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सावधानी : पटाखों के धुएं से बचें, पहनें चश्मा और मास्क
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कोटद्वार। क्षेत्र में दीपावली की धूम शुरू हो गई है। मिष्ठान और सजावट की दुकानों के अलावा पटाखों की दुकानों के लगने का भी लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं, विशेषज्ञ कहते हैं आतिशबाजी करते समय समझदारी के साथ चश्मे और मास्क का प्रयोग करेंगे, तो दीपावली की खुशियां बढ़ जाएंगी।
कोरोना महामारी में कोविड वायरस से बचाव के लिए लोगों ने बड़ी समझदारी और जिम्मेदारी से मास्क का प्रयोग किया था। इस समय कोरोना का तो खतरा नहीं है, फिर भी बाजार में मास्क की बिक्री हो रही है। दुकानदार सुरेश कुमार बताते हैं कि आम दिनों में भी अगर हम मास्क का प्रयोग करते तो दूषित हवा के प्रभाव से बचे रह सकते हैं। मामूली दरों पर ही धोने के बाद पुन: उपयोग वाले मास्क उनके पास हर समय उपलब्ध रहते हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव पाल बताते हैं कि दीपावली पर्व बहुत नजदीक है। आतिशबाजी के दौरान चरखी, अनार आदि कुछ पटाखों से काफी ज्यादा मात्रा धुआं डिस्चार्ज होता है। यह आंखों के संपर्क में आने पर आंखों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंचकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। जरूरी है कि आतिशबाजी करते समय इस बात का ध्यान रखें कि ज्यादा विषैला धुआं डिस्चार्ज करने वाले पटाखों को जलाने से बचें और आतिशबाजी के समय चश्मे और मास्क का प्रयोग करें।
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कोरोना महामारी में कोविड वायरस से बचाव के लिए लोगों ने बड़ी समझदारी और जिम्मेदारी से मास्क का प्रयोग किया था। इस समय कोरोना का तो खतरा नहीं है, फिर भी बाजार में मास्क की बिक्री हो रही है। दुकानदार सुरेश कुमार बताते हैं कि आम दिनों में भी अगर हम मास्क का प्रयोग करते तो दूषित हवा के प्रभाव से बचे रह सकते हैं। मामूली दरों पर ही धोने के बाद पुन: उपयोग वाले मास्क उनके पास हर समय उपलब्ध रहते हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव पाल बताते हैं कि दीपावली पर्व बहुत नजदीक है। आतिशबाजी के दौरान चरखी, अनार आदि कुछ पटाखों से काफी ज्यादा मात्रा धुआं डिस्चार्ज होता है। यह आंखों के संपर्क में आने पर आंखों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंचकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। जरूरी है कि आतिशबाजी करते समय इस बात का ध्यान रखें कि ज्यादा विषैला धुआं डिस्चार्ज करने वाले पटाखों को जलाने से बचें और आतिशबाजी के समय चश्मे और मास्क का प्रयोग करें।
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