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Kotdwar News: उद्यमिता विकास के तहत छात्रों को दी हस्तशिल्प कला की जानकारी
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किशनपुर (कण्वघाटी)। राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी में आयोजित उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तीसरे दिन छात्र-छात्राओं को स्वरोजगार के लिए हस्तशिल्प कला के जानकारी दी गई।
कार्यशाला के तीसरे दिन का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य अरविंद सिंह ने मां सरस्वती के सम्मुख द्वीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम के शुरू में डॉ. उषा सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए रिसोर्स पर्सन रश्मि सिंह का परिचय दिया। उद्यमिता केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. विनय देवलाल ने हस्तशिल्प प्रशिक्षण द्वारा कौशल विकास करने की अपील की। कहा कि हस्तशिल्प द्वारा न केवल रोजगार को ही बढ़ाया जा सकता है, वरन यह भारतीय लोक कलाओं को जीवंत रखने का माध्यम भी है। प्रथम एवं द्वितीय सत्र में रिसोर्स पर्सन रश्मि सिंह ने कौशल आधारित प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार की अनेक संभावनाओं के विस्तार पर प्रकाश डाला। कहा कि उत्तराखंड में हस्तशिल्प कला के क्षेत्र में अनंत संभावनाएं हैं, जिसे प्रशिक्षण व सीमित संसाधनों द्वारा प्रारंभ किया जा सकता है। तृतीय एवं चतुर्थ सेशन में बांस द्वारा निर्मित दैनिक उपयोग व महिलाओं के लिए हस्तशिल्प के बने आभूषण बनाने का प्रशिक्षण दिया, जिसमें लैंप, टोकरी, फैब्रिक ज्वेलरी , ट्रे , बांस से निर्मित मंदिर आदि बनाना और उसे ऐपण कला से सुसज्जित करने का प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर नोडल अधिकारी डॉ. विनय देवलाल, प्राचार्य प्रो. अरविंद सिंह आदि मौजूद रहे।
कार्यशाला के तीसरे दिन का उद्घाटन महाविद्यालय के प्राचार्य अरविंद सिंह ने मां सरस्वती के सम्मुख द्वीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम के शुरू में डॉ. उषा सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए रिसोर्स पर्सन रश्मि सिंह का परिचय दिया। उद्यमिता केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. विनय देवलाल ने हस्तशिल्प प्रशिक्षण द्वारा कौशल विकास करने की अपील की। कहा कि हस्तशिल्प द्वारा न केवल रोजगार को ही बढ़ाया जा सकता है, वरन यह भारतीय लोक कलाओं को जीवंत रखने का माध्यम भी है। प्रथम एवं द्वितीय सत्र में रिसोर्स पर्सन रश्मि सिंह ने कौशल आधारित प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार की अनेक संभावनाओं के विस्तार पर प्रकाश डाला। कहा कि उत्तराखंड में हस्तशिल्प कला के क्षेत्र में अनंत संभावनाएं हैं, जिसे प्रशिक्षण व सीमित संसाधनों द्वारा प्रारंभ किया जा सकता है। तृतीय एवं चतुर्थ सेशन में बांस द्वारा निर्मित दैनिक उपयोग व महिलाओं के लिए हस्तशिल्प के बने आभूषण बनाने का प्रशिक्षण दिया, जिसमें लैंप, टोकरी, फैब्रिक ज्वेलरी , ट्रे , बांस से निर्मित मंदिर आदि बनाना और उसे ऐपण कला से सुसज्जित करने का प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर नोडल अधिकारी डॉ. विनय देवलाल, प्राचार्य प्रो. अरविंद सिंह आदि मौजूद रहे।
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