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Pakistan: पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र ने दिखाया आईना, आपदा पीड़ितों को अब तक मरहम नहीं

Wed, 16 Nov 2022 04:01 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 16 Nov 2022 04:01 PM IST
सार

Pakistan: संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि मेडिकल इमरजेंसी के अलावा भी कई मुसीबतें हैं, जिनसे पाकिस्तान की बाढ़ पीड़ित आबादी अभी तक परेशान हैं। लगभग 35 लाख बच्चों की पढ़ाई-लिखाई अभी भी ठहरी हुई है। एक करोड़ 35 लाख लोगों को अभी भी संरक्षण संबंधी सेवाओं की जरूरत है...

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about 8 million such flood victims in Pakistan, who need immediate medical help
Pakistan Floods - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान में विनाशकारी बाढ़ आने के बाद 100 दिन गुजर चुके हैं। लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुसीबत का अभी भी अंत नहीं हुआ है। देश में अभी तकरीबन 80 लाख ऐसे बाढ़ पीड़ित हैं, जिन्हें तुरंत मेडिकल सहायता की जरूरत है। बाढ़ पीड़ित इलाकों में पिछले तीन महीनों से संक्रामक बीमारियों का प्रकोप जारी रहा है। पाकिस्तान के बाढ़ पीड़ितों की ये पीड़ा संयुक्त राष्ट्र की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट से जाहिर हुई है। संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता का समन्वय करने वाले कार्यालय ने ये रिपोर्ट प्राकृतिक आपदा के 100 दिन पूरे होने पार जारी की है।

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संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि मेडिकल इमरजेंसी के अलावा भी कई मुसीबतें हैं, जिनसे पाकिस्तान की बाढ़ पीड़ित आबादी अभी तक परेशान हैं। लगभग 35 लाख बच्चों की पढ़ाई-लिखाई अभी भी ठहरी हुई है। एक करोड़ 35 लाख लोगों को अभी भी संरक्षण संबंधी सेवाओं की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है- ‘आपदा इतनी बड़ी थी और उससे इतना अधिक विनाश हुआ कि पीड़ितों को आने वाले कई महीनों तक सहायता पहुंचाने की जरूरत बनी रहेगी।’ संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि बाढ से प्रभावित लोगों के बीच कुल मिला कर दो करोड़ से अधिक ऐसे लोग हैं, जिन्हें किसी ना किसी प्रकार की मदद की जरूरत बनी हुई है।

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रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि ठंड का मौसम तेजी से करीब आ रहा है। इस मौसम में पीड़ितों को रहने और खाने-पीने संबंधी सहायता की ज्यादा जरूरत होगी। रिपोर्ट में बड़ी संख्या में तंबू और कंबलों को इकट्ठा करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक बलूचिस्तान और सिंध प्रांतों में कई स्थान ऐसे हैं, जहां अभी तक पानी का जमाव बना हुआ है। सिंध प्रांत के डाडू, मीरपुरखा और खैरपुर जिलों में कई इलाके दो महीने तक पानी में डूबे रहे।

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पाकिस्तान को ये मुश्किल उस वक्त झेलनी पड़ रही है, जब वह गहरे आर्थिक संकट में है। महंगाई दर ऊंची बनी हुई है, जबकि विदेशी मुद्रा का भंडार लगातार चूक रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इस स्थिति का असर आपदा के बाद राहत कार्यों पर पड़ा है। राहत कार्य मोटे तौर पर एशियन डेवलपमेंट बैंक, यूरोपियन यूनियन, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में चलाए गए हैं। अनुमान है कि बाढ़ के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को 15.2 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। अब पुनर्वास कार्य पूरा करने के लिए उसे 16.3 बिलियन डॉलर की जरूरत है। बाढ़ के कारण देश में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी की संख्या चार फीसदी बढ़ी है। बाढ़ ने 91 लाख लोगों को गरीबी रेखा के नीचे धकेल दिया।

यहां पर्यवेक्षकों को उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट से देश में इस आपदा पर फिर ध्यान जाएगा। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि आपदा और उससे पीड़ित हुए लोगों को भूल कर पाकिस्तान के राजनेता सियासी उठा-पटक में जुटे हुए हैं। इसका बहुत खराब असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक बाढ़ से 23 लाख मकान क्षतिग्रस्त हुए। नौ लाख मकान तो पूरी तरह ढह गए। इस वजह से 54 लाख लोग अभी विस्थापित जीवन जी रहे हैं। इन सबकी जरूरतों को पूरा करने के लिए साढ़े 81 करोड़ डॉलर की जरूरत है, जबकि विदेशी सहायता से अब पाकिस्तान को 17 करोड़ डॉलर की मदद ही मिल पाई है।

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