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नाटो से दिक्कत: बातचीत से हल नहीं निकला, तो क्या अब रूस और अमेरिका के बीच होगा युद्ध?

Fri, 14 Jan 2022 03:28 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 14 Jan 2022 03:28 PM IST
सार

ताजा वार्ता नाकाम रहने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन में काम कर चुकीं अधिकारी एवलिन फार्कस ने कहा कि अब अमेरिका को रूस के खिलाफ युद्ध की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो अमेरिका के पास सैनिक हस्तक्षेप करने के अलावा कोई और चारा नहीं रह जाएगा...

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A former US Defense Ministry official has now warned of war after talks between Russia and NATO failed
रूस नाटो वार्ता - फोटो : Agency

विस्तार

रूस और अमेरिकी नेतृत्व वाले नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के बीच बातचीत विफल हो जाने के बाद दोनों पक्षों की भाषा बेहद सख्त हो गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी ने तो अब युद्ध की चेतावनी दे दी है। रूस ने पिछले 17 दिसंबर को तनाव घटाने के लिए अपना प्रस्ताव अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों को भेजा था। उसमें उसने अपनी ‘लक्ष्मण रेखाओं’ का जिक्र किया था। रूस ने कहा था कि अगर पश्चिमी देश इन रेखाओं का उल्लंघन न करने का वादा करें, तो दोनों पक्षों में तनाव घट सकता है। उनमें एक प्रमुख शर्त यह थी कि नाटो पूरब में अपना और विस्तार न करने की गारंटी दे। इसका व्यावहारिक मतलब यह है कि नाटो यूक्रेन और जॉर्जिया को खुद में शामिल करने की योजना छोड़ दे। ये दोनों देश पहले सोवियत गणराज्य थे।

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रूस को घेरने का आरोप

इस प्रस्ताव पर पहली वार्ता और अमेरिका और रूस के बीच सोमवार को जिनेवा में हुई थी। वहां गतिरोध बना रहा था। बुधवार को नाटो और रूस के बीच वार्ता हुई। लेकिन इसमें भी दोनों में कोई पक्ष अपना रुख नरम करने पर तैयार नहीं हुए। बैठक के बाद रूस के उप विदेश मंत्री एलेक्जेंडर ग्रुशको ने आरोप लगाया कि अमेरिकी नेतृत्व वाले नाटो ने फिर से रूस को घेरने की अपनी शीतयुद्धकालीन रणनीति अपना ली है।

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ग्रुशको ने कहा कि नाटो का व्यवहार रूस के लिए ऐसा खतरा पैदा कर रहा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस के साथ साझा सुरक्षा के लिए पहले जो भी उपाय मौजूद थे, नाटो ने उन्हें खत्म कर दिया है। इनमें दोनों पक्षों के बीच आतंकवाद और नशीली दवाओं से संघर्ष में सहयोग और हथियार नियंत्रण के लिए हुए समझौते शामिल हैं।

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वार्ता नाकाम रहने की पहले ही कर दी थी भविष्यवाणी

ताजा वार्ता नाकाम रहने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन में काम कर चुकीं अधिकारी एवलिन फार्कस ने कहा कि अब अमेरिका को रूस के खिलाफ युद्ध की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो अमेरिका के पास सैनिक हस्तक्षेप करने के अलावा कोई और चारा नहीं रह जाएगा। फार्कस 2012 से 2015 तक पेंटागन में उप सहायक सचिव के नाते रूस, यूक्रेन और यूरेशिया संबंधी मामलों की प्रभारी थीं। उन्होंने ये भविष्यवाणी पिछले हफ्ते ही कर दी थी कि रूस और पश्चिमी देशों के बीच होने वाली वार्ता नाकाम रहेगी।



बुधवार की वार्ता के बाद नाटो के महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने पत्रकारों से कहा कि दोनों पक्षों के बीच स्पष्ट और खुली वार्ता हुई। उस दौरान कई मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि चर्चा का खास केंद्र यूक्रेन को लेकर जारी तनाव ही रहा। स्टोल्टेनबर्ग ने कहा कि नाटो के विस्तार पर रोक लगाने का रूस को कोई अधिकार नहीं है। यह फैसला करना यूक्रेन और जॉर्जिया पर ही निर्भर करता है कि वे नाटो का सदस्य बनेंगे या नहीं। लेकिन रूस सरकार के सूत्रों के हवाले से रूसी मीडिया में छपी खबरों से यह साफ है कि रूस इन दोनों देशों के नाटो में शामिल होने को कभी स्वीकार नहीं करेगा।

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