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म्यांमारः विदेशी कंपनियों के खिलाफ बढ़ा जन आक्रोश, सुरक्षा खतरे में पड़ने का अंदेशा

Fri, 24 Dec 2021 02:03 PM IST
अजय सिंह वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: अजय सिंह Updated Fri, 24 Dec 2021 02:03 PM IST
सार

विश्लेषकों का कहना है कि एनयूजी की चेतावनी से न सिर्फ विदेशी कंपनियों की प्रतिष्ठा पर आंच आएगी, बल्कि म्यांमार में उनकी सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

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A new challenge foreign companies and Chambers of Commerce doing business in Myanmar
Myanmar - फोटो : soical media

विस्तार

म्यांमार में कारोबार कर रहीं विदेशी कंपनियों और चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के लिए एक नई चुनौती पैदा हो गई है। देश में सैनिक शासन विरोधी संगठनों की तरफ गठित नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट (एनयूजी) ने इन कंपनियों को चेतावनी दी है। विश्लेषकों का कहना है कि एनयूजी की चेतावनी से न सिर्फ विदेशी कंपनियों की प्रतिष्ठा पर आंच आएगी, बल्कि म्यांमार में उनकी सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
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इस साल एक फरवरी को सैनिक तख्ता पलट के बावजूद जिन देशों की कंपनीनियों ने म्यांमार में कारोबार जारी रखा, उनमें ऑस्ट्रेलिया, चीन, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड शामिल हैँ। एनयूजी और दूसरे आलोचकों का कहना है कि इन कंपनियों के इस व्यवहार से सैनिक शासकों को वैधता मिली है। साथ ही इससे सैनिक शासन विरोधी आंदोलन कमजोर हुआ है।
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अब एनयूजी ने विदेशी चैंबर्स ऑफ कॉर्मस को एक पत्र भेजा है। ये पत्र एनयूजी के योजना, वित्त, और निवेश मंत्री तिन तुन नायंग के दस्तखत से भेजा गया है। वेबसाइट एशिया टाइम्स के मुताबिक उसके इस पत्र की कॉपी है। पत्र में हाल में सैनिक शासन के निवेश एवं विदेश आर्थिक संबंध मंत्री आंग नायंग ऊ के साथ विदेशी कंपनियों के अधिकारियों की हुई बैठक की कड़ी आलोचना की गई है। इस बैठक का आयोजन यूनियन ऑफ म्यांमार फेडरेशन ऑफ चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की तरफ से किया गया था।
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तिन तुन नायंग ने अपने पत्र में लिखा है- ‘इस बैठक की खबर से मुझे निराशा हुई है। हम ऐसे सभी संपर्कों की निंदा करते हैं, जिनसे सैनिक शासन को थोड़ी भी वैधता और सम्मान मिलता हो।’ उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियों के सैनिक शासकों के साथ संपर्क से ये भ्रम पैदा होता है कि म्यांमार में सब कुछ सामान्य है। उन्होंने कहा- ‘यह देश के ऊपर हत्यारी पकड़ बनाए रखने में सैनिक शासन की सहायता करना है।’ तिन तुन नायंग ने एशिया टाइम्स के साथ बातचीत भी की। इसमें उन्होंने पूछा कि क्या ये कंपनियां हिटलर या पोल पोट की सरकारों के साथ भी बैठक करतीं?

विश्लेषकों का कहना है कि एनयूजी के खुल कर विदेशी कंपनियों का विरोध करने से अब देश में इन कंपनियों के खिलाफ माहौल बन सकता है। उन्होंने इस बात ध्यान दिलाया है कि सैनिक तख्ता पलट के तुरंत के बाद यंगून में कई चीनी फैक्टरियों में आग लगा दी गई थी। ऐसा इस धारणा के कारण हुआ था कि चीन सैनिक शासन का समर्थन कर रहा है। उसके बाद चीन ने सैनिक शासकों से कहा था कि वह म्यांमार में उस गैस पाइपलाइन की सुरक्षा के इंतजाम करे, जिसे चीन ने वहां बनाया है। ये पाइपलाइन 2,100 किलोमीटर लंबी है।


विश्लेषकों का कहना है कि सैनिक शासकों के साथ बैठक के बाद एनयूजी के सख्त रुख को देखते हुए अब कई कंपनियों को म्यांमार में निवेश करने की अपनी योजना पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। यह भी संभव है कि उन पर सैनिक शासन विरोधी समूहों के हमले हों। तिन तुन नायंग ने एशिया टाइम्स से बातचीत में ध्यान दिलाया कि यंगून में स्थित एक वियतनामी कंपनी के स्वामित्व वाले म्यांमार प्लाजा को देश में जन आक्रोश का सामना करना पड़ा है। ऐसा पिछले 25 नवंबर को एक विरोध प्रदर्शन पर प्लाजा के सुरक्षा गार्ड की कार्रवाई के बाद हुआ। 
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