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रैनसमवेयर साइबर हमलों से बढ़ती ही जा रही है परेशानी, जोर पकड़ रहा है फिरौती वसूलने का यह तरीका

Sat, 12 Jun 2021 04:12 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 12 Jun 2021 04:12 PM IST
सार

2020 में रैनसमवेयर अटैक के जरिए 35 करोड़ डॉलर की फिरौती वसूली गई। 2019 की तुलना में ये रकम तीन गुना ज्यादा थी। जानकारों ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमलों के कारण आने वाले समय में व्यापारिक गतिविधियों में बड़ी रुकावट पड़ सकती है...

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According to a recent report Incidents of ransomware cyber attacks to extort money are increasing rapidly
हैकर - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पैसा वसूलने के लिए साइबर हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक हाल में ऐसे हमलों की संख्या में तेजी से बढ़ी है। अधिक से अधिक उद्योग अब इसका निशाना बने हैं। इन हमलों के दौरान हैकर कंपनियों की अहम जानकारियां चुरा लेते हैं या फिर उनके कंप्यूटर सिस्टम को जाम कर देते हैं। उसके बाद उन कंपनियों के पास हैकरों को फिरौती की रकम देने के अलावा कोई और चारा नहीं रह जाता। विशेषज्ञों के मुताबिक पहले साइबर हमले सियासी मकसदों से किए जाते थे। लेकिन अब पैसा वसूलने के लिए के लिए हो रहे ऐसे हमले ज्यादा बड़ा खतरा बन गए हैं।

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अमेरिका के साइबर एक्सपर्ट क्रिस क्रेब्स ने कहा है कि अब ऐसे हमले करना एक फायदे का धंधा बन गया है। 2020 में रैनसमवेयर अटैक के जरिए 35 करोड़ डॉलर की फिरौती वसूली गई। 2019 की तुलना में ये रकम तीन गुना ज्यादा थी। जानकारों ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमलों के कारण आने वाले समय में व्यापारिक गतिविधियों में बड़ी रुकावट पड़ सकती है।
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हाल में ऐसा सबसे बड़ा अमेरिका में कोलोनियल गैस पाइपलाइन पर हुआ। इसके अलावा कई शहरों में नगर प्रशासन और यहां तक कि अस्पताल भी ऐसे हमलों का निशाना बने हैं। इनमें से ज्यादातर मामलों में हमले का शिकार बनी संस्था को अपने कंप्यूटर नेटवर्क सिस्टम को फिर से चालू करने के लिए हैकरों को पैसा देना पड़ा। कुछ मामलों में हैकर किसी कंपनी के सोर्स कोड तक पहुंचने में सफल रहे। ऐसा ही एक मामला इलेक्ट्रॉनिक आर्ट्स कंपनी का था, जिसमें हमलावरों ने कंपनी के कई गेम्स के सोर्स कोड को हैक कर लिया। ब्राजील की कंपनी जेबीएस पर हुआ साइबर हमला भी काफी चर्चित रहा है। इस हमले के दौरान कंपनी के अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया स्थित सर्वरों को निशाना बनाया गया। इस कारण कंपनी के कई संयंत्रों में कामकाज रुक गया।
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अभी हाल ही में अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की न्यायिक समिति के सामने अपनी गवाही में अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई के निदेशक क्रिस्टोफर व्रे ने कहा- ‘हमारा आकलन है कि साइबर खतरा अति तेज गति से बढ़ रहा है।’ विश्लेषकों के मुताबिक रैनसमवेयर हमलों (फिरौती वसूलने के लिए साइबर हमलों) की संख्या बढ़ने के पीछे दो खास कारण हैं। इनमें एक क्रिप्टोकरेंसी का प्रचलन में आना है। इससे फिरौती की रकम वसूलना हैकरों के लिए आसान हो गया है। दूसरी वजह यह है कि ऐसी बहुत सी कंपनियां हैं, जो अपने डाटा को खोने या देर तक कामकाज में बाधा का जोखिम नहीं उठा सकतीं। इसलिए ऐसी कंपनियां हमला होते ही फिरौती देने के लिए तैयार हो जाती हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या का अब एक ही समाधान है कि हैकरों के लिए ऐसे साइबर हमले करना जोखिम भरा बना दिया जाए। कोलोनियल पाइपलाइन के मामले में अमेरिकी सरकार ने जिस तेजी से कार्रवाई की, वह उससे अच्छा संदेश गया है। उस मामले में हमलावरों को वसूली गई रकम के एक बड़ा हिस्सा लौटने के लिए मजबूर कर दिया गया। इस बीच अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने कहा है कि अब वह साइबर हमलों को उतनी ही गंभीरता से ले रहा है, जितना वह आतंकवादी गतिविधियों को लेता रहा है।

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