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Kotdwar News: हाथियों ने पश्चिमी झंडीचौड़ में रौंदी गेहूं की फसल, वन सीमा से सटे इलाकों में आतंक

Wed, 12 Mar 2025 10:53 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 12 Mar 2025 10:53 PM IST
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Elephants trampled wheat crops in western Jhandichaur, terror in areas adjoining the forest border

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कोटद्वार। भाबर क्षेत्र के अंतर्गत वार्ड नंबर-37 पश्चिमी झंडीचौड़ में पिछले कई दिनों से हाथी का आतंक व्याप्त है। हाथी ने क्षेत्र के कई किसानों की गेहूं की फसल रौंद डाली है। स्थिति यह है कि काश्तकार रातभर जागकर अपनी फसलों की सुरक्षा करने को मजबूर हैं। काश्तकारों ने उन्हें फसलों के नुकसान का मुआवजा देने, पटाखे, गांधी बंदूक, टॉर्च उपलब्ध कराने, वन कर्मियों की रात्रि गश्त बढ़ाने की मांग की है।

क्षेत्रीय पार्षद सुखपाल शाह, पार्षद रजनीश बेबनी, राजेंद्र सिंह बिष्ट, जगदीश बहुखंडी, विवेक शाह, पूर्व पार्षद अमित नेगी ने बताया कि इन दिनों गेहूं की फसल खाने के लिए वन्यजीवों की धमक बनी हुई है। शाम ढलते ही हाथी जंगल से सटे इलाकों में खेतीबाड़ी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हाथियों की धमक से क्षेत्र में जानमाल का खतरा भी बना हुआ है।
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मंगलवार रात को हाथी ने स्थानीय काश्तकार शोभा देवी और यशवंत सिंह के खेत में खड़ी गेहूं की फसल रौंद डाली। झंडीचौड़ क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के जंगलों से हाथी समेत अन्य वन्यजीव खेती रौंद रहे हैं। काश्तकार क्षेत्र में लंबे समय से हाथी सुरक्षा दीवार बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
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कहा कि वर्ष 2002 में लगाई गई सोलर फेंसिंग मरम्मत व देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त हो चुकी है। वन विभाग ने क्षतिग्रस्त तारबाड़ की मरम्मत तक नहीं कराई। काश्तकारों ने वर्तमान विधायक व विधानसभा अध्यक्ष को दीवार निर्माण के लिए प्रस्ताव बना कर दिया है। तीन माह पहले ग्रामीणों का एक प्रतिनिधि मंडल डीएफओ से मिला था, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कहा कि यह क्षेत्र जिला बिजनौर के जंगल के साथ ही लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग और कोटद्वार रेंज से सटा हुआ है। उन्होंने शासन-प्रशासन से क्षेत्र में हाथी सुरक्षा दीवार बनाने, काश्तकारों को उनकी फसलों के नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।
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