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Kotdwar News: आमसौड़ में हाथियों का आतंक, चारा पत्ती के पेड़ किए तहस-नहस
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कोटद्वार। दुगड्डा ब्लॉक के आमसौड़ गांव में इन दिनों हाथियों का आतंक है। हाथियों के झुंड ने ग्रामीणों के चारापत्ती के पेड़ों व खेतों में पशुओं के लिए उगाई गई घास को तहस-नहस कर दिया है। सूचना पर दुगड्डा रेंज के वन कर्मियों ने गांव पहुंचकर मौका मुआयना किया। ग्रामीणों ने वन विभाग से उन्हें पटाखे उपलब्ध कराने और क्षेत्र में वन कर्मियों की गश्त बढ़ाने की मांग की है।
आमसौड़ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता इंद्रमोहन जुयाल ने बताया कि पिछले चार दिन से 8 से 10 हाथियों का झुंड गांव में धमक रहा है। उन्होंने बताया कि शनिवार रात दस बजे के करीब हाथियों का झुंड नदी के रास्ते गांव में धमक गया। हाथियों ने उनके साथ ही ग्रामीण चंद्रमोहन और अनितेश के खेतों में घुसकर वहां रोहणी, ग्वीराला, तिमला, घुगुसू आदि चारा पत्ती के पेड़ों को तहस-नहस कर डाला।
हाथियों के झुंड ने खेतों में उगी नेफियर और गिन्नी घास को भी रौंद डाला। कहा कि हाथी चारा पत्ती व सीजनल घास को लगातार रौंद रहा है। ऐसे में शीतकाल में उनके समक्ष पशु चारे की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। उन्होंने वन विभाग से हाथियों को भगाने के लिए पटाखे उपलब्ध कराने और क्षेत्र में वनकर्मियों की गश्त बढ़ाने की मांग की है। उधर, दुगड्डा के रेंजर उमेश कुमार जोशी ने कहा कि मामला संज्ञान में है। क्षेत्र में वन कर्मियों की गश्त बढ़ाने के साथ ही ग्रामीणों को पटाखे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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आमसौड़ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता इंद्रमोहन जुयाल ने बताया कि पिछले चार दिन से 8 से 10 हाथियों का झुंड गांव में धमक रहा है। उन्होंने बताया कि शनिवार रात दस बजे के करीब हाथियों का झुंड नदी के रास्ते गांव में धमक गया। हाथियों ने उनके साथ ही ग्रामीण चंद्रमोहन और अनितेश के खेतों में घुसकर वहां रोहणी, ग्वीराला, तिमला, घुगुसू आदि चारा पत्ती के पेड़ों को तहस-नहस कर डाला।
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हाथियों के झुंड ने खेतों में उगी नेफियर और गिन्नी घास को भी रौंद डाला। कहा कि हाथी चारा पत्ती व सीजनल घास को लगातार रौंद रहा है। ऐसे में शीतकाल में उनके समक्ष पशु चारे की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। उन्होंने वन विभाग से हाथियों को भगाने के लिए पटाखे उपलब्ध कराने और क्षेत्र में वनकर्मियों की गश्त बढ़ाने की मांग की है। उधर, दुगड्डा के रेंजर उमेश कुमार जोशी ने कहा कि मामला संज्ञान में है। क्षेत्र में वन कर्मियों की गश्त बढ़ाने के साथ ही ग्रामीणों को पटाखे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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