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बांग्लादेश: मीडियाकर्मी बदहाल, मौका मिले तो 65 फीसदी पत्रकार छोड़ देंगे ये काम

Fri, 10 Dec 2021 08:02 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 10 Dec 2021 08:02 PM IST
सार

सर्वे ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की बांग्लादेश शाखा ने किया। उसने अपनी रिपोर्ट ‘इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म इन बांग्लादेश: इंस्टीट्यूशनल चैलेंजे ऑफ मास मीडिया’ शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में महिला पत्रकारों की स्थिति ज्यादा खराब है। सर्वे के दौरान 85 फीसदी महिला पत्रकारों ने कहा कि दफ्तर में यौन उत्पीड़न की शिकायत करने पर उन्हें न्याय नहीं मिलता है...

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65 percent of Bangladeshi journalists want to leave journalism due to lack of working conditions
बांग्लादेश मीडिया इंडस्ट्री - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

बांग्लादेश में मीडिया का माहौल किस हद तक पत्रकारों के खिलाफ है, इसकी एक झलक अब देखने को मिली है। एक ताजा सर्वे से सामने आया है कि बांग्लादेश के 65 फीसदी पत्रकार कामकाज की अनुकूल स्थिति ना होने के कारण पत्रकारिता छोड़ना चाहते हैं। जो पत्रकार अपने पेशे से संतुष्ट नहीं हैं, उनमें ज्यादा संख्या उनकी है, जो रेडियो स्टेशनों या टीवी चैनलों में काम करते हैं।

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मीडिया घरानों में नहीं एचआर पॉलिसी

पत्रकारों की प्रमुख शिकायत यह है कि मीडिया घरानों के भीतर उनसे पेशेवर व्यवहार नहीं किया जाता। मीडिया संस्थानों के संचालन खराब ढंग से हता है। नतीजा है कि ज्यादातर मीडिया घरानों में न हो उचित एचआर पॉलिसी (ह्यूमन रिसोर्स नीति) है, न ही पेशेवर प्रबंधन है। इन वजहों से मीडिया सेक्टर का उचित विकास नहीं हो पाया है। सर्वे के दौरान इस तथ्य पर भी रोशनी पड़ी कि कोरोना महामारी के दौरान पिछले साल मार्च से लेकर अब तक बांग्लादेश में 1,600 मीडियाकर्मियों की जानें जा चुकी हैं।

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इन हालात के बीच ऐसे पत्रकारों की संख्या बढ़ती चली गई है, जिनके मुताबिक अगर उन्हें मौका मिले, तो वे पत्रकारिता या मीडिया नौकरी छोड़ कर कोई और पेशा अपना लेंगे। मीडियाकर्मियों की शिकायत यह भी है कि उनकी सैलरी का ढांचा अपर्याप्त है, नौकरी में स्थिरता नहीं है। इन वजहों से वे निम्न स्तर का जीवन जीने पर मजबूर बने रहते हैं।

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महिला पत्रकारों की स्थिति ज्यादा खराब

सर्वे ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की बांग्लादेश शाखा ने किया। उसने अपनी रिपोर्ट ‘इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म इन बांग्लादेश: इंस्टीट्यूशनल चैलेंजे ऑफ मास मीडिया’ शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में महिला पत्रकारों की स्थिति ज्यादा खराब है। सर्वे के दौरान 85 फीसदी महिला पत्रकारों ने कहा कि दफ्तर में यौन उत्पीड़न की शिकायत करने पर उन्हें न्याय नहीं मिलता है। ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की इस रिपोर्ट में बांग्लादेश में एक तीखी बहस छेड़ दी है। कई पर्यवेक्षकों ने इसके निष्कर्षों को देश के लोकतंत्र पर एक प्रतिकूल टिप्पणी बताया है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान 88 कार्टूनिस्टों और पत्रकारों को डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया।


एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में 45 प्राइवेट टीवी न्यूज चैनल हैं। उनके अलावा 28 एफएम रेडियो और 32 कम्युनिटी रेडियो हैं। 1,248 अखबार देश में हैं। इन सबके अलावा हजारों की संख्या में वेबसाइट हैं, जिनमें पत्रकार काम करते हैं। देश के 48 बड़े मीडिया संस्थानों का स्वामित्व 32 कारोबारी घरानों के हाथ में है।


पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि मीडिया की आजादी के लिहाज से बांग्लादेश हमेशा से एक समस्याग्रस्त देश रहा है। 2020 के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में उसे 152वें नंबर पर रखा गया था। इस इंडेक्स में कुल 180 देश शामिल किए गए थे। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि पिछले 12 साल के दौरान 12 पत्रकारों की हत्या की गई है। उन मामलों में एक भी व्यक्ति को सजा नहीं हुई है। ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कारोबारी घराने मीडिया संस्थान चला कर उनका इस्तेमाल अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।

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