जितेंद्र पपनै। रामनगर (नैनीताल)। कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन किया हुआ है। दस दिनों से घरों में कैद बड़े बुजुर्ग, बच्चों व घर की महिलाओं ने अब खुद को नए ढर्रे में संवारा शुरू कर दिया है। कभी पुराने खेलों को भूल चुके लोग अब समय बिताने के लिए अपने बच्चों को पुराने खेल सिखा भी रहे है और खेल भी रहे है। पुराने खेलों में सिपाई मार घोड़ा, तू मुझसे क्यों नहीं बोली, पाए टिप्पा, खो खो गुटटे, आंख मिचौली, चिड़िया उड़, कबूतर उड़, सपोडिया सहित अन्य खेल कभी बच्चों में काफी लोकप्रिय हुआ करते थे, लेकिन नये जमाने के साथ ये खेल लुप्त हो चुके है। नये जमाने के बच्चे भी मोबाइलों पर खेल खेलते है और वीडियो आदि में अपना दिन गुजारते है। ऐसे में लॉकडाउन के चलते लोग अपने घरों में कैद है और समय बिताना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में अब लोग एक-दूसरे से छतों के माध्यम से मिल रहे है और पुराने खेल खेलकर समय बिता रहे है। बच्चो को पहले खेलो के नियम बताए जा रहे है और उन्हें हर तरकीबत के बारे में बताया जा रहा है। पुराने खेल खेलने में बच्चों को ज्यादा मजा आ रहा है, जबकि परिवार के बुजुर्ग सदस्य उन्हें अपने जमाने के किस्से भी सुना रहे है। बच्चे भी इन खेलों को सीख कर आसपास के बच्चों के साथ छतो में इन खेलो को खेलना शुरू कर दिया और सुबह व शाम को छतों में यह नजारा देखने को मिले रहे है। अब तो बच्चों ने मोबाइल को फेंक दिया और इन खेलों के माध्यम से अपनी शारीरिक स्थिति को सुधार रहे है। इससे उनके परिजन भी खुश है। इसके साथ ही पतंगबाजी, लूडो, कैमरे, शतरंज का भी लोग लुत्फ ले रहे है। लॉकडाउन ने पुराने पंरपारिक खेलो की रंगत जरूर लौट आयी है। इसके साथ ही स्वास्थ्य लाभ के लिए लोग छतों पर वॉक कर रहे है।