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काबुल: तालिबान-अमेरिका समझौते के बाद रैली में गोलीबारी, 32 की मौत
Sat, 07 Mar 2020 05:04 AM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 07 Mar 2020 05:04 AM IST
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काबुल में अशांति जारी (File Photo)
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अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के पश्चिमी हिस्से में शुक्रवार को एक राजनीतिक रैली के दौरान हुई गोलीबारी में कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई। अमेरिका और तालिबान के बीच हुए समझौते के बाद यह सबसे बड़ा हमला है।
इस हमले ने अफगानिस्तान की राजधानी के बेहद कड़ी सुरक्षा वाले इलाके में सुरक्षा की कमी को उजागर किया है। ये हमला तब हुआ है जब 29 फरवरी को अमेरिका और तालिबान के बीच हुए समझौते के मुताबिक 14 महीनों के अंदर विदेशी बलों की देश से वापसी होनी है।
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता नसरत रहीमी ने कहा कि मृतकों में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं और इसके अलावा 29 अन्य लोग जख्मी हैं। उन्होंने कहा कि अफगान विशेष बल हमलावरों के खिलाफ अभियान को अंजाम दे रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों में बदलाव होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी निजामुद्दीन जलील ने मृतकों की संख्या थोड़ा बढ़ाते हुए कहा कि 32 लोग मारे गए हैं जबकि 30 अन्य घायल हैं।
तालिबान ने तत्काल हमले की जिम्मेदारी से इनकार किया है। हमला हाजरा जातीय समुदाय से आने वाले राजनेता अब्दुल अली माजारी की स्मृति में आयोजित एक समारोह पर किया गया। इस समुदाय के अधिकांश लोग शिया हैं।
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इस हमले ने अफगानिस्तान की राजधानी के बेहद कड़ी सुरक्षा वाले इलाके में सुरक्षा की कमी को उजागर किया है। ये हमला तब हुआ है जब 29 फरवरी को अमेरिका और तालिबान के बीच हुए समझौते के मुताबिक 14 महीनों के अंदर विदेशी बलों की देश से वापसी होनी है।
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गृह मंत्रालय के प्रवक्ता नसरत रहीमी ने कहा कि मृतकों में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं और इसके अलावा 29 अन्य लोग जख्मी हैं। उन्होंने कहा कि अफगान विशेष बल हमलावरों के खिलाफ अभियान को अंजाम दे रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों में बदलाव होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी निजामुद्दीन जलील ने मृतकों की संख्या थोड़ा बढ़ाते हुए कहा कि 32 लोग मारे गए हैं जबकि 30 अन्य घायल हैं।
तालिबान ने तत्काल हमले की जिम्मेदारी से इनकार किया है। हमला हाजरा जातीय समुदाय से आने वाले राजनेता अब्दुल अली माजारी की स्मृति में आयोजित एक समारोह पर किया गया। इस समुदाय के अधिकांश लोग शिया हैं।