फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   A new documentary claims Mother had a much darker side and she covered up worst excesses of Church news in Hindi

डॉक्यूमेंट्री में दावा: मदर टेरेसा का एक बेहद अंधेरा पक्ष भी था, चर्चों की सबसे बुरी ज्यादतियों पर पर्दा डाला 

Sun, 08 May 2022 04:42 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 08 May 2022 04:42 PM IST
सार

इस डॉक्यूमेंट्री में मदर टेरेसा के कुछ सबसे करीबी दोस्तों और सबसे कटु आलोचकों से बातचीत की गई है। यह एक तरह से पिछली सदी की सबसे प्रसिद्ध महिलाओं में से एक मदर टेरेसा की छवि का पुनर्मूल्यांकन करने की कोशिश है।

विज्ञापन
A new documentary claims Mother had a much darker side and she covered up worst excesses of Church news in Hindi
मदर टेरेसा - फोटो : फाइल

विस्तार

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित की जा चुकीं मदर टेरेसा को लेकर एक नई डॉक्यूमेंट्री में सनसनीखेज दावा किया गया है। 'मदर टेरेसा: फॉर दि लव ऑफ गॉड' नामक इस डॉक्यूमेंट्री के अनुसार उन्होंने कैथोलिक चर्चों की सबसे खराब ज्यादतियों पर पर्दा डाला था और वह लोगों की मदद करने की तुलना में गरीबी और दर्द के प्रति अधिक आकर्षित प्रतीत हुईं।

विज्ञापन


डॉक्यूमेंट्री में दावा किया गया है कि वह युद्ध रोकने में सक्षम थीं, राष्ट्रपतियों से उनकी मित्रता थी, उन्होंने वैश्विक स्तर पर अनाथालयों के एक विशाल नेटवर्क का निर्माण किया था और बीमार कैदियों को जेल से रिहा कराया था। लेकिन, मदर टेरेसा ने कैथोलिक चर्चों के सबसे खराब कार्यों पर परदा डाला। वह गरीबी और पीड़ा से लोगों को बचने में मदद करने के स्थान पर इनके प्रति आकर्षित प्रतीत होती हैं।
विज्ञापन


तीन हिस्सों वाली इस डॉक्यूमेंट्री में मदर टेरेसा के कुछ सबसे करीबी मित्रों और कुछ सबसे कठोर आलोचकों से बात की गई है। 

मदर टेरेसा का जन्म साल 1910 में स्कोप्जे (अब नॉर्थ मैसिडोनिया) में हुआ था। उनका असली नाम एग्नेस गोंझा बोयाजिजू था। वह केवल आठ साल की थीं जब उनके पिता का निधन हो गया था और उनके परिवार को भीषण गरीबी का सामना करना पड़ा था। नन बनने के लिए 12 साल की उम्र में उन्होंने चर्च की शरण ली थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


18 साल की आयु में वह लोरेटो ऑर्डर की कैथोलिक सिस्टर्स में शामिल होने के लिए डबलिन गई थीं और इसके एक साल बाद शिक्षिका बनने के लिए कलकत्ता (अब कोलकाता) चली गई थीं। साल 1943 में बंगाल में पड़े अकाल के दौरान हुई मौतों और लोगों को हुई पीड़ा का उनके हृदय पर बहुत असर पड़ा था। तीन साल बाद उन्होंने दावा किया था कि ईसा मसीह ने एक ट्रेन में मुझसे बात की है और नए निर्देश दिए हैं।

इस सीरीज में दिखाया गया है कि जब ब्रिटिश डॉक्टर जैक प्रेगर ने उनके साथ चैरिटी की शुरुआत की थी, तभी से विवाद के कई मुद्दे थे। प्रेगर ने जो देखा उससे वह आश्चर्यचकित रह गए थे। वह कहते हैं, 'नर्स मरीजों की ठीक तरह से देखभाल नहीं कर रही थीं। एक ही सिरिंज का कई बार इस्तेमाल किया जा रहा था और इन्हें स्टेरिलाइज भी नहीं किया जा रहा था। एक झुलसी महिला को पेनकिलर देने से मना कर दिया गया था, मैंने चुपके से उसे कुछ दवाएं दी थीं।'


जैक प्रेगर ने कहा, 'उनके पास गरीब लोगों के लिए एक अच्छा अस्पताल चलाने के लिए पैसा था, लेकिन उन्होंने ऐसा कभी नहीं किया। उन्होंने कहा कि बिना इलाज उपलब्ध कराए हम पीड़ा को समाप्त करने के लिए प्रार्थना करेंगे।' प्रेगर कहते हैं कि पीड़ा मदर टेरेसा के काम का केवल कोई उप उत्पाद नहीं था, बल्कि यह उसका अभिन्न अंग था। ननों को निर्देश दिया गया था कि वह खुद को चाबुक से मारें और कांटों वाली चेन पहनें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed