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थलनदी, डाउामंडी, मवाकोट और विलखेत में गिंदी कौथिग की धूम

Tue, 14 Jan 2020 10:15 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jan 2020 10:15 PM IST
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Area painted in the color of ball fair
यमकेश्वर के थलनदी गेंद मेले में वर्ष 2019 में उमड़ी भीड़ का दृश्य (फाइल फोटो)। - फोटो : KOTDWAR
पौड़ी गढ़वाल के डाडामंडी, थलनदी, कोटद्वार भाबर का मवाकोट और बिलखेत क्षेत्र मकर संक्रांति पर होने वाले गेंद मेले (गिंदी कौथिग) के रंग में डूबा हुआ है। बुधवार को गिंदी कौथिग पर गिंदी (एक खास किस्म की गेंद) खेली जाएगी।
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गिंदी कौथिग थलनदी, डाडामंडी, मवाकोट, देवीखेत, दालमीखेत, और बिलखेत के सांगुड़ा मंदिर समेत कई गांवों में होता है, लेकिन थलनदी और डाडामंडी का मेला प्रसिद्ध है।
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गेंद बकरे की खाल से बनाई जाती है, जिसका वजन करीब 20 किलो होता है। इसके चारों तरफ एक-एक कंगन मजबूती से लगे होते हैं। दोनों पट्टियों के लोग निर्धारित स्थान पर ढोल-दमाऊं और नगाड़े बजाते हुए ध्वज लेकर एकत्र होते हैं। इससे पूर्व पांडव नृत्य भी होता है। जिस पक्ष के लोग गेंद बनवाकर लाए होते हैं, वे उसे हवा में उछालते हैं। गेंद को पकड़ने के लिए दोनों पक्ष के लोग उस पर झपटते हैं और बाद में जिस पक्ष के पास गेंद जाती है वह जीत जाता है। थलनदी में जहां अजमीर और उदयपुर पट्टियों के बीच गेंद खेली जाती है, वहीं डाडामंडी में लंगूर और भटपुड़ी पट्टियों के बीच गेंद खेली जाती है।
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महाभारत काल से जुड़ा है थलनदी गेंद मेले का इतिहास
यमकेश्वर। थलनदी गेंद मेले का संबंध महाभारत काल से माना जाता हैं। कहा जाता है कि पांडवों ने अज्ञातवास का कुछ समय महाबगढ़ी में बिताया था। इसी दौरान कौरव सेना ने उन्हें थलनदी के किनारे देख लिया और दोनों के बीच युद्ध हुआ। कुछ लोगों की यह मान्यता है कि अजमीर पट्टी के नाली गांव के जमींदार की गिंदोरी नाम की लड़की का विवाह उदयपुर पट्टी के कस्याली गांव में हुआ था। पारिवारिक विवाद होने पर गिंदोरी घर छोड़कर थलनदी आ गई। नाली गांव के लोगों को जब पता चला कि गिंदोरी ससुराल छोड़कर आ रही है, तो वे उसे ले जाने लगे, जबकि कस्याली गांव के लोग उसे वापस ससुराल ले जाने का प्रयास करने लगे। दोनों गांव के लोगों के बीच संघर्ष में गिंदोरी की मौत हो गई। तब से थलनदी में दोनों पट्टियों में गेंद के लिए संघर्ष होता है।
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