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Kotdwar News: लैंटाना के बाद अब पिरुल बना महिलाओं की आर्थिकी का जरिया

Sun, 27 Apr 2025 10:20 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 27 Apr 2025 10:20 PM IST
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After Lantana, now Pirul has become a source of economic growth for women
कोटद्वार। नैनीडांडा ब्लॉक के अंतर्गत पिरुल ग्रामीण महिलाओं की आजीविका का साधन बन रहा है। चीड़ बाहुल्य क्षेत्र नैनीडांडा ब्लॉक में 60 स्वयं सहायता समूह की करीब 300 महिलाएं पिरुल का संग्रहण कर रही हैं। इससे पर्वतीय क्षेत्र में वनाग्नि की घटनाओं पर अंकुश लगेगा और महिलाओं की आर्थिकी भी बढ़ेगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत नई पहल स्वायत सहकारी समिति उम्टा की ओर से हल्दूखाल में बायोमास प्रोजेक्ट के माध्यम से पिरुल के बंडल तैयार कर उन्हें जसपुर स्थित कोयला बनाने वाली कंपनी को बेचा जा रहा है।
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प्रोजेक्ट के तहत 4.5 लाख रुपये की लागत से चिपर मशीन खरीदी गई है, जो लैंटाना का बुरादा तैयार करती है। 16 लाख रुपये की लागत से ब्रेलर मशीन खरीदी गई है, जो पिरुल के बंडल तैयार करती है। मशीन के माध्यम से एक घंटे में पिरुल के 150 बंडल तैयार हो रहे हैं। नैनीडांडा ब्लॉक के अलावा थलीसैंण, पोखड़ा, दुगड्डा व बीरोंखाल ब्लॉक से भी पिरुल का संग्रहण किया जा रहा है। रीप परियोजना के एग्रीकल्चर एक्सपर्ट साहिल हुसैन, अखिलेश बडोनी, ब्लॉक मिशन मैनेजर विजय गौड़, जिला परियोजना प्रबंधक कुलदीप बिष्ट और प्रधान संगठन के अध्यक्ष देवेंद्र रावत इस कार्य में महिला स्वयं सहायता समूहों की मदद कर रहे हैं।
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स्वयं सहायता समूह की महिलाओं संगीता रावत, पुष्पा देवी, ज्योति शर्मा, नीलम देवी, प्रीति शर्मा आदि ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है। पिरूल से कोयला बनाने के लिए हर क्षेत्र को प्रेरित करने की जरूरत है। इससे वनाग्नि से मुक्ति मिलने के साथ ही ग्रामीणों की आर्थिकी भी बढे़गी।
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यह प्रोजेक्ट जिलाधिकारी पौड़ी डॉ. आशीष कुमार चौहान व मुख्य विकास अधिकारी पौड़ी जीसी गुणवंत के दिशा निर्देशन में संचालित किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा पिरुल एकत्र करने के साथ ही लोगों को वनाग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।



- प्रमोद पांडे, खंड विकास अधिकारी नैनीडांडा।
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