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मुजफ्फरनगर दंगे पर सहाय आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश

Mon, 07 Mar 2016 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 07 Mar 2016 09:23 AM IST
सार

  • मुजफ्फरनगर दंगे पर सहाय आयोग की रिपोर्ट 
  • घटना के बाद सरकार के फैसलों पर ही अंगुली उठाई
  •  मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आयोग की रिपोर्ट रविवार को विधानसभा में रखा।

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sahai committe give report of muzzafarnagar riots
दंगे - फोटो : pti

विस्तार

मुजफ्फरनगर दंगे की जांच के लिए बने जस्टिस विष्णु सहाय आयोग ने पूरे मामले में शुरुआती घटना के बाद सरकार के फैसलों पर ही अंगुली उठाई है। 

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आयोग ने यहां तक कह दिया है कि सरकार के एक फैसले से तो बहुसंख्यक समाज खास तौर पर जाट समुदाय में तीखी प्रतिक्रिया हुई। 

उनमें यह संदेश भी गया कि सरकार मुस्लिमों की पक्षधर है और उनके प्रभाव में काम हो रहा है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आयोग की रिपोर्ट रविवार को विधानसभा में रखा।
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आयोग ने अपनी रिपोर्ट में उन 14 वजहों की चर्चा की है, जिनसे दंगे की स्थिति बद से बदतर होती गई। साफ तौर पर कहा गया है कि दंगे के बाद डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी मंजिल सैनी के तबादलों से इस मामले में प्रभावित जाट समुदाय में गलत संदेश गया और आक्रोश भड़का। 
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आयोग ने इसे भी बेहद गंभीर व दंगे भड़कने की मुख्य वजह बताया। तत्कालीन डीएम कौशल राज शर्मा को लेकर आयोग ने कहा कि उनके 30 अगस्त 2013 को कादिर राणा व अन्य व्यक्तियों से ज्ञापन लिए जाने की वजह से हिंदू आक्रोशित हुए। 

यही आक्रोश दंगों का मुख्य कारण बना। आयोग ने यह भी कहा है कि उसका मानना है कि जिन परिस्थितियों में शर्मा ने ज्ञापन लिया गया, उसमें उनके पास और कोई विकल्प नहीं था। 

अगर वह ज्ञापन न लेते तो उस दिन मुजफ्फरनगर में कुछ भी हो सकता था। ऐसे में आयोग ने शर्मा की प्रशंसा करते हुए उन्हें ज्ञापन लेने के लिए दोषी नहीं माना गया है। 

दंगे के लिए 4 अफसरों को उत्तरदायी ठहराया

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दंगे - फोटो : pti

•आयोग ने पूरे मामले में तत्कालीन गृह सचिव आरएम श्रीवास्तव, तत्कालीन सीओ जगतराम जोशी, वहां तैनात जिला मजिस्ट्रेट कौशल राज शर्मा, मुजफ्फरनगर के तत्कालीन एसएसपी सुभाषचंद्र दुबे को दंगों के लिए उत्तरदायी बताया है। 

लेकिन यह भी कहा है कि श्रीवास्तव ने मंजिल सैनी का तबादला शासन के आदेश पर किया था, जबकि जगतराम ने प्रभारी निरीक्षक जानसठ शैलेंद्र कुमार को हत्या के आरोप में पकड़े गए लोगों को दूरभाष पर छोड़ने का निर्देश दिया था। लिहाजा उन्हें सीधे तौर पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

आठ संदिग्धों के छोड़ने से भड़के लोग

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दंगे - फोटो : pti

आयोग ने कहा कि सचिन व गौरव की हत्या में निरुद्ध आठ संदिग्धों को छोड़ दिए जाने (आयोग के अनुसार आठ के बजाय 14 को छोड़ा गया जो एफआईआर में नामजद नहीं थे) के कारण हिंदुओं (खासतौर पर जाट समुदाय) में आक्रोश पनपा और सरकार के मुस्लिम पक्षधर होने का संदेश गया। इसके बाद शहनवाज की हत्या में सचिन व गौरव के परिवार के लोगों को नामजद किए जाने से भी लोग भड़के।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 27 अगस्त 2013 को मुजफ्फरनगर के कवाल कस्बे में हुई घटना के कुछ माह पहले से ही पश्चिमी यूपी (विशेषकर मुजफ्फरनगर व शामली जिले) में घटित कतिपय घटनाओं के कारण हिंदू व मुस्लिम समुदायों के बीच सांप्रदायिक मतभेद प्रखर हो चुके थे। 

कवाल में सचिन व गौरव नाम के दो युवकों और फिर शहनवाज नाम के युवक की हत्या के साथ ही वहां हिंदू व मुस्लिम के ध्रुवीकरण की वजह से दंगे हुए।

आयोग ने दंगे के ये कारण गिनाए

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दंगे - फोटो : pti

•तालिबान के एक साल पुराने वीडियो (जिसमें कुछ लड़कों की पिटाई हो रही है) को सचिव व गौरव की हत्या से जोड़ कर सोशल मीडिया (वाट्सएप व एसएमएस) के जरिये प्रसारित किया गया।

•मुजफ्फरनगर के शहीद चौक पर कादिर राणा व अन्य लोगों ने भाषण दिया। फिर इस भाषण का ज्ञापन डीएम व एसएसपी द्वारा लिया जाना।

•हिंदू व मुस्लिम दोनों ही पक्षों द्वारा भड़काऊ भाषण दिया जाना।

•नगला मंदौर में आयोजित पंचायत को रोकने के लिए प्रशासनिक विफलता,

•नगला मंदौर में आयोजित पंचायत में भाग लेने जा रहे हिंदुओं पर बांसीकलां में हमला।

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