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Kotdwar News: गांव बखरोटी में दिखे तीन बाघ, ग्रामीणों में दहशत
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कोटद्वार/धुमाकोट। कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) से सटे नैनीडांडा ब्लॉक के बाघ प्रभावित बखरोटी गांव में मंगलवार रात को तीन बाघ देखे गए, जिससे ग्रामीणों में दहशत बढ़ गई है। ग्रामीण समूह में आवाजाही कर रहे हैं। वन विभाग की टीम क्षेत्र में डटी हुई है और लगातार गश्त कर रही हैं।
ग्राम पंचायत प्रधान सुरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि मंगलवार रात को करीब नौ बजे ग्रामीण बलवीर सिंह के घर के पास तीन बाघ देखे गए। उन्होंने आसपास के ग्रामीणों को फोन पर सूचना दी। जिस पर ग्रामीणों ने शोर मचाकर बाघों को वहां से भगाया। कहा कि क्षेत्र में बाघों की धमक से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। महिलाएं जहां जंगल और खेतों में समूह में आवाजाही कर रही हैं, वहीं अभिभावक बच्चों को स्कूल छोड़ने व लेने के लिए खुद ही जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि शंकरपुर में भी रातभर बाघ के गुर्राने की आवाजें सुनाई दे रही हैं।
बाघ के आतंक के कारण शंकरपुर पुलिस चौकी में भी पुलिसकर्मी सुरक्षा की दृष्टि से रात को गेट बंद कर दे रहे हैं। सामान्य दिनों में जहां पुलिसकर्मी व ग्रामीण सुबह 5:30 बजे टहलने के लिए निकलते थे, वहीं, अब उनकी सुबह 6:30 बजे के बाद ही दिनचर्या शुरू हो रही है। उधर, जमूण गांव निवासी अजय भदोला ने बताया कि गांव में बाघ के हमले के बाद आसपास के सभी गांवों में दहशत बनी हुई है। वन विभाग की ओर से हमलावर बाघ को पकड़ने के लिए गांव में पिंजरा भी नहीं लगाया गया है। अभी तक उसे नरभक्षी भी घोषित नहीं किया गया है।
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ग्राम पंचायत प्रधान सुरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि मंगलवार रात को करीब नौ बजे ग्रामीण बलवीर सिंह के घर के पास तीन बाघ देखे गए। उन्होंने आसपास के ग्रामीणों को फोन पर सूचना दी। जिस पर ग्रामीणों ने शोर मचाकर बाघों को वहां से भगाया। कहा कि क्षेत्र में बाघों की धमक से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। महिलाएं जहां जंगल और खेतों में समूह में आवाजाही कर रही हैं, वहीं अभिभावक बच्चों को स्कूल छोड़ने व लेने के लिए खुद ही जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि शंकरपुर में भी रातभर बाघ के गुर्राने की आवाजें सुनाई दे रही हैं।
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बाघ के आतंक के कारण शंकरपुर पुलिस चौकी में भी पुलिसकर्मी सुरक्षा की दृष्टि से रात को गेट बंद कर दे रहे हैं। सामान्य दिनों में जहां पुलिसकर्मी व ग्रामीण सुबह 5:30 बजे टहलने के लिए निकलते थे, वहीं, अब उनकी सुबह 6:30 बजे के बाद ही दिनचर्या शुरू हो रही है। उधर, जमूण गांव निवासी अजय भदोला ने बताया कि गांव में बाघ के हमले के बाद आसपास के सभी गांवों में दहशत बनी हुई है। वन विभाग की ओर से हमलावर बाघ को पकड़ने के लिए गांव में पिंजरा भी नहीं लगाया गया है। अभी तक उसे नरभक्षी भी घोषित नहीं किया गया है।
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