारीरिक मेहनत के दौरान मास्क पहनने से भी दिल और फेफड़े ज्यादा प्रभावित नहीं होते हैं। अभी तक यही माना जा रहा था कि व्यायाम जैसी शारीरिक गतिविधियों के दौरान मास्क पहनने से हमारे दिल और फेफड़े खराब हो रहे हैं।

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दरअसल कई शोध में दावा किया गया था कि फेसमास्क पहनने से कोविड-19 (कोरोना वायरस) के फैलाव को रोकने में मदद मिलती है। मास्क पहनने वाले व्यक्ति के सांस लेने, छींकने, बोलने या खांसने के दौरान मुंह से निकलने वाले बेहद सूक्ष्म ड्रॉपलेट (बेहद सूक्ष्म बूंद) और एयरोसोल हवा में नहीं फैलते। लेकिन साथ ही इन शोधन में यह भी चिंताएं जताई गई थीं कि मास्क के कारण सांस लेने में आ रही बाधा से हमारे कार्डियोपल्मॉनरी सिस्टम (दिल व फेफड़ों संबंधी तंत्र) में खराबी पैदा हो रही है।
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माना जा रहा है कि मास्क लगाने से सांस लेने में मुश्किल होती है और इससे अंदर जाने वाली ऑक्सीजन व बाहर छोड़ी जा रही कार्बन डाइ ऑक्साइड के प्रवाह की स्थिति बदलकर डिस्पेनिया (सांस की तकलीफ बताने के लिए उपयोग किए जाने वाली चिकित्सकीय स्थिति) में बदल जाती है। इसी कारण कार्डियोपल्मॉनरी सिस्टम में खराबी पैदा होती है।
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अमेरिकी व कनाडाई शोधकर्ताओं के संयुक्त दल के नए शोध में इन धारणाओं के विपरीत दावा किया गया है। अमेरिकी थोराकिक सोसाइटी के ऐनल्ज (वर्ष वृतांत) में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक, डिस्पेनिया की स्थिति महसूस हो सकती है, लेकिन इस बात के बेहद कम अनुभव आधारित सबूत हैं कि फेसमास्क पहनने से फेफड़ों की क्षमता पर कोई अहम कमी आती है। खासतौर पर भारी व्यायाम करने के दौरान मास्क पहनने के दौरान भी ऐसी स्थिति पैदा होने के सबूत ज्यादा नहीं मिले हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस बात के भी सबूत नहीं मिले हैं कि मास्क पहनकर व्यायाम करने की शारीरिक प्रतिक्रिया में लिंग या उम्र के लिहाज से भी कोई भिन्नता होती है।


खून में ज्यादा नहीं मिश्रित होती हानिकारक गैसें
यूनिवर्सिअी ऑफ कैलिफोर्निया के सैन डियागो स्कूल ऑफ मेडिसिन की प्रोफेसर (मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी) सुसान हॉपकिंस का दावा है कि ऐसा महसूस हो सकता है कि गतिविधियों के दौरान ज्यादा दमखम लगाना पड़े, लेकिन सांस लेने के काम पर मास्क पहनने का प्रभाव, रक्त और अन्य शारीरिक मापदंडों में ऑक्सीजन और कार्बन डाइ ऑक्साइड जैसी गैसों पर बेहद कम होता है। यह प्रभाव इतना छोटा होता है कि इसका पता भी नहीं लगाया जा सकता। सुसान इस नए शोध की मुख्य लेखिका हैं और व्यायाम शरीर विज्ञान व तनाव के दौरान फेफड़ों के अध्ययन की विशेषज्ञ हैं।

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