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नेपाल में मिली 3800 वर्ष पुरानी देवी की प्रतिमा, देखने वालों का लगा तांंता
Thu, 27 Aug 2020 05:04 AM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 27 Aug 2020 05:04 AM IST
सार
जमीन के 300 मीटर नीचे पाई गईं सबसे प्राचीन मूर्तियां
प्रथम या द्वितीय ईसा पूर्व की हैं प्रतिमाएं
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नेपाल का झंडा (
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
नेपाल के धुलीखेल में पुरातत्वविदों को करीब 3800 वर्ष पुरानी किराट देवी की प्रतिमाएं मिली हैं। इन मूर्तियों को जमीन से करीब 300 मीटर नीचे खोदाई कर निकाला गया है। जानकारी के मुताबिक, यह मूर्ति नेपाल की सबसे प्राचीन मूर्तियों में से एक है। इन मूर्तियों के मिलने के बाद बड़ी संख्या में लोग इसे देखने आ रहे हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर भी इनकी तस्वीरें भी खूब साझा की जा रही हैं।
माइरिपब्लिका वेबसाइट के मुताबिक, स्थानीय पुरातत्वविद श्रीकृष्ण धीमाल ने बताया कि इन मूर्तियों को सबसे पहले शुक्रवार को एक निर्माण के दौरान बरामद किया गया था। हालांकि, स्थानीय लोगों अपनी आस्था दिखाते हुए इसे अपने घर ले जाना चाहा था।
लेकिन पुरातत्वविदों को इस बारे में जानकारी दे दी गई। पुरातत्वविदों ने बताया कि ये मूर्तियां प्रथम या द्वितीय ईसा पूर्व की हैं। मूर्तियों की खूबसूरती से प्रतीत होता है कि ये मूर्तियां किराट देवी की हैं। वहीं एक अन्य पुरातत्वविद ने इन मूर्तियों को आदिम काल का बताया है। उन्होंने कहा कि इसे देखकर लगता है कि ये दूसरी या तीसरे ईसा पूर्व की हैं। इस लिहाज से ये नेपाल की सबसे पुरानी मूर्तियों में से एक है।
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माइरिपब्लिका वेबसाइट के मुताबिक, स्थानीय पुरातत्वविद श्रीकृष्ण धीमाल ने बताया कि इन मूर्तियों को सबसे पहले शुक्रवार को एक निर्माण के दौरान बरामद किया गया था। हालांकि, स्थानीय लोगों अपनी आस्था दिखाते हुए इसे अपने घर ले जाना चाहा था।
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लेकिन पुरातत्वविदों को इस बारे में जानकारी दे दी गई। पुरातत्वविदों ने बताया कि ये मूर्तियां प्रथम या द्वितीय ईसा पूर्व की हैं। मूर्तियों की खूबसूरती से प्रतीत होता है कि ये मूर्तियां किराट देवी की हैं। वहीं एक अन्य पुरातत्वविद ने इन मूर्तियों को आदिम काल का बताया है। उन्होंने कहा कि इसे देखकर लगता है कि ये दूसरी या तीसरे ईसा पूर्व की हैं। इस लिहाज से ये नेपाल की सबसे पुरानी मूर्तियों में से एक है।
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