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Who Report on Monkeypox: मंकीपॉक्स होता जा रहा खतरनाक, 20 दिन में 27 देशों में फैला वायरस, 780 लोग संक्रमित

Mon, 06 Jun 2022 01:13 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, जिनेवा
पीटीआई, जिनेवा Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 06 Jun 2022 01:13 PM IST
सार

मंकीपॉक्स वायरस अफ्रीका देशों में तेजी से फैल रहा है। हालांकि भारत में मंकीपॉक्स का कोई मामला सामने नहीं आया है लेकिन डब्ल्यूएचओ ने जो आंकड़े पेश किए हैं वे डराने वाले हैं।

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Who Says, 780 cases of monkeypox reported or identified as of June 2,
मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले - फोटो : WHO

विस्तार

पूरी दुनिया में मंकीपॉक्स वायरस का संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन( डब्ल्यूएचओ) ने एक ताजा आंकड़ा पेश किया है जो कि डराने वाला है। डब्ल्यूएचओ के आंकड़े के अनुसार बीते 20 दिनों में 27 देशों में इसका संक्रमण फैल चुका है। वहीं इसने अब तक 780 लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इस वायरस ने अब लोगों की जान भी लेने लगा है।  कांगो में इस साल जहां मंकीपॉक्स से नौ लोगों की मौत हो गई, वहीं नाइजीरिया में पहली मौत दर्ज की गई है।

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भारत सरकार ने भी जारी की थी गाइडलाइन
इस खतरनाक वायरस के बढ़ते खतरे के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी 31 मई को गाइडलाइन जारी की थी। बता दें कि भारत में अभी तक इस बीमारी का एक भी मामला सामने नहीं आया है। फिर भी भारत सरकार एहतियात बरत रही है। मंत्रालय ने गाइडलाइन में कहा है कि मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति की 21 दिनों तक निगरानी की जाएगी। 
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गाइडलाइन में ये भी कहा गया है कि संक्रामक अवधि के दौरान किसी रोगी या उनकी दूषित सामग्री के साथ अंतिम संपर्क में आने के बाद 21 दिनों की अवधि के लिए हर रोज निगरानी की जानी चाहिए। स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक, अगर किसी में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखते हैं तो लैब में टेस्टिंग के बाद ही मंकीपॉक्स के मामले को कंफर्म माना जाएगा। गाइडलाइन में ये भी कहा गया है कि मंकीपॉक्स के लिए पीसीआर या डीएनए टेस्टिंग ही मान्य होगी।
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मंकीपॉक्स संक्रमण के क्या कारण हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मंकीपॉक्स नामक वायरस के कारण यह संक्रमण होता है। यह वायरस ऑर्थोपॉक्सवायरस समूह से संबंधित है। इस समूह के अन्य सदस्य मनुष्यों में चेचक और काउपॉक्स जैसे संक्रमण का कारण बनते हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मंकीपॉक्स के एक से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण के मामले बहुत ही कम हैं। संक्रमित व्यक्ति के छींकने-खांसने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स, संक्रमित व्यक्ति की त्वचा के घावों या संक्रमित के निकट संपर्क में आने के कारण दूसरे लोगों में भी संक्रमण होने की आशंका रहती है।


मंकीपॉक्स का इलाज
चेचक उन्मूलन कार्यक्रम के दौरान उपयोग किए जाने वाले टीकों ने मंकीपॉक्स से भी सुरक्षा प्रदान की। नए टीके विकसित किए गए हैं जिनमें से एक को रोग की रोकथाम के लिए अनुमोदित किया गया है। वैश्विक स्वास्थ्य निकाय के अनुसार, चेचक के इलाज के लिए विकसित एक एंटीवायरल एजेंट को भी मंकीपॉक्स के इलाज के लिए लाइसेंस दिया गया है।

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