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इंडिया टू यूएसए, योगा इज सेम
hridwar uttrakhanda india
Updated Wed, 09 Mar 2016 12:49 AM IST
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yoga mahakumbh
- फोटो : अमर उजाला
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हरिद्वार। हरिद्वार में मंगलवार से शुरू हुए योग महाकुंभ में विभिन्न देशों के साधक भाग ले रहे हैं। इस दौरान अमर उजाला ने कई विदेशी साधकों से बातचीत की कि भारतीय संस्कृति गंगा और योग के बारे क्या सोचते हैं। यें सभी साधक योग को लेकर भारत में सकारात्मक माहौल से काफी प्रभावित नजर आए।
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यूएसए में लीला योगा सेंटर का संचालन करने वाली एरिका कोपमैन योग को आपस में समन्वय बनाने का सशक्त माध्यम बताती है। उन्होंने कहा कि भारत से लेकर अमेरिका तक योग एक ही है। कहीं, कोई भेद नहीं है।
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उन्होंने कहा कि योग आंतरिक ऊर्जा, चेतना को जागृत करता है। योग महाकुंभ के आयोजन को सराहा वहीं परमार्थ निकेतन ऋषिकेश में लंबे अरसे से रहकर अपनी सेवाएं दे रही विदेशी मूल की साधवी आदित्यानंद ने कहा कि परमार्थ निकेतन में चल रहा योग महोत्सव और हरिद्वार का योग महाकुंभ एक ऐसा सकारात्मक प्रयास है जो पूरी दुनिया को आपस में जोड़ता है। वें उत्तराखंड के आध्यात्मिक माहौल और संस्कृति से इतनी प्रभावित नजर आई कि पूरा जीवन यहीं बसकर जनसेवा का निर्णय ले लिया। तुर्की से आई येसिन का कहना है कि वे पिछले पांच सालों से योग कर रही है।
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योग के प्रति आकर्षण ही उन्हें उत्तराखंड का प्राकृतिक सौंदर्य ही उन्हें यहां तक खींच लाया है। वे योग को एक ऐसी दिशा के रूप में देखती है जो लोगों को निरोगी रहने के साथ ही आपसी सद्भावना से भी जोड़ता है। तुर्की से ही आई मेलिस ने बताया कि उन्होंने योग को इंटरनेट के जरिए जाना और इस बारे में और अधिक जानने समझने के लिए वे अपने साथियों के साथ यहां आई हैं। हरिद्वार में गंगा तट पर हो रहे इस आयोजन को लेकर वे काफी उत्साहित हैं।