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श्रीलंका तो बस झांकी है: कई और देशों में गहरा सकता है ऐसा संकट, सूची में हैं 107 देश

Thu, 12 May 2022 06:46 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 12 May 2022 06:46 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी एजेंसी अंकटाड ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा कि दुनिया में ऐसे 107 देश हैं, जो अनाज की महंगाई, ईंधन की महंगाई, और राजकोषीय संकट में से किसी ना किसी एक स्थिति का सामना कर रहे हैँ...

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A situation like Sri Lanka economic crisis could be happen in other countries of the world. Experts said if Sri Lanka were a company, it would be declared bankrupt at present situation
श्रीलंका संकट - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

श्रीलंका जैसी हालत दुनिया के कई अन्य देशों में भी पैदा हो सकती है। विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर श्रीलंका एक कंपनी होता, तो मौजूदा हाल में उसे दिवालिया घोषित कर दिया होता। यहां संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अधिकारियों के बीच यह राय बनी है कि श्रीलंका सिर्फ एक शुरुआत है। कई और देश उसी जैसी हालत का सामना कर रहे हैं।

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विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मैलपास ने कुछ रोज पहले ये कहा था कि निम्न और मध्यम आय वाले बहुत से देश कोरोना महामारी के असर, महंगाई, और कर्ज के बोझ के कारण मुसीबत में हैं। यूक्रेन युद्ध के कारण बने हालात ने उनकी समस्याएं और बढ़ा दी हैं। मैलपास ने कहा था- ‘मैं विकासशील देशों की स्थिति को लेकर बहुत चिंतित हूं। ऊर्जा, उवर्रक, और अनाज की अचानक बढ़ी महंगाई का उन्हें सामना करना पड़ रहा है। ब्याज दरें बढ़ने की सूरत भी उनके सामने है। इन सबकी उन पर गहरी मार पड़ेगी।’

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69 देशों की हालत खराब

संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी एजेंसी अंकटाड ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में कहा कि दुनिया में ऐसे 107 देश हैं, जो अनाज की महंगाई, ईंधन की महंगाई, और राजकोषीय संकट में से किसी ना किसी एक स्थिति का सामना कर रहे हैँ। 69 देश ऐसे हैं, जिनके सामने ये तीनों समस्याएं खड़ी हैं। इन 69 देशों में 25 अफ्रीका, 25 एशिया-प्रशांत और 19 लैटिन अमेरिका में हैँ।

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अंकटाड के भूमंडलीकरण एवं विकास रणनीति प्रभाग के निदेशक रिचर्ड कोजुल-राइट ने बताया है- ‘देशों को अपनी घरेलू समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। लेकिन उन्हें लग रहे ज्यादातर झटकों का संबंध उन समस्याओं से नहीं है। महामारी और युद्ध के कारण उन्हें अधिक मात्रा में कर्ज लेना पड़ा है।’

विश्व बैंक के मुताबिक यूक्रेन युद्ध शुरू होने के पहले ही निम्न आय वाले देशों में 60 फीसदी कर्ज संकट में थे। यह समस्या खासकर उन देशों के साथ है, जिन्होंने विदेशी मुद्रा में कर्ज लिया। अब अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने के कारण निवेशक निम्न और मध्य आय वाले देशों से अपना पैसा निकाल कर डॉलर में निवेश कर रहे हैं। इससे उन देशों की मुद्राएं दबाव में हैं।

टर्की भी है मुश्किल में

संभावित संकट को देखते हुए ही आईएमएफ ने मिस्र, ट्यूनिशिया, और पाकिस्तान के लिए राहत पैकेज दिया है। अफ्रीकी देशों में जिन मुल्कों की हालत पर निकटता से नजर रखी जा रही है, उनमें घाना, केन्या, दक्षिण अफ्रीका, और इथियोपिया शामिल हैं। अर्जेंटीना के लिए भी हाल में आईएमएफ ने 45 बिलियन डॉलर का कर्ज मंजूर किया है। बताया जाता है कि एल सल्वाडोर और पेरु जैसे लैटिन अमेरिकी देश भी मुश्किल में हैं।



इस बीच टर्की की स्थिति का दिलचस्पी से अध्ययन किया जा रहा है। टर्की में सालाना मुद्रास्फीति दर 70 फीसदी तक पहुंच चुकी है। इसलिए समझा जा रहा था कि उसकी अर्थव्यवस्था सबसे पहले ढहेगी। लेकिन अभी तक टर्की में खाद्य पदार्थ लोगों की पहुंच से बाहर नहीं हुए हैं। बताया जाता है कि गैर-पारंपरिक उपायों का पालन करते हुए टर्की अब तक श्रीलंका जैसी हालत से बचा हुआ है।

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